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सावन विशेष : शिवजी सिद्ध करेंगे मनोकामना!

  • रवि योग में करें महामृत्युंजय मंत्र का जप

सावन का महीना १४ जुलाई को शुरू हो गया। महीने के शुरू होते ही शिवालयों में भक्त पूजा-अर्चना के लिए उमड़ने लगे हैं। शास्त्रों के अनुसार सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व होता है। छड़ी मुबारक, अमरनाथ यात्रा, रक्षा बंधन नित्य रूद्राभिषेक, सोमवार व्रत और शिव चतुर्दशी को कावड़ जलाभिषेक मंगला गौरी व्रत, हरियाली तीज और नागपंचमी आदि ऐसे साक्ष्य हैं, जो इसे शिव आराधना का महीना सिद्ध करते हैं। इस महीने में घर में पार्थिवेश्वर या नर्मदेश्वर के लिंग पर पूजा करनी चाहिए। मंदिर में भगवान शिव, पार्वती, गणेश, कार्तिकेय और नंदी सहित शिवपंचायत की पूजा करने का विधान है। पूजा के दौरान गंगाजल से शिवजी का अभिषेक सबसे बढ़िया माना जाता है।
सावन मास का पहला सोमवार १८ जुलाई यानी आज है और आज रवि नामक योग पड़ रहा है। इस योग में मनोकामना सिद्धि के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जप और शिव पुराण का पाठ बेहद लाभकारी रहेगा। साथ ही रवि योग में शिव परिवार की पूजा करने से सभी कष्ट दूर होते हैं। शुभ योग में सावन के पहले सोमवार के दिन भगवान शिव को कच्चा दूध, गंगाजल, बेलपत्र, काले तिल, धतूरा, बेलपत्र, मिठाई आदि अर्पित करना चाहिए और विधिवत पूजा करनी चाहिए।
पूजा का समय और मंत्र
भगवान शिव की पूजा का सर्वश्रेष्ठ काल-प्रदोष समय माना गया है। किसी भी दिन सूर्यास्त से एक घंटा पहले और एक घंटा बाद के समय को प्रदोषकाल कहते हैं। सावन में त्रयोदशी, सोमवार और शिव चतुर्दशी प्रमुख हैं। भगवान शंकर को भष्म, लाल चंदन, रुद्राक्ष, आक के फूल, धतूरे का फल, बेलपत्र और भांग विशेष प्रिय हैं। उनकी पूजा वैदिक, पौराणिक या नाम मंत्रों से की जाती है। सामान्य व्यक्ति ऊँ नम: शिवाय या ऊँ नमो भगवते रुद्राय मंत्र से शिव पूजन और अभिषेक कर सकते हैं। शिवलिंग की आधी परिक्रमा करें। शास्त्रों में शिव की आराधना को `आत्मा त्वं गिरिजा मति: सहचरा: प्राणा: शरीरं गृहं’ कहकर संबोधित किया गया है। यानी शिव और शक्ति क्रमश: आत्मा व मति के रूप में विराजमान न होकर मेरे शरीर को पूर्णता प्रदान करें।
अलग-अलग चीजों से अभिषेक का महत्व
शिव पुराण में कई चीजों से भगवान शिव के अभिषेक करने का फल बताया गया है। इसमें यह भी बताया है गया कि किन चीजों से अभिषेक के क्या फायदे होते हैं? मसलन, जलाभिषेक से सुवृष्टि, कुशोदक से दुखों का नाश, गन्ने के रस से धन लाभ, शहद से अखंड पति सुख, कच्चे दूध से पुत्र सुख, शक्कर के शर्बत से वैदुष्य, सरसों के तेल से शत्रु का नाश और घी के अभिषेक से सर्व कामना पूर्ण होती है।

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