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प्रशासन की लापरवाही से हुई घपलेबाजी! … एनआईसीयू से शिशुओं की कर दी गई अदला-बदली

 मां की सतर्कता से खुली पोल
सामना संवाददाता / मुंबई
जिला सामान्य अस्पताल व सरकारी मेडिकल कॉलेज की नवजात गहन चिकित्सा इकाई में नवजात शिशुओं की अदला-बदली किए जाने का मामला सामने आने के बाद खलबली मच गई। हालांकि मां की सतर्कता के कारण शिंदे राज में सरकारी अस्पताल के भीतर हुई इस घपलेबबाजी की पोल खुल गई है। इससे घटना में शामिल लोगों के मंसूबों पर पानी फिर गया। लेकिन घटना के सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन पर कुप्रबंधन के साथ ही कई तरह के सवाल उठने लगे हैं।
उल्लेखनीय है कि चंद्रपुर जिले के जिवती की दीक्षिता सुबोध चिकटे ने पांच दिन पहले जिला सामान्य अस्पताल में एक बेटी को जन्म दिया था। हालांकि, जन्म के समय बच्ची का वजन कम होने के कारण बच्ची को इलाज के लिए नवजात गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती कराया गया था। एनआईसीयू में मां को बच्चे के पास दूध पिलाने के लिए ले जाया जाता है और दूध पिलाने के बाद बच्चों की मां को वापस प्रसव कक्ष में भेज दिया जाता है। शुक्रवार दोपहर को दीक्षिता चिकटे को बच्ची को स्तनपान कराने के लिए ले जाया गया था। हालांकि, बच्ची दूध नहीं पी रही थी। ऐसे में दीक्षिता ने नर्स से पूछा कि बच्ची दूध नहीं पी रही है, उसे कोई परेशानी तो नहीं है। हालांकि, नर्स ने अस्पष्ट उत्तर दिए। दीक्षिता को लगा कि कुछ गड़बड़ है, क्योंकि दीक्षिता की बेटी का रंग गोरा और आंखें नीली थीं इसलिए जब उसने नैपी खोलकर देखा तो बच्चा बदल चुका था। उन्हें बेटी की जगह नवजात बेटा दे दिया गया था और उसका रंग भी काला था।
बदल दिया गया बच्चे के पैर पर लगा नाम का टैग
दीक्षिता ने तुरंत अपने पति सुबोध को फोन किया और बताया कि बच्चा बदल दिया गया है। उन्हें जैसे ही एहसास हुआ कि बच्चा बदल गया है, पति ने अस्पताल पहुंचकर ने हंगामा शुरू कर दिया। इस समय डॉक्टर और नर्स ने दीक्षिता को कहा कि आप पागल तो नहीं हो गई हो, यह बच्चा तुम्हारा ही है। हालांकि, महिला ने नर्स और डॉक्टर से पूछा कि मैं अपने पांच दिन के बच्चे को वैâसे भूल सकती हूं। बच्चे के पैर पर लगा नाम का टैग भी बदल दिया गया। इस घटना के बाद सुबोध चिकटे ने सीधे शिकायत दर्ज कराने की चेतावनी दी। उसके बाद, संबंधित डॉक्टर तथा नर्स भयभीत हो गए और उन्होंने खोजबीन शुरू कर दी।
…तब सौंपी गई बच्ची
इस बीच की गई जांच में पाया गया कि वास्तव में बच्चा बदल गया था। नवजात लड़की और लड़के को अगल-बगल रखा गया था इसलिए जब इस गड़बड़ी का एहसास हुआ तो नवजात बच्ची को दीक्षिता को सौंप दिया गया। इसके साथ ही बच्चे को भी उसकी मां को सौंप दिया गया। करीब तीन से चार घंटे तक मेडिकल कॉलेज में हंगामा चलता रहा। शिकायत के बाद सहायक डीन डॉ मंगम ने इस मामले में संबंधित डॉक्टरों और नर्सों के खिलाफ कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।

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