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एसडीएम की वार्डन से गंदी डिमांड! …रोज भेजो एक लड़की या खुद आ जाओ

• इनकार करने पर कराया छात्रावास बंद
सामना संवाददाता / शिवपुरी
खुद को प्रदेश की कन्याओं का मामा बतानेवाले सीएम शिवराज के सूबे में कन्याएं कितनी असुरक्षित हैं, यह दर्शाने वाला सनसनीखेज मामला मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में सामने आया है। यहां स्थित कन्या छात्रावास की वार्डन ने एसडीएम पर गंभीर आरोप लगाकर सनसनी पैâला दी है। आरोप है कि पिछोर एसडीएम ने छात्राओं सहित उनकी आबरू मांगी थी। तैयार न होने पर नियमों को ताक पर रखकर छात्रावास को बंद करवा दिया। छात्राओं को दूसरे छात्रावास में शिफ्ट करा दिया। जिसके बाद अधीक्षिका को छात्रावास के दफ्तर से अटैच कर दिया। इसकी शिकायत तत्कालीन अधीक्षिका ने ५० रुपए के स्टाम्प पर शपथ पूर्वक कलेक्टर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से की है।
बता दें कि सीनियर कन्या छात्रावास प्रथम की तत्कालीन अधीक्षिका ने आदिम जाति कल्याण विभाग के प्रभारी जिला संयोजक व वर्तमान पिछोर एसडीएम पर गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्रावास की तत्कालीन अधीक्षिका राजकुमारी कोली ने बताया कि आदिम जाति के तत्कालीन जिला संयोजक एवं हाल में पिछोर में पदस्थ एसडीएम बिजेंद्र यादव मई माह में छात्रावास का निरीक्षण करने आए थे। इस दौरान दबाव बनाते हुए कहा था कि रात को एक छात्रा को उनके बंगले पर भेजा करें और सुबह उस छात्रा को वापस ले जाया करें। उन्होंने बताया कि जब तक वह छात्राओं को नहीं भेज रहीं तब तक वे खुद उनके बंगले पर आ जाएं। राजकुमारी का आरोप है कि एसडीएम के मंसूबों को पूरा नहीं करने पर छात्रावास को बंद करने की धमकी दी गई। बाद में एसडीएम ने नियमों को ताक पर रख कर छात्रावास को बंद करा दिया। छात्राओं को शासकीय अनुसूचित जाति जिला स्तरीय कन्या उत्कृष्ट छात्रावास कमलागंज में शिफ्ट कर दिया। वहां महज ५० छात्राओं के रहने की ही व्यवस्था है, उसमें १०० छात्राएं वैâसे रहेंगी? आरोप है कि बगैर नोटिस दिए ही छात्रावास को खाली करा लिया। इसके साथ ही जिस रात उन्हें एसडीएम पिछोर का चार्ज मिला था, उसी रात उसका नियमबद्ध ट्रांसफर भी करवा दिया गया।
एसडीएम ने आरोपों को बताया निराधार
एसडीएम पिछोर बिजेंद्र यादव का कहना है कि वह अपनी जिम्मेदारी का पालन करने के लिए छात्रावासों के निरीक्षण पर जाते थे। लगाए गए आरोप निराधार हैं। छात्रावास की अधीक्षिका का ट्रांसफर प्रक्रिया का हिस्सा था और इसी बात से नाराज होकर वह इस तरह के उल्टे-सीधे आरोप लगा रही हैं।
रात में छात्रावास का चक्कर लगाने का आरोप
अधीक्षिका ने पिछोर एसडीएम पर रात के अंधेरे में छात्रावास में आने का भी आरोप लगाया है। अधीक्षिका का कहना है कि निरीक्षण के नाम पर अपने गंदे अरमानों को पूरा करना चाहते थे, जबकि नियमानुसार पुरुष या पुरुष अधिकारी कन्या छात्रावासों का निरीक्षण करने के लिए नहीं जा सकता है। छात्रावास अधीक्षिका ने इस संबंध में कुछ फोटो भी शिकायत के साथ उपलब्ध करवाए हैं।

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