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दूसरा पेन ड्राइव बम भी हुआ फुस्स!

•  देवेंद्र के दौर में हुई थी डॉ. लांबे की नियुक्ति
• अजीत पवार ने खोली फडणवीस की पोल

सामना संवाददाता/ मुंबई । विधानसभा में विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस राज्य की महाविकास आघाड़ी सरकार को मुश्किलों में डालने के लिए नई-नई तकरीबें ढूंढ़ते रहते हैं। पिछले कुछ दिनों से फडणवीस ‘पेनड्राइव बम’ के जरिए आघाड़ी सरकार को कटघरे में खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन उनके द्वारा सामने लाई गई दूसरी पेन ड्राइव भी पहली पेन ड्राइव की तरह फुस्की साबित हुई है। उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने कल यह कहकर फडणवीस की पोल खोल दी कि वक्फ बोर्ड में जब डॉ. मुदस्सर लांबे की नियुक्ति सदस्य के तौर पर फडणवीस सरकार के दौर में हुई थी न कि महाविकास आघाड़ी सरकार के कार्यकाल में। अजीत पवार ने खुलासा किया है कि फडणवीस की सरकार में वक्फ बोर्ड के सदस्यों का चुनाव हुआ था, जिसमें डॉ. लांबे चुनकर आए थे। इस तरह से अजीत पवार ने फडणवीस के दूसरे पेन ड्राइव बम की भी हवा निकाल दी है।
बता दें कि बीते दिनों विधानसभा में फडणवीस ने स्टिंग ऑपरेशन की दूसरी पेन ड्राइव पेश करते हुए आरोप लगाया था कि वक्फ बोर्ड के सदस्य डॉ. लांबे के अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से संबंध हैं। डॉ. लांबे और मोहम्मद अरशद खान के संवाद की ऑडियो क्लिप सबूत के तौर पर फडणवीस ने सदन में पेश की थी। फडणवीस ने आरोप लगाया कि महाविकास आघाड़ी सरकार में दाऊद के करीबियों की नियुक्तियां की जा रही हैं। असल में फडणवीस ने सदन में एक पेन ड्राइव दी थी। उसमें वक्फ बोर्ड के सदस्य डॉ. मुदस्सर लांबे की बातचीत के अंश हैं। हालांकि इसके जवाब में गृह मंत्री दिलीप वलसे पाटील ने स्पष्ट किया था कि वक्फ बोर्ड के सदस्यों की नियुक्ति से सरकार का कोई लेना-देना नहीं है। अब उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने फडणवीस की पेन ड्राइव का जवाब देते हुए कहा है कि महाराष्ट्र राज्य वक्फ बोर्ड में जब डॉ. लांबे चुने गए थे तब हमारी सरकार नहीं थी। देवेंद्र फडणवीस की सरकार थी। वक्फ बोर्ड सदस्यों का चयन चुनाव द्वारा किया जाता है। विभिन्न क्षेत्रों से १२ लोगों को चयनित करने का प्रावधान है। इन सदस्यों का चुनाव ३१ अगस्त २०१९ को हुआ था।
अजीत पवार के अनुसार उन दिनों वक्फ बोर्ड सदस्यों की चुनाव प्रक्रिया मुंबई के जिलाधिकारी के तत्वावधान में संपन्न हुई थी। बावजूद इसके पूरे साहस के साथ आरोप लगाया कि डॉ. लांबे की नियुक्ति महाविकास आघाड़ी सरकार ने की है। जब शरद पवार मुख्यमंत्री थे तब दाऊद के साथ सबंध होने के आरोप लगाकर बदनामी की गई थी। अगर किसी ने गलती की है तो उस पर आरोप लगाए जाएं। हम स्वीकार करते हैं कि गलत करने के लिए जनता ने हमें प्रतिनिधित्व नहीं दिया है।

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