" /> योग है सेहत का वरदान…कश्मीरा ईरानी का जीवन-ज्ञान, नृत्य है मुक्ति, अभिनय है ध्यान

योग है सेहत का वरदान…कश्मीरा ईरानी का जीवन-ज्ञान, नृत्य है मुक्ति, अभिनय है ध्यान

फिल्म, टीवी और थिएटर मे समान रूप से सक्रिय अभिनेत्री कश्मीरा ईरानी का जन्म २५ जुलाई १९८६ को महाराष्ट्र के पुणे में एक पारसी परिवार में हुआ। अपने अभिनय के जुनून को साकार करने के लिए १७ साल की उम्र में वह पुणे से मुंबई आ गई। अभिनय का अपना सफर शुरू करने से पहले कुछ वर्षों तक अपने चचेरे भाई के साथ पैâशन डिजाइनिंग का काम कर चुकी कश्मीरा ईरानी अपनी फिटनेस का सारा श्रेय योग और नृत्य को देती हैं।

न्यूयॉर्क के ‘द ली स्टार्सबर्ग थिएटर एंड फिल्म इंस्टीट्यूट’ से अभिनय की विधिवत शिक्षा लेनेवाली कश्मीरा ईरानी ने २००७ में टीवी धारावाहिक ‘अंबर धारा’ से अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने ‘पीके’, ‘टाइगर जिंदा है’ और ‘भारत’ जैसी फिल्मों में अहम किरदार निभाए, लेकिन उन्हें धारावाहिक ‘दोस्ती…यारियां…मनमर्जियां’ में समायरा के रोल से बड़ी लोकप्रियता हासिल हुई। लगातार चार वर्षों तक डांस म्यूजिकल शो ‘किंगडम ऑफ ड्रीम्स: जंगूरा’ में प्रदर्शन करनेवाली कश्मीरा को नृत्य से बहुत लगाव है। बकौल कश्मीरा, ‘मैं नृत्य की सभी शैलियों को सीखना चाहती हूं। जब मैं नृत्य कर रही होती हूं, तो किसी और दुनिया में खो जाती हूं। मेरे लिए अभिनय ध्यान के समान है, तो नृत्य मुक्ति की तरह है।’
जीवन का सबसे बेहतरीन उपहार है योग
बेहतरीन किताबें पढ़ने की शौकीन कश्मीरा ईरानी का कहना है कि शास्त्रों में सेहत संवारने के लिए केवल योग-आसन का जिक्र मिलता है। योग वह सबसे अच्छा उपहार है, जो आप खुद को दे सकते हैं। योग से खुद को जानने-समझने का ज्ञान मिलता है। ताजा-तरीन शोधों से भी स्पष्ट हो चला है कि योग शारीरिक और मानसिक रूप से वरदान है। आम योग-आसनों के साथ-साथ नियमित एरियल योग करनेवाली कश्मीरा कहती हैं कि योग से तनाव दूर होता है, अच्छी नींद आती है, खुलकर भूख लगती है और पाचन भी सही रहता है।
शाकाहार से हो गया प्यार
पारसी परिवार से होने के कारण अंडे से बने विविध व्यंजनों के साथ-साथ चिकन और फिशकरी-राइस को खूब पसंद करनेवाली कश्मीरा ईरानी अब शाकाहारी भोजन को प्राथमिकता देने लगी हैं। नाश्ते में अंडा और चॉकलेट मिल्कशेक लेनेवाली कश्मीरा के दोपहर के भोजन में अमूमन मां के हाथों बनी आलू की सब्जी, रोटी और दाल-चावल होता है। डिनर में चावल खाने से परहेज करती हैं। शाही मशरूम की दीवानी कश्मीरा का कहना है कि भोजन करते समय कभी वैâलोरी की चिंता नहीं करनी चाहिए। शांतचित्त होकर भोजन करना चाहिए।
शाही मशरूम की रेसिपी:
सामग्री: ३०० ग्राम मशरूम, दो चम्मच घी, एक चम्मच मक्खन, स्वादानुसार नमक, शाही गरम मसाला बनाने के लिए दालचीनी के दो छोटे टुकड़े, एक चम्मच शाही जीरा, एक चम्मच जीरा, एक चम्मच काली मिर्च, १० ग्राम सूखी अदरक, एक बड़ी इलाइची, जावित्री, थोड़े से पत्थर के फूल, आधा चम्मच साबुत धनिया, तीन लौंग, तीन हरी इलाइची, थोड़ा -सा जायफल, ग्रेवी बनाने के लिए एक चम्मच घी, एक तेजपत्ता, आधा चम्मच जीरा, एक चम्मच अदरक-लहसुन का पेस्ट, दो चम्मच प्याज की प्यूरी, तीन हरी मिर्च, एक चम्मच हल्दी पाउडर, एक चम्मच जीरा पाउडर, एक चम्मच धनिया पाउडर, एक चम्मच लाल मिर्च पाउडर, नमक, एक कटोरी पानी, पाव किलो टमाटर की प्यूरी, एक चुटकी शक्कर, दो चम्मच काजू का पेस्ट, एक चम्मच क्रीम और आधा नींबू।
विधि: मशरूम को घी, मक्खन और नमक में प्रâाई कर कटोरी में निकाल लें। ऊपर बताए गए मसालों को तीन मिनट तक भूनें और पीसकर शाही गरम मसाला तैयार कर लें। ग्रेवी के लिए बताई गई सारी सामग्री को गर्म घी में भून लें। इसमें पानी, टमाटर प्यूरी और एक चुटकी शक्कर डालें। इसके बाद काजू का पेस्ट, कूटा हुआ गरम मसाला, क्रीम और आधा नींबू का रस और सबसे अंत में प्रâाई मशरूम और स्वादानुसार नमक डालकर कुछ देर तक धीमी आंच पर पकाएं।
फायदे: मशरूम में भरपूर एंटी ऑक्सीडेंट होता है, विशेषकर एर्गोथियोनिन, जो बढ़ती उम्र के लक्षणों का कम करने और वजन घटाने में मददगार होता है, इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इसमें मौजूद सेलेनियम इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है। यह हड्डियों को मजबूत बनाता है। हृदय को स्वस्थ रखता है।

(लेखक स्वास्थ्य विषयों के जानकार, वरिष्ठ पत्रकार व अनुवादक हैं। ‘स्वास्थ्य सुख’ मासिक के संपादक रह चुके हैं।)