मुख्यपृष्ठस्तंभसेहत का तड़का : फिटनेस दिल से... हुनरमंद दिव्या दत्ता की सेहत...

सेहत का तड़का : फिटनेस दिल से… हुनरमंद दिव्या दत्ता की सेहत का राज

  • एस.पी.यादव

अभिनेत्री, मॉडल व लेखिका दिव्या दत्ता का जन्म २५ सितंबर १९७७ को पंजाब के लुधियाना में हुआ। हिंदी, पंजाबी, मलयालम, अंग्रेजी और नेपाली फिल्मों में अपने अभिनय की अलग छाप छोड़नेवाली दिव्या दत्ता खुद को फिट रखने के लिए नियमित पसीना बहाती हैं। उनका कहना है कि फिट रहने का जज्बा दिल में होना चाहिए। सेहत के प्रति समर्पण ही किसी व्यक्ति को फिट रखता है। जरूरी नहीं कि आप घंटों जिम करें लेकिन जो भी व्यायाम करें, दिल से करें।

लुधियाना के सेक्रेड हार्ट कॉन्वेंट से पढ़ाई करने के बाद दिव्या दत्ता ने टीवी के विज्ञापनों में मॉडलिंग शुरू कर दी। दिव्या ने साल १९९४ में हिंदी फिल्म ‘इश्क में जीना इश्क में मरना’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया था। १९९५ में ‘वीरगति’ में उन्होंने सलमान के साथ काम किया लेकिन १९९९ में आई पंजाबी फिल्म ‘शहीद-ए-मुहब्बत बूटा सिंह’ ने उन्हें लोकप्रियता के शिखर पर पहुंचाया। ‘वीर-जारा’, ‘भाग मिल्खा भाग’, ‘वेलकम टू सज्जनपुर’ जैसी १०० से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुकी दिव्या को फिल्म ‘इरादा’ के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें एक बार फिल्मफेयर और दो बार आईफा पुरस्कार मिला है। दिव्या ने अब तक दो किताबें- ‘मी एंड मां’ और ‘स्टार्स इन माई स्काई’ भी लिखी है।
प्रतिदिन डेढ़ घंटे करती हैं व्यायाम
सेहत को लेकर दिव्या काफी सजग रहती हैं। उनका कहना है कि जब हम दिल लगाकर काम करते हैं, तो उसकी तारीफ होती है। ठीक उसी तरह दिल लगाकर सेहत का ख्याल रखने से फिटनेस में निखार आता है। दिव्या दत्ता नियमित व्यायाम करती हैं। दिव्या दत्ता प्रतिदिन सुबह लगभग डेढ़ घंटा वर्कआउट करती हैं। वॉर्मअप एक्सरसाइज के बाद वे कुछ देर तक तेज गति से टहलती हैं, जॉगिंग करती हैं। जिम में वेट ट्रेनिंग, स्ट्रेचिंग और कार्डियो एक्सरसाइज पर ज्यादा जोर देती हैं। दिव्या प्रतिदिन आधा घंटा योग-अभ्यास करती हैं। वे इस तरह के आसनों का चयन करती हैं, जिनसे समूचे शरीर का व्यायाम हो जाए।
छोटी-छोटी खुराकों में भोजन
दिव्या अपने खान-पान पर भी पूरा ध्यान देती हैं। हालांकि वे कोई विशोष डाइट चार्ट नहीं फॉलो करती हैं लेकिन दिन में पांच-छह बार छोटी-छोटी खुराकों में भोजन लेती हैं। नाश्ते में ताजे फल, पोहा, दही और कभी-कभार पराठा लेती हैं। दोपहर के भोजन में सब्जी-रोटी, रात के भोजन में एक बाउल सूप, सलाद और दूध या जूस लेती हैं। दिन में पर्याप्त पानी पीती हैं। बीच-बीच में सब्जियों का जूस और नारियल पानी भी पाती हैं। झटपट कार्बाेहाइड्रेट्स प्रदान करनेवाले सपेâद चावल या आलू जैसे आहार का सेवन कम करती हैं। तैलीय भोजन और जंक पूâड से परहेज करती हैं। हर हाल में ८:३० बजे तक रात का भोजन कर लेती हैं।
शाकाहारी भोजन को प्राथमिकता
दिव्या को घर पर बना खाना पसंद है। पंजाबी व्यंजन, विशेषकर राजमा, सरसों का साग, पकौड़ा कढ़ी उन्हें बेहद पसंद है। उन्हें मशरूम सॉस के साथ बना पास्ता, आलू टिक्की, दाल-चावल विशेष पसंद हैं। उन्हें तंदूरी चिकन खास पसंद है लेकिन कोरोना संकटकाल के बाद वे शाकाहारी भोजन को प्राथमिकता देती हैं।
पास्ता विद मशरूम सॉस की रेसिपी
सामग्री: १०० ग्राम गेहूं का पास्ता, लगभग १५ मिनट तक गुनगुने पानी में भिगोया गया ५० ग्राम शिटाके मशरूम, टुकड़ों में कटा १०० ग्राम ताजा मशरूम, बारीक कटा एक प्याज, बारीक कटी लहसुन की एक कली, बारीक कटी एक चम्मच पार्सली या अजवायन के पूâल, ३० मिली. व्हाइट वाइन, काली मिर्च और स्वादानुसार नमक।
विधि: सबसे पहले नमकवाले पानी में पास्ता डालकर उबाल लें। पास्ता उबलने तक सॉस तैयार कर लें। एक पैन में ऑलिव ऑयल डालकर उसमें प्याज और लहसुन भून लें। इसके बाद इसमें मशरूम और वाइन डालें। जब वाइन पूरी तरह से पककर पैन से उड़ जाए तो इसमें थोड़ा-सा वह पानी डालें, जिसमें मशरूम भिगा रखा हो। फिर इसमें नमक, काली मिर्च, पार्सली आदि डालकर पांच से छह मिनट के लिए पकाएं। जब पास्ता पूरी तरह पक जाए तो उसमें ऊपर से तैयार की गई सॉस और हल्का-सा पास्ता वाला पानी डालें। जब ये पूरी तरह पक जाए तो आंच से उतारकर परोसें।
फायदे: इसमें पर्याप्त फाइबर, विटामिन और सेलेनियम जैसे खनिज पाए जाते हैं, जो इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में कारगर हैं। यह बेहतरीन एंटीऑक्सिडेंट है। इसमें कम वसा, कम सोडियम और कम कैलोरी होती है, जिसके कारण वजन को नियंत्रित रखने में कारगर है।
(लेखक स्वास्थ्य विषयों के जानकार, वरिष्ठ पत्रकार व अनुवादक हैं। ‘स्वास्थ्य सुख’ मासिक के संपादक रह चुके हैं।)

अन्य समाचार