मुख्यपृष्ठसमाचारस्वाभिमान को पहुंची ठेस... आनंद शर्मा ने दिया कांग्रेस को झटका!

स्वाभिमान को पहुंची ठेस… आनंद शर्मा ने दिया कांग्रेस को झटका!

  • चुनाव संचालन समिति के अध्यक्ष पद से दिया इस्तीफा
  • नवंबर में हिमाचल प्रदेश में है विधानसभा चुनाव
  • काफी समय से नेतृत्व से चल रहे हैं नाराज

सामना संवाददाता / शिमला
हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को एक बड़ा झटका लगा है। अपनी अनदेखी से नाराज पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा ने रविवार को पार्टी की संचालन समिति के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखे एक पत्र में उन्होंने कहा कि पार्टी में उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा था। विधानसभा चुनाव के लिए अहम बैठकों और फैसलों में उन्हें तरजीह नहीं दी जा रही। दूसरी ओर उन्होंने ट्वीट किया कि वे भारी मन से समिति का अध्यक्ष पद छोड़ रहे हैं। वे जीवनभर कांग्रेस सदस्य रहेंगे। हाईकमान ने शर्मा को हाल ही में प्रदेश कांग्रेस चुनाव समिति में सदस्य के रूप में भी शामिल किया है। आनंद शर्मा अब शीघ्र ही शिमला का दौरा करेंगे। पार्टी सूत्रों से मालूम हुआ है कि अप्रैल २०२२ में कांग्रेस संचालन समिति के अध्यक्ष पद पर तैनाती के बाद से आनंद शर्मा ने अभी तक एक भी बैठक नहीं बुलाई, जबकि पार्टी की अन्य कमेटियों खासकर चुनाव प्रचार कमेटी, कांग्रेस चुनाव घोषणापत्र समिति और पार्टी अनुशासन समिति की बैठकें कई बार हो चुकी हैं।
आनंद शर्मा हिमाचल प्रदेश के कद्दावर नेताओं में से एक हैं। कांग्रेस अध्यक्ष को भेजे गए पत्र में उन्होंने लिखा है कि उनके स्वाभिमान को ठेस पहुंची है, क्योंकि उन्हें पार्टी की किसी भी बैठक के लिए परामर्श या आमंत्रित नहीं किया गया। गौरतलब है कि आनंद शर्मा वर्ष २००९ से अप्रैल २०२२ तक राज्यसभा सदस्य रहे। वह पार्टी में कई प्रमुख पदों पर रहे हैं।
कांग्रेस के जी-२३ नेताओं के समूह में शामिल रहे नेता गुलाम नबी आजाद के जम्मू-कश्मीर में अभियान समिति के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद अब इस समूह के आनंद शर्मा ने भी त्यागपत्र दिया है। हालांकि वह प्रदेश में पार्टी उम्मीदवारों के लिए प्रचार करना जारी रखेंगे। गुलाम नबी आजाद और आनंद शर्मा जी-२३ समूह के प्रमुख नेता हैं, जो पार्टी नेतृत्व के फैसलों के आलोचक रहे हैं।
महत्वपूर्ण बैठकों में नहीं बुलाया
सोनिया गांधी को पत्र में आनंद शर्मा ने लिखा कि २६ अप्रैल को हिमाचल कांग्रेस के स्टीयरिंग कमेटी का प्रमुख बनाने के बावजूद आज तक उनकी भूमिका स्पष्ट नहीं की गई। उन्होंने लिखा कि बीते दिनों दिल्ली और शिमला में हिमाचल चुनाव को लेकर हुई पार्टी की महत्वपूर्ण बैठकों में भी उन्हें नहीं बुलाया गया। इन वजहों से हिमाचल कांग्रेस विधानसभा चुनाव समिति (स्टीयरिंग कमेटी) प्रमुख के पद से इस्तीफा देते हुए आनंद शर्मा ने साफ किया है कि वे पार्टी के चुनाव अभियान का सहयोग करते रहेंगे।
हिमाचल प्रदेश में गुजरात के साथ ही आनेवाले नवंबर में विधानसभा के चुनाव होने हैं इसलिए शर्मा के इस्तीफे को राजनीतिक विश्लेषक कांग्रेस के लिए बड़ा झटका मान रहे हैं। शर्मा हिमाचल प्रदेश में कभी जमीनी नेता नहीं रहे। उन्होंने सिर्फ एक बार १९८२ में विधानसभा का चुनाव लड़ा था। उसके बाद से वे लगातार राज्यसभा में मनमोहन सिंह की दोनों सरकारों में मंत्री रहे। पिछले साल उनके राज्यसभा का कार्यकाल खत्म होने के बाद उन्हें किसी भी राज्य से राज्यसभा का टिकट नहीं मिला। बताया जाता है कि इस वजह से वो पार्टी आलाकमान से नाराज चल रहे हैं। कई बार उन्होंने कांग्रेस आलाकमान के फैसलों पर सवाल उठाए हैं। अब जबकि हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस को एकजुट होकर चुनाव लड़कर जीतने की चुनौती है, ऐसे में आनंद शर्मा का इस्तीफा इशारा करता है कि हिमाचल कांग्रेस में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा।
इस बार थी कांग्रेस की बारी
हिमाचल प्रदेश में एक बार कांग्रेस और एक बार भाजपा की सरकार बनने का सिलसिला कई दशकों से चला आ रहा है। २०१७ में हुए विधानसभा चुनाव में वीरभद्र सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस की तत्कालीन सरकार को हटाकर भाजपा सत्ता में आई थी। तब भाजपा ने जयराम ठाकुर को मुख्यमंत्री बनाया था। चुनाव में भाजपा को राज्य की कुल ६८ सीटों में से ४४ सीटों पर जीत हासिल हुई थी, जबकि कांग्रेस महज २१ सीटों पर सिमटकर रह गई थी। कांग्रेस को उस चुनाव में १५ सीटों का नुकसान हुआ था, जबकि भाजपा को १८ सीटों का फायदा हुआ था।

अन्य समाचार