" /> `जरूरी नहीं अलग होने का मतलब लड़ाई हो!’-कमल सदाना

`जरूरी नहीं अलग होने का मतलब लड़ाई हो!’-कमल सदाना

नब्बे के दशक में अपनी अदाकारी से अपनी पहचान बनानेवाले कमल सदाना अपनी फिल्मों के जरिए सबके दिलों पर छा गए थे। उन्होंने कई हिट फिल्में दीं और फिल्म ‘रंग’ के गानों ने लाखों युवाओं को उनका दीवाना बना दिया था। आश्चर्य की बात तो यह है कि उनकी कई फिल्मों के गाने लोग आज भी गुनगुनाते हैं। कुछ समय के लिए उन्होंने बॉलीवुड से दूरी बना ली व अलग प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू कर दिया था। हाल में हुए उनके तलाक व अन्य कई मुद्दों पर बॉलीवुड के मासूम चेहरेवाले चॉकलेटी ब्वॉय कमल सदाना से योगेश कुमार सोनी की एक्सक्लूसिव बातचीत के मुख्य अंश-

►बॉलीवुड में वंशवाद और परिवारवाद के आरोप लगते रहते हैं। इस पर आप क्या कहना चाहेंगे?
मैं इस बात से बिल्कुल सहमत नहीं हूं। बॉलीवुड हो या क्रिकेट या फिर अन्य कोई भी क्षेत्र, जो जमीनी काम करेगा वो ही टिकेगा। यदि बॉलीवुड की बात करें तो आपकी एक्टिंग द शकों को पसंद आएगी, तभी आपको अगली फिल्म मिलेगी। फिर चाहे आपके पिता डायरेक्टर ही क्यों न हों। हमारे यहां ऐसे बहुत सारे कलाकार हैं, जिनके पिता या दादा सफल कलाकार थे लेकिन बच्चे नहीं चल पाए। हां, लेकिन यह सच है कि जिस क्षेत्र में आपके माता-पिता या रिश्तेदार होते हैं, आपको कुछ फायदा जरूर मिल जाता है।
►स्क्रिप्ट अब रिपीट होने लगी। एक मुद्दे पर एक बार में दो या उससे अधिक फिल्में बनने लगीं। इस पर आप क्या सोचते हैं?
मुद्दे सीमित हैं, जिसकी वजह से ऐसा होने लगा। चूंकि अब इतने डायरेक्टर व प्रोड्यूसर हो गए हैं, जिससे फिल्में ज्यादा बनने लगीं। साथ ही सिनेमा का स्वरूप भी बदल गया, जिसकी वजह से एक फिल्म मात्र कुछ समय का मनोरंजन बनकर रह गई। सन २००० से पहले की फिल्मों को हम कई बार देख लेते थे लेकिन अब कोई फिल्म दोबारा नहीं देखी जा सकती। पटकथा में ठहराव खत्म हो गया है। बदलते समय में अब दर्शकों को यही सब पसंद है।
►ओटीटी प्लेटफॉर्म को आप सकारात्मक लेते हैं या नकारात्मक?
हर चीज के दो पहलू होते हैं। ओटीटी को एक वरदान के रूप में माना जा रहा है। चूंकि मोबाइल में मात्र दो टिकटों के पैसों के खर्च पर आप पूरे वर्ष हर भाषा की कई फिल्मों के अलावा तमाम तरह की सामग्री देख लेते हैं। कोरोना काल में लोग घरों से बाहर नहीं जा सकते थे। लगभग एक वर्ष से अधिक समय हो गया सिनेमाघरों को खुले हुए। ऐसे समय में ओटीटी को ही मनोरजंन का एक बड़ा साधन माना जा रहा है। लेकिन यह एक समय तक के लिए अच्छा है। फिल्म देखने का जो मजा सिनेमाघरों में आता है, वो मोबाइल या टीवी पर देखने में कभी नहीं आ सकता।
►दर्शक जानना चाहते हैं कि आजकल उनके ‘रंग’बाज हीरो कहां हैं?
मैं उनके बीच ही हूं। मैं अपना एनिमेशमन स्टूडियो चलाता हूं और इसके अलावा बाकी कुछ प्रोजेक्ट पर भी काम कर रहा हूं। कई बार इंसान के सामने ऐसे हालात आ जाते हैं कि उसे राह बदलनी पड़ती है। मां-बाप व बहन के कत्ल के बाद जिंदगी पूरी तरह बदल गई थी। हर रोज कोशिश करता हूं उठने की और अपने उद्देश्य के लिए आगे बढ़ता हूं। बाकी दर्शकों का प्यार व उनका आर्शीवाद आज भी मिलता है, जिसके लिए मैं उनका धन्यवाद देता हूं। जल्द ही उनसे दोबारा मुलाकात होगी।
►हाल ही में आपके तलाक की खबर सुनी। क्या कारण रहा कि २१ वर्ष बाद यह सब हुआ?
देखिए मीडिया से कुछ नहीं छुप सकता। हां, यह सच है कि मैं और मेरी पत्नी अलग हो गए लेकिन हम लड़कर अलग नहीं हुए। कभी-कभी आपकी दिशा अलग हो जाती है और आपके साथी को एडजस्टमेंट करने में दिक्कत होती है। लेकिन हमें इस घटना को सकारात्मक लेना चाहिए। चूंकि हर किसी की जिंदगी के अपने मायने हैं। हर किसी को स्वतंत्र जीने का अधिकार है। मैं अपनी पत्नी का सम्मान करता हूं व जिंदगी भर करता रहूंगा।