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जहां विरोध न हो वहां लगाओ रिफाइनरी!…. नाणार परियोजना पर पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे की दो टूक

• तीन दिवसीय कोकण दौरे पर पहुंचे आदित्य ठाकरे
•  स्थानीय लोगों को विश्वास में लेने की दी सलाह

सामना संवाददाता / मुंबई । रत्नागिरी जिले में स्थित नाणार में प्रस्तावित रिफाइनरी परियोजना का स्थानीय निवासी विरोध कर रहे हैं। कल कोकण के तीन दिवसीय दौरे पर पहुंचे पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे ने इस मामले में स्पष्ट रूप से कहा कि यह परियोजना उस स्थान पर स्थापित की जाए, जहां किसी का विरोध न हो। स्थानीय भूमिपुत्रों को विश्वास में लेकर ही इस परियोजना को स्थापित किया जाना चाहिए।
तकरीबन तीन लाख करोड़ रुपए की लागतवाली रिफाइनरी एवं पेट्रोकेमिकल्स कॉम्प्लेक्स (आरपीसी) परियोजना नाणार में प्रस्तावित है। सालाना छह करोड़ मीट्रिक टन क्षमतावाली इस परियोजना का स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं, जिसके कारण परियोजना स्थापित नहीं हो पा रही है। शिवसेना पहले से ही स्थानीय लोगों की पक्षधर रही है। कल से कोकण के तीन दिवसीय दौरे पर पहुंचे पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे ने साफ किया कि आरपीसी परियोजना को ऐसे स्थान पर स्थापित करना चाहिए, जहां स्थानीय लोगों का विरोध न हो। लोगों के साथ चर्चा की जानी चाहिए और उन्हें विश्वास में लेकर ही परियोजना स्थापित करनी चाहिए। इस बात का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए कि स्थानीय लोगों के साथ अन्याय न हो। शिवसेना सांसद विनायक राऊत ने भी कहा कि जहां लोगों का विरोध न हो, परियोजना वहीं लगनी चाहिए।
चल रहे विभिन्न योजनाओं पर काम
मालवण में जेट्टी का निरीक्षण करने के बाद आदित्य ठाकरे ने बताया कि पर्यटन के विकास और संवर्धन के लिए कई चीजें चल रही हैं। मालवण नगर परिषद क्षेत्र में स्थापित होनेवाले एक्वेरियम एवं जैव विविधता सूचना केंद्र के बारे में आदित्य ठाकरे ने कहा कि एक्वेरियम और कई होटलों के लिए भी प्रस्ताव हैं। आवश्यक लाइसेंसों की संख्या ८० से घटाकर १० कर दी गई है। छत्रपति शिवाजी महाराज के किले सिर्फ किले नहीं बल्कि मंदिर हैं। उनके संरक्षण के साथ पर्यटन की दिशा में भी काम चल रहा है। इस दौरान पर्यावरण मंत्री ने साफ किया कि मुंबई में विधायकों को मुफ्त में घर नहीं दिए जाएंगे। मुंबई से बाहर रहनेवाले जरूरतमंद विधायकों को ही घर मिलेगा।

फडणवीस सरकार ने लिया था परियोजना स्थानांतरित करने का निर्णय
देवेंद्र फडणवीस सरकार ने मार्च २०१९ में नाणार परियोजना को स्थानांतरित करने का निर्णय लिया था। बीते रविवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा था कि मौजूदा महाराष्ट्र सरकार इस परियोजना को लेकर अपना मन बदल रही है, ऐसे में इसके दोबारा शुरू होने की उम्मीद जगी है।

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