मुख्यपृष्ठसंपादकीयशाह अब ‘पीओके' लाएंगे!

शाह अब ‘पीओके’ लाएंगे!

गृहमंत्री अमित शाह ने चुनाव के दौरान एक बार फिर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर का राग अलापना शुरू किया है। श्री शाह का कहना है कि पाकअधिकृत कश्मीर भारत का है और हम इसे वापस लेंगे। गृहमंत्री का यह बयान ताली पीटने और वोट मांगने के लिए ठीक है। ‘दिल बहलाने को गालिब ये ख्याल अच्छा है!’ वैसे ही ये शाह महाशय का खयाली राग है। पिछले दस वर्षों से मोदी-शाह का देश पर पूर्ण बहुमत शासन है और प्रधानमंत्री का सीना छप्पन इंच का है। २०१४ से मोदी कहते आ रहे हैं कि पाकअधिकृत कश्मीर को पाने के लिए ५६ इंच की छाती चाहिए और कांग्रेस के पास इतनी लंबी-चौड़ी छाती नहीं है। यानी मोदी ५६ इंची छाती वाले नेता हैं। बावजूद इसके वे पिछले दस वर्षों में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की ‘५६ इंच’ जमीन भी भारत में क्यों नहीं ला सके? प्रधानमंत्री मोदी को किसने रोका? इसका खुलासा गृहमंत्री शाह को करना चाहिए। कांग्रेस के यह कहते ही कि पड़ोसी देशों के पास परमाणु बम हैं, पड़ोसी देशों का सम्मान करो, भाजपा को प्रचार का मुद्दा मिल गया और वह चिल्ला रहे हैं कि कांग्रेस उन्हें पाकिस्तान से डरने को कह रही है। शाह कहते हैं, ‘अगर आप पाकिस्तान के परमाणु बम से डरना चाहते हैं, तो डरें। हम नहीं डरते।’ श्री शाह ने जो कहा वह निरर्थक है। देश का एक सपूत कुलभूषण जाधव पिछले आठ साल से पाकिस्तान की जेल में बंद है। भारत के लिए जासूसी करने का आरोप लगाते हुए जाधव को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ने अफगानिस्तान से अगवा कर लिया और पाकिस्तान में ठूंस दिया। उन्हें मौत की सजा सुनाई गई। कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान की वैâद से छुड़ाने के लिए इन लोगों ने क्या किया? अगर मोदी की ताकत पाकिस्तान के परमाणु बम से बड़ी होती तो कुलभूषण जाधव की घर वापसी हो गई होती। हजारों भारतीय मछुआरे पाकिस्तानी जेलों में बंद हैं और पिछले महीने जेलों में १७ मछुआरों की मौत की खबर धक्कादायक है। पाकअधिकृत कश्मीर जब लाना है तब लाइए लेकिन उससे पहले कुलभूषण जाधव और हमारे मछुआरों को पाकिस्तान के चंगुल से मुक्त कराएं। पाकिस्तान के पास परमाणु बम है और चूंकि यह परमाणु बम धर्मांध सिरफिरों के हाथ में है, इसलिए भारत को रक्षा के मामले में सतर्क रुख अपनाना होगा। शाह जिन्होंने कहा कि हम पाकिस्तान के परमाणु बम से नहीं डरते, पुलवामा विस्फोट में पहुंचा ४०० किलोग्राम आरडीएक्स वास्तव में कहां से आया? इसकी जांच नहीं करा सके। पुलवामा में ४० जवानों का नरसंहार किसने किया ये लोग अभी तक पता नहीं लगा पाए हैं लेकिन चुनाव जीतने के लिए ये चिल्ला रहे हैं कि हम पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर ले लेंगे। दरअसल, शाह को सबसे पहले मणिपुर पर काबू पाना चाहिए। आज भी वहां हिंसा और अत्याचार जारी है। शाह को चाहिए कि वे लद्दाख में घुस चुकी चीनी सेना को बाहर निकाल कर चीन द्वारा निगली गई भारत की भूमि को पुन: प्राप्त करें। चीन ने लद्दाख की ४,०६७ वर्ग किलोमीटर जमीन हड़प ली है और गृहमंत्री पाकअधिकृत कश्मीर पर कब्जा करने का राग अलाप रहे हैं। यदि आप पाकअधिकृत कश्मीर लेना चाहते हैं, तो ले लें। आपको किसने रोका है? खबर है कि इस वक्त पाकअधिकृत कश्मीर में भारत में विलय को लेकर पोस्टर लगे हैं। पाकअधिकृत कश्मीर में लोग बेचैन और परेशान हैं। नागरिकों और पुलिस के बीच झड़पें हो रही हैं। यह सच है कि बिजली की कमी, महंगाई, अधिक टैक्स वसूली और तानाशाही के कारण लोगों में आक्रोश है, लेकिन वही सवाल और वही आक्रोश भारतीय लोगों में भी मौजूद है और उसी आक्रोश से भारत में सत्ता परिवर्तन के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं। जैसे पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में ‘आजादी’ के नारे चल रहे हैं, वैसे ही भारत भी तानाशाही और भीड़तंत्र से आजादी चाहता है और ऐसे नारे लगाए जा रहे हैं। इसलिए गृहमंत्री अमित शाह को लोगों को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के ‘सेब’ दिखाने के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए। २०१४ से २०२४ तक दस सालों में मोदी-शाह ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर का इतना गन्ना निचोड़ लिया है कि लोगों की उस विषय से रुचि ही खत्म हो गई है। अगर शरणार्थी शिविरों में रह रहे हजारों कश्मीरी पंडितों को उनके घर भेज दिया जाए तो भी कहा जा सकता है कि मोदी-शाह ने कुछ काम किया। ‘पीओके’ तो बहुत दूर की कौड़ी है!

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