" /> शरद पवार को २५ वर्ष पहले ही प्रधानमंत्री पद मिलना चाहिए था! – संजय राऊत

शरद पवार को २५ वर्ष पहले ही प्रधानमंत्री पद मिलना चाहिए था! – संजय राऊत

राकांपा अध्यक्ष शरद पवार को २५ वर्ष पहले ही प्रधानमंत्री पद का मिलना चाहिए था, लेकिन उन्हें बनने नहीं देना है, इस एक द्वेष के चलते उत्तर के नेताओं द्वारा उन्हें स्थायी रूप से रोका गया। ऐसा विचार शिवसेना नेता व सांसद संजय राऊत ने कल व्यक्त किया।

नासिक में कल संजय राऊत ने पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि शरद पवार देश के २५ वर्षों से एकमात्र ऐसे नेता हैं, जिन्हें प्रधानमंत्री बनने का अवसर पहले ही मिल जाना चाहिए था। लेकिन उनकी उपलब्धियां उनके प्रधानमंत्री पद की यात्रा में रुकावट बनीं। कम कुवत वाले नेताओं को उनसे हमेशा भय रहा। उन्हें प्रधानमंत्री नहीं बनने देना है, इस द्वेष के चलते उत्तर के नेताओं ने उन्हें हर बार रोका, ऐसा भी राऊत ने स्पष्ट किया। ८० वर्ष का होने के बावजूद उम्र के बंधन में वे नहीं रुके हैं। लोगों के बीच हमेशा सक्रिय रहनेवाले शरद पवार में देश का नेतृत्व करने की सबसे अधिक क्षमता है। महाराष्ट्र के नेता के रूप में अगर वे यूपीए के अध्यक्ष बने तो आनंद ही होगा, ऐसा भी राऊत ने कहा।
महाविकास आघाड़ी सरकार की आर्थिक स्थिति कमजोर है क्या? इस सवाल के जवाब में राऊत ने कहा कि पूरे देश नहीं बल्कि पूरे विश्व की यही स्थिति है। इसीलिए केंद्र को राज्य की मदद करनी चाहिए, ऐसी भूमिका हमने अपनाई। महाराष्ट्र की केंद्र मदद करे। सिर्फ इस राज्य को नहीं, महाराष्ट्र जैसे अनेक राज्य भी मदद की प्रतीक्षा में हैं। जहां-जहां भाजपा की सरकार नहीं है, उनके साथ सौतेला व्यवहार करना उचित नहीं है।

दिल्ली की सीमा पर जारी किसान आंदोलन वामपंथियों ने हाईजैक कर लिया, यह चर्चा इस आंदोलन को बदनाम करने का षड्यंत्र है। यह आंदोलन किसी ने हाईजैक नहीं किया। पंजाब, हरियाणा के ये किसान हैं, इन्हें पूरे देश का समर्थन है। सरकार इस आंदोलन में अभी तक फूट नहीं डाल पाई है। यह आंदोलन चिंगारी है। देश का वातावरण धीरे-धीरे गर्म हो रहा है। सरकार को किसानों की सुननी चाहिए। एक-दो कदम पीछे आना चाहिए। उनके द्वारा बनाया गया कानून ब्रह्मवाक्य है, ऐसा केंद्र न समझे। सरकार को इस कानून पर पार्लियामेंट में चर्चा करवानी चाहिए। किसानों के हित में मार्ग निकालना चाहिए। इसे लोकतंत्र कहा जा सकता है। आपकी यदि इच्छा ही नहीं होगी तो आपातकाल इससे अलग नहीं था। इस पत्रकार परिषद में शिवसेना नासिक जिला संपर्क प्रमुख भाऊ चौधरी, विधायक सुहाष कांदे, मनपा में विपक्ष के नेता अजय बोरस्ते, गटनेता विलास शिंदे आदि उपस्थित थे।

नासिक का अगला महापौर शिवसेना का ही
आगामी स्वराज्य संस्थाओं के चुनाव महाविकास आघाड़ी एकजुट होकर लड़ेगी। नासिक में आघाड़ी के संख्याबल को देखते हुए शिवसेना पहले स्थान पर है। अगला महापौर शिवसेना का ही होगा, ऐसा विश्वास उन्होंने व्यक्त किया। मुंबई महापालिका भी शिवसेना के पास ही रहेगी। हैदराबाद में भाजपा को ओवैसी मिल गए, मुंबई में वे किस पार्टी से ओवैसी तैयार कर रहे हैं, देखना होगा, ऐसी चुटकी भी उन्होंने ली।