" /> शेयर मार्वेâट इकोनॉमी का रियल टाइम पैमाना नहीं

शेयर मार्वेâट इकोनॉमी का रियल टाइम पैमाना नहीं

यदि मैं कहूं कि शेयर मार्वेâट इकोनॉमी का रियल टाइम पैमाना नहीं है तो शायद मार्वेâट एक्सपर्ट मुझ पर हंसें लेकिन मौजूदा स्थिति को देखते हुए वर्तमान में मेरी प्रतिक्रिया यही रहने वाली है। जब यत्र-तत्र-सर्वत्र व्यापारी और मध्य वर्ग परेशान है। आम आदमी पीड़ा में है, लोगों को कुछ समझ में नहीं आ रहा है। लोगों की आय में गिरावट आई है, नौकरियां छूट रही हैं, व्यापार बंद हो रहें हैं, कुछ लोगों के व्यापार तो स्थायी तौर पर बंद भी हो गए, टूर-ट्रैवल, हॉस्पिटैलिटी और होटल रेस्टॉरेंट को तो तगड़ी मार लगी है, स्वूâल और स्वूâल के ट्रासंपोर्ट पर बुरी मार पड़ी है। दैनिक खर्च के लाले पड़े हैं, लोग अपनी किश्तें नहीं दे पा रहें हैं और लोग अपनों के जाने से या अपने और उनके स्वास्थ्य को लेकर चुनौतियों से परेशान हैं तो वैâसे मानें कि शेयर बाजार इकोनॉमी की सही तस्वीर दिखा रहा है। जब भारत समेत पूरा विश्व लॉकडाउन और बिजनेस बंद होने की प्रक्रिया का पालन कर रहा था, ऐसे में एशिया की सबसे बड़े शेयर मार्वेâट का सेंसेक्स अपने लाइफ टाइम उच्चतम स्तर ५० हजार से ऊपर चला जाता है, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का १५ हजार से ऊपर चला जाता है, जो करीब कोरोना पूर्व की स्थिति से दोगुना है। जो यह बताता है कि जमीनी धरातल से यह मार्वेâट संगत नहीं है। इसका कारण भी है शेयर बाजार में अन्य कारकों के अलावा यह सच है कि यह पैसिव आय कमाने का जरिया है, एक्टिव आय कमाने का नहीं। यहां मेहनत से नहीं पैसे से पैसा कमाया जाता है इसीलिए जब लॉकडाउन में मेहनतकशों के हाथ बंधे हुए थे, काम पर पाबंदी थी और शेयर मार्वेâट के सौदे मुक्त हस्त थे। कुछ लोग एक्टिव कार्य कम होने से भी शेयर मार्वेâट की तरफ रुख किये तथा जिन्हें पहले से ही घर बैठे कमाने की आदत थी, उन्होंने तो निवेश किया ही। पूरे वित्तीय वर्ष में ब्रोकरेज वंâपनियों ने पिछले साल अप्रैल से ३१ मई, २०२१ तक हर महीने औसतन १३ लाख नए डीमैट अकाउंट खोले हैं और ३१ मई तक देश में कुल ६.९ करोड़ डीमैट अकाउंट थे, जो यह बताता है कि निवेशक भी आय कमाने का जरिया बंद होने के बाद शेयर मार्वेâट की तरफ रुख कर रहे थे, जिसका मतलब हुआ की लॉकडाउन ने शेयर मार्वेâट को अपना निवेशक आधार बड़ा करने में सहायता प्रदान की।
इसीलिए मेरा मानना है कि यदि कोई शेयर मार्वेâट को इकोनॉमी का रियल टाइम पैमाना मानता है तो वह गलत है क्योंकि यह खुली आंखों से दिखने वाले सच से उलट है। यह सब जानते हैं कि कोरोना की पहली और दूसरी लहर और लॉकडाउन के चलते देश की आर्थिक रफ्तार सुस्त हुई है। देश का आर्थिक इम्यून सिस्टम कमजोर हुआ है और महामारी के असर के कारण देश की आर्थिक ग्रोथ चार दशक के निचले स्तर पर आ गई है जबकि इन सब के बावजूद शेयर मार्वेâट नित नई ऊंचाइयां छू रहा है।
यह लोगों को आश्चर्य में डालता होगा कि इतना कुछ होने के बाद भी शेयर मार्वेâट ऊपर की तरफ क्यों भाग रहा है। इसके कारण हैं, जहां तक मैं देख पा रहा हूं मेरा मानना है कि यह मार्वेâट इकोनॉमी के कारण ऊपर नहीं गया है, निवेशक विशेष और परिस्थिति विशेष के कारण गया है। निवेशकों के पास एक्टिव निवेश के विकल्प के अभाव में शेयरों में निवेश बढ़ा है और लोग पैसिव इनकम की तरफ ज्यादा रुख किये हैं ताकि अक्रियाशील होते हुए भी कुछ आय को कमाया जा सके। इसके अलावा जो बड़े निवेशक थे वह पोस्ट कोरोना के बाद का समय देख रहे थे। ऐसे निवेशक मानते हैं कि बाजार में मौजूदा तेजी भविष्य में होने वाले बदलाव और आर्थिक सुधार की वजह से है। देश में वैक्सीनेशन बढ़ने से पाबंदियों में ढील मिलेगी, जो हम पिछले एक हफ्ते से देख भी रहे हैं। दूसरी लहर में भी पिछले लॉकडाउन जैसी सख्ती नहीं देखी गई और इंडस्ट्रीयल कामकाज में थोड़ी रियायतें भी दी गर्इं, जिस कारण परिस्थितियां वैसी नहीं थीं जैसी पहली लॉकडाउन में थीं।
हाल फिलहाल के ग्रोथ में इन सबके अलावा शेयर बाजार में रेग्युलर इकोनॉमी के अलावा अन्य पैâक्टर भी हैं, जिसने इसे प्रभावित किया है-जैसे कि विदेशी शेयर बाजारों में पॉजिटिव ग्रोथ का पाया जाना, बॉन्ड मार्वेâट में आई स्थिरता, कोरोना के मामलों में लगातार गिरावट, देश में वैक्सीनेशन की रफ्तार में तेजी और बिक्री में गिरावट के बाद भी वंâपनियों ने चौथी तिमाही में लाभ कमाया। एशिया के सबसे पुराने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड वंâपनियों का नेटवर्थ, देश की जीडीपी से भी ज्यादा हो गई, कारण निवेशकों को आज की चिंता के मुकाबले भविष्य में होने वाली भारत की आर्थिक मजबूती ज्यादा समझ में आ रही है तथा वर्तमान में घरेलू बाजारों को फॉरेन मार्वेâट का भी सपोर्ट मिल रहा है। आंकड़ों के मुताबिक गत वित्तीय वर्ष २०२०-२१ में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने करीब २.७५ लाख करोड़ रुपए का निवेश किया, जो दो दशक में सबसे ज्यादा निवेश है। निवेशक उन शेयरों में खरीदारी कर रहे हैं, जिन वंâपनियों में अच्छी ग्रोथ के संकेत हैं। बाजार में खरीदारी का नतीजा है कि लिस्टेड वंâपनियों की कुल मार्वेâट वैल्यू २३० लाख करोड़ रुपए के करीब पहुंच गई है।
उपरोक्त विश्लेषण से यही पता चलता है कि शेयर मार्वेâट देश की आर्थिक स्थिति का रियल टाइम पैमाना नहीं है, इसमें वर्तमान के अलावा भविष्य के भी कई पैâक्टर्स शामिल होते हैं। साथ में सेंसेक्स ऊपर ले जाने के पीछे संस्थागत निवेशकों, जिसमें घरेलू और विदेशी दोनों शामिल हैं और जिनका निवेश रणनीतिक होता है के निवेश निर्णय भी शामिल होते हैं। यदि आपको भविष्य में लाभ कमाना है तो शेयर बाजार जाना ठीक होता है लेकिन यदि आपको वर्तमान आय के उद्देश्य से निवेश करना है तो संभल कर करना पड़ेगा क्योंकि तस्वीर वह नहीं है, जो दिख रही है। इसमें वंâपनियों के पंâडामेंटल के अलावा कुछ अनुमानों का भी खेल है।
अत: कोई यदि दूर बैठ कर यह सोचे कि चूंकि शेयर बाजार ऊपर की तरफ जा रहा है, लोगों के पास बचत है, लोग निवेश कर रहें हैं तो यह गलत सोच है। क्योंकि यह तेजी इन कारणों से नहीं है, यह तेजी परिस्थिति विशेष और निवेशक विशेष के कारण है, जिसमें वंâपनियों का परफॉरमेंस कम और अनुमान और कयास ज्यादा हैं।
(लेखक अर्थशास्त्र के जानकार हैं। आर्थिक, सामाजिक तथा राजनैतिक विषयों के विश्लेषक हैं।)