मुख्यपृष्ठनमस्ते सामनावैद्यजी बताइए: शीत प्रभावटी खाएं पथरी से मुक्ति पाएं!

वैद्यजी बताइए: शीत प्रभावटी खाएं पथरी से मुक्ति पाएं!

डाॅ. हरीश सिंह।  २०१६ से मुझे वेरीकोज वेन की बीमारी है। दाहिने पांव का ऑपरेशन करवा चुका हूं। लेकिन दोनों पैरों में हरी कोशिकाओं के साथ भद्दे निशान दिखते हैं। हाथ-पांव की नसें दुखने के साथ ही पूरे बदन में दर्द रहता है। दवा बताएं?
– अनिल कुमार चौबे, गोरेगांव
आरोग्यवर्धिनी वटी एवं त्रिफला गुग्गुल की दो-दो गोलियां दिन में तीन बार गर्म पानी के साथ सेवन करें। महामंजिष्ठादि क्वाथ ६-६ चम्मच दो बार भोजन के बाद सम प्रमाण पानी मिलाकर लें। गुडुची घनवटी दो-दो गोली दिन में दो बार पानी के साथ सेवन करें। दोनों पैरों पर क्रेप बैंडेज बांधे। कामकाज और चलते-फिरते समय बैंडेज बांधना आवश्यक है। वेरीकोज वेन के कारण पैरों में दर्द होता है। इन दवाओं से काफी राहत होगी। रात को सोते समय पांव के नीचे तकिया लगाएं। तीखा, मिर्च-मसाला खाने में कम करें। किसी भी प्रकार का मसाज पैरों में न करें।

• २००८ में पथरी की शिकायत होने पर मैंने लिथोट्रिप्सी ऑपरेशन करवाया था। लेकिन २०२१ जब दोबारा पेट दर्द हुआ तो सोनोग्राफी करवाने पर मालूम पड़ा कि वापस दो पथरी किडनी व मूत्र नली में हो गई है। ग्रेड वन का हाइड्रोनेफ्रोसिस भी है। डॉक्टर ने सर्जरी की सलाह दी है। दवा बताएं?
– जियालाल, आंबिवली, ठाणे
शरीर पथरी मुक्त हो जाए तब भी दोबारा पथरी बन सकती है। आपके शरीर में पथरी बनने का अनुकूल माहौल होने और आपके आहार-विहार के कारण इस प्रकार की तकलीफ पुन: हो जाती है। पानी कम पीने, पनीर, दूध, चीज, आंवला, कोहड़ा, मशरूम, बैंगन, मांसाहार के ज्यादा सेवन आदि कारणों से भी शरीर में पथरी बनती है। गोक्षुरादि गुग्गुल व शीत प्रभावटी की दो-दो गोलियां दिन में ३ बार पानी के साथ लें। शंख वटी तथा पाषाणभेद घन की एक-एक गोली दिन में दो बार सेवन करें। सुबह-शाम वरुणादि क्वाथ चार-चार चम्मच दो बार भोजन के बाद सम प्रमाण पानी मिलाकर लें। दिन में कम-से-कम ३ से ४ लीटर पानी अवश्य पीना है। कुलथ की दाल का पानी या उसका सूप बनाकर रोज एक कप पीएं। कुलथ बहुत प्रभावशाली होता है, जो पथरी का विघटन करता है। उपरोक्त दवाइयों का सेवन करने से पथरी अंदर टूटकर, मूत्र मार्ग से बाहर निकल जाएगी। प्रत्येक ६ से ८ महीने में अपने पेट की सोनोग्राफी व मूत्र परीक्षण करवाते रहें।

• मेरे चेहरे पर बहुत मुंहासे हैं। त्वचा रोग विशेषज्ञ ने मुझे एंटीबायोटिक मीनोसाइक्लिन खाने की सलाह दी है, जिसके कारण मेरे बदन में हीट की फीलिंग होती है। दवा बताएं?
– शिल्पा वर्मा, चेंबूर
मुहांसों के लिए मीनोसाइक्लिन दवा का उपयोग किया जाता है। मूलत: यह दवा जीवाणु प्रतिरोधक एंटीबायोटिक है। काफी लंबे समय तक इसका प्रयोग करने से मसूढ़ों का रंग नीला पड़ने लगता है और भूख वगैरह भी कम हो जाती है। मेरी दृष्टि में यह दवा लंबे समय तक उपयोग में न लाएं। आरोग्यवर्धिनी वटी, सूक्ष्म त्रिफला टैबलेट, गंधक रसायन एवं वैâशोर गुग्गुल की एक-एक गोली दिन में तीन बार गर्म पानी से सेवन करें। मंजिष्ठादि क्वाथ ६-६ चम्मच दो बार सम प्रमाण पानी मिलाकर भोजन के बाद सेवन करें। सारिवा, यष्टिमधु एवं हरिद्रा इन तीनों को आधा-आधा चम्मच लेकर दिन में एक बार शहद या पानी के साथ सेवन करें। चेहरे पर के मुहांसों से छेड़छाड़ नहीं करें। चेहरे को दिन में चार से पांच बार सादे अथवा गर्म पानी से धोएं। हर बार चेहरे पर साबुन न लगाएं। पूरे २४ घंटे में केवल एक बार ही साबुन का प्रयोग करें। बेसन के आटे से चेहरे को साफ करना बेहतर होगा या फेस पैक बनाकर उससे साफ करें। रक्त चंदन, मंजिष्ठा, संतरा छाल, गुलाब पत्र, अनंत मूल, यष्टिमधु चूर्ण इन सभी को ५०-५० ग्राम लेकर मुल्तानी मिट्टी १०० ग्राम, हल्दी ३० ग्राम लेकर इनको एक साथ मिलाकर रख लें। उपरोक्त मिश्रण का उपयोग चेहरे को साफ करने के लिए करें। इससे चेहरे पर निखार आएगा। हरी सब्जी एवं फलों का भोजन में ज्यादा प्रयोग करें। द्रव आहार ज्यादा-से-ज्यादा लें। फ्राइड फूड, जंक फूड, फास्ट फूड न खाएं। चेहरे को धूप और गर्मी से भी बचाएं।

• पिछले २० साल से ड्राइविंग कर रहा हूं और मेरे पैर की हड्डी विशेष रूप से टखने में ४ सालों से दर्द है। एड़ी में इंजेक्शन भी लगवाया, परंतु फायदा नहीं हो रहा है। दवा बताएं?
– मोहन श्याम, कोलीवाड़ा, सायन
आपको ‘ कैल्केनियल स्पर’ हुआ है। आयुर्वेद में इसे वात कंटक के नाम से जाना जाता है। सुबह उठने के बाद जमीन पर पैर रखने में काफी पीड़ा होती है। आप मोटा स्पंज युक्त चप्पल या जूता पहने। योगराज गुग्गुल, लाक्षादि गुग्गुल की दो-दो गोलियां दिन में तीन बार गर्म पानी से लें। रास्नादि क्वाथ चार-चार चम्मच समप्रमाण पानी मिलाकर भोजन के बाद लें। रोज शाम को गर्म पानी से पैरों में सेंक करें। दवा ३ से ४ महीने लगातार लें। ऑर्थोपेडिक सर्जन स्टेरॉयड का इंजेक्शन देते हैं। इससे तात्कालिक फायदा जरूर होता है, परंतु यह शरीर के लिए नुकसानदेह है।

एम.डी., पीएच.डी. (आयुर्वेद) प्राध्यापक व वरिष्ठ चिकित्सक, केजी मित्तल पुर्नवसु आयुर्वेद महाविद्यालय व अस्पताल, चर्नी रोड, मुंबई-०२

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