मुख्यपृष्ठनए समाचारशश्श्श्...कोई है... जीवनसाथी की ‘जासूसी’! गरबा के मौसम में कई दंपति...

शश्श्श्…कोई है… जीवनसाथी की ‘जासूसी’! गरबा के मौसम में कई दंपति ने एक-दूसरे के पीछे ही लगा दिए हैं गुप्तचर

  • राजस्थानी और गुजराती परिवारों में डिटेक्टिव की डिमांड है ज्यादा

सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई सहित देश में नवरात्रि की शुरुआत आज से हो रही है। इन दिनों मुंबई और गुजरात पूरी तरह नवरात्र की मस्ती और उमंग भरे माहौल में डूब जाते हैं। ऐसे में युवक-युवतियां अपने घर से शाम को निकलते हैं। देर रात तक या कई बार सुबह ही घर लौटते हैं। इसके पीछे प्रत्यक्ष कारण तो मध्‍यरात्रि तक चलनेवाले गरबा और डांडिया के कार्यक्रम होते हैं। लेकिन कई बार इस माहौल का फायदा युवक-युवती अपने अभिभावकों और पति-पत्नी एक दूसरे को चीट करने के लिए भी इस्तेमाल करते हैं। इसलिए आमतौर पर नवरात्र के दौरान अभिभावक अपने बच्चों की और पति-पत्नी एक दूसरे पर नजर रखने के लिए प्राइवेट डिटेक्टिव (जासूस) का सहारा लेते हैं।
मुंबई की पहली महिला जासूस रजनी पंडित ने ‘दोपहर का सामना’ से बात करते हुए कहा कि पिछले दो सालों से कोरोना महामारी के कारण गरबा और डांडिया के कार्यक्रम आयोजित नहीं हो रहे थे। इसलिए काम नहीं मिल रहा था लेकिन इस बार पहले की तरह सामान्य कार्यक्रम हो रहे हैं। हमें काम भी मिल रहा है। पिछले दो-तीन दिनों में दस से ज्यादा काम आए हैं।
रजनी पंडित ने बताया कि नवरात्रि पर आयोजित होनेवाले आयोजनों के दौरान युवक-युवतियां डांडिया-गरबा के नाम पर घरों से बाहर रहते हैं। कई पति-पत्नी भी, जिनके रिश्ते अच्छे नहीं चल रहे होते हैं, अलग-अलग आयोजनों में जाते हैं। रजनी ने बताया कि जब माता-पिता या पति-पत्नी को संदेह होता है, तो वे हमारे पास आते हैं। हमें उस व्यक्ति पर नजर रखने के लिए कहते हैं। हमारे जासूस उन पर नजर रखते हैं। संबंधित व्यक्ति की पूरी जानकारी क्लाइंट के साथ शेयर करते हैं। रजनी पंडित ने बताया कि कुछ माता-पिता सुरक्षा के लिहाज से भी बच्चों पर नजर रखने के लिए कहते हैं, वहीं कुछ परिवार अपनी होनेवाली बहू या दामाद की भी जासूसी करवाते हैं। इस दौरान ऐसे भी केस आते हैं, जिसमें कोई जोड़ा पहले से ही तलाक के लिए कोर्ट जा चुका है जिसके लिए उन्हें और सबूतों की आवश्यकता है।
एक अन्य डिटेक्टिव एजेंसी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सोशल मीडिया आम लोगों की जिंदगी बन गई है। इनके माध्यम से लोग अक्सर अफेयर में पड़ जाते हैं। लेकिन परिवार की बंदिशें, बड़े- बूढे की रोक-टोक से इनका मिलना मुश्किल हो जाता है। हालांकि नवरात्र के दिनों में उन्हें मौका मिल जाता है और गरबा खेलने के बहाने शहर से दूर आकर अपने प्यार को परवान चढ़ाते हैं। परिवार शक को आधार बनाकर जासूस अप्वाइंट करते हैं। वर्तमान में मेरे पास मुंबई के साथ-साथ सूरत, अमदाबाद, राजस्थान में से कई क्लाइंट हैं। अगर मुंबई में काम होता है तो हम ४० से ६० हजार रुपए तक चार्ज करते हैं। मुंबई से बाहर के काम का खर्च कई अन्य बातों पर निर्भर करता है। हम दो से लेकर नौ दिन तक की पूरी जानकारी और फॉलोअप का काम लेते हैं।

अन्य समाचार