मुख्यपृष्ठसंपादकीयशिंदे-फडणवीस का गुंडाराज!...उखाड़ फेंको!

शिंदे-फडणवीस का गुंडाराज!…उखाड़ फेंको!

पिछले डेढ़ साल में महाराष्ट्र देश का सबसे असुरक्षित राज्य बन गया है। रोज कहीं न कहीं हत्या हो रही है और राज्य के मुख्यमंत्री, गृहमंत्री ‘शेमलेस’ तरीके से ऐसे अपराधियों का समर्थन कर रहे हैं। इस वजह से क्या महाराष्ट्र गुंडों का राष्ट्र बन गया है? ऐसा लगने लगा है। युवा और ऊर्जावान शिवसेना पदाधिकारी अभिषेक घोसालकर की गुरुवार शाम हत्या कर दी गई। अभिषेक पर अंधाधुंध फायरिंग करने के बाद हत्यारे ने खुद को भी गोली मार ली। इसलिए इस मामले में संदेह बढ़ गया है। महाराष्ट्र को हिलाकर रख देने वाली और मुंबई शहर में हंगामा मचा देने वाली इस हत्या से मुख्यमंत्री और उनके गृहमंत्री के माथे पर शिकन तक नहीं आई। गृहमंत्री का कहना है, ‘कुछ लोग इस मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं। कल की घटना निजी दुश्मनी के चलते हुई है। इसे राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है।’ अभिषेक का हत्यारे से क्या विवाद था इसकी जांच होनी अभी बाकी है, लेकिन गृहमंत्री ने घोषणा कर दी कि व्यक्तिगत झगड़े की वजह से हत्या हुई। यानी यह घटना पर पर्दा डालकर जांच को खत्म करने की कोशिश है। हत्यारे मॉरिस भाई का हाल ही में मुख्यमंत्री के ‘वर्षा’ में आना-जाना था और उसकी मुख्यमंत्री के साथ मुलाकातें हुईं, क्या इस सत्य से गृहमंत्री इनकार करेंगे? अभिषेक घोसालकर बहुत विनम्र और अजातशत्रु थे। इसलिए व्यक्तिगत दुश्मनी के चलते उनकी हत्या हुई, इस तरह का अनर्गल बकवास गृहमंत्री क्यों कर रहे हैं? वे किसके अपराध पर पर्दा डाल रहे हैं? महाराष्ट्र में गुंडागर्दी का उन्माद बढ़ गया है और घोसालकर की हत्या उस उन्माद का चरम है। इसलिए असफल गृहमंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए, ऐसी मांग करते ही फडणवीस द्वारा दिया गया बयान अत्यंत दुर्भाग्यशाली और मानवता पर कालिख पोतने वाला है। ‘क्या विपक्ष इस बात पर इस्तीफा मांगेगा कि एक कुत्ते का पिल्ला गाड़ी से कुचलकर मर गया?’ इस बेशर्म बयान की जितनी निंदा की जाए, उतना कम है। वे महाराष्ट्र में गुंडागर्दी के शिकार लोगों की तुलना कुत्तों से कर रहे हैं। हिंदू धर्म में, मानव धर्म में कुत्तों को भी यानी जानवरों को भी सम्मान से जीने का अधिकार दिया गया है। यही सच्चा हिंदू धर्म है, लेकिन फडणवीस अपने गुरु मोदी के नक्शेकदम पर चलकर अपनी मनमर्जी से बात कर रहे हैं। राजनीतिज्ञ गुंडों को आश्रय देते हैं ऐसा अब तक कहा जाता था, लेकिन महाराष्ट्र में राजनीति और सत्ता गुंडों-माफियाओं के हाथ में चली गई है, ऐसा दिख रहा है। आए दिन हो रही घटनाओं से महाराष्ट्र की गरिमा को कलंक लग ही गया था, लेकिन जिस तरह अंधाधुंध फायरिंग कर अभिषेक घोसालकर की नृशंस हत्या की गई, उससे महाराष्ट्र ही हिल गया। शिवसेना के उपनेता और कट्टर निष्ठावान शिवसैनिक विनोद घोसालकर के चिरंजीव थे अभिषेक। अभिषेक खुद भी शिवसेना के नगरसेवक थे। वह मुंबई बैंक के निदेशक थे। शिवसेना के संकटकाल के दौरान पिता-पुत्र एक निष्ठा के साथ डटे रहे। ऐसे साहसी युवा कार्यकर्ता की एक गुंडे ने अंधाधुंध गोलियां चलाकर हत्या कर दी। राज्य के असंवैधानिक सरकार के गुंडों के हाथ की कठपुतली बन जाने से ही राज्य में इस तरह की गुंडागर्दी बेखौफ जारी है। राज्य के मुख्यमंत्री वैâबिनेट की बैठकों की अपेक्षा गुंडों की बैठकों में ज्यादा हाजिरी लगाते हैं। राज्य की ठेकेदारी, अर्थव्यवस्था गुंडागर्दी की प्रवृत्ति के लोगों को सौंपकर शिंदे गैंग इस तरीके से खुद को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है तो इस गुंडों के राज को उखाड़ फेंकने की हिम्मत शिवसेना में है। यह शिवसेना चुनाव आयोग द्वारा खरीदी गई शिंदे की घाती सेना नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र के गौरव की है। कल्याण के भाजपा विधायक गणपत गायकवाड ने पुलिस थाने में ही फायरिंग कर दी। शिंदे ही महाराष्ट्र में अपराधियों के ‘बॉस’ हैं, इस तरह का आरोप सत्ताधारी पार्टी का एक विधायक करता है और उसका यह आरोप जब तक हवा में बंदूक की गोलियों की तरह ‘धांय धांय’ उड़ता है, मुंबई में अभिषेक घोसालकर पर गोलियां बरसा कर हत्या कर दी जाती है। फडणवीस अब तक के सबसे असफल और अकुशल गृहमंत्री साबित हुए हैं। फडणवीस काल में हत्या, अपहरण, फिरौती, भ्रष्टाचार, वसूली जोरों पर चल रही है, लेकिन गृहमंत्री फडणवीस आंखों पर पट्टी बांधे हुए हैं। महाराष्ट्र के हर कोने में केवल गुंडों और गिरोह बाजों का कोहराम मचा है। ऐसे समय में गृहमंत्री को मंत्रालय में जमकर बैठना चाहिए। पुलिस और गुंडों पर नकेल कसने के लिए कार्रवाई का आदेश जारी करना चाहिए। क्या उन्होंने महाराष्ट्र राज्य को गुंडों और गुंडों के ‘वर्षा’ में बैठे सरदार को सौंप दिया है? नगर जिले में एक आढाव वकील दंपति की हत्या कर दी गई। नगर के विधायक और उनके सहयोगियों ने लोगों की संपत्ति को बलपूर्वक हड़पने का काम शुरू कर दिया है। राज्य की जनता इतनी भयभीत और लाचार कभी भी नहीं हुई थी। एक राज्य के रूप में महाराष्ट्र हमेशा एक तनी हुई गर्दन के साथ जीता रहा है। आज उस तनी हुई गर्दन पर गुंडागर्दी ने आघात किया है। अमित शाह और नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र पर असंवैधानिक राज और मुख्यमंत्री थोप दिया। उस मुख्यमंत्री के माध्यम से लूट का माल गुजरात पहुंचाया जा रहा है। शिंदे सरकार ने लूटपाट और डवैâती करने के लिए जगह-जगह ठग और लुटेरों को तैनात किया है। उसके लिए हत्या हो जाए वह भी चलेगा। राज्य की हालत बेहद विकट हो गई है। अभिषेक घोसालकर की हत्या से यह पता चलता है कि यह विकट परिस्थिति किस हद तक पहुंच गई है। पुलिस पक्षपाती बन गई है और अपनी-अपनी टोली के पुलिस अधिकारियों को मौके की जगह पर नियुक्त कर सरकार द्वारा प्रायोजित गुंडों को संरक्षण दिया जा रहा हो तो इसके अलावा और क्या होगा? महाराष्ट्र सदैव देश का मार्गदर्शक रहा है। देश महाराष्ट्र की राह पर आगे बढ़ा। आज महाराष्ट्र की ‘दिशा’ चूक गई है। इसलिए महाराष्ट्र की यह दशा दिखाई दे रही है। राज्य में लुटेरों की टोली और ठगों के अच्छे दिन आ गए हैं। जब ऐसा होता है तो राष्ट्र बर्बाद हो जाता है। महाराष्ट्र में भी यही हो रहा है। घोसालकर की हत्या ने महाराष्ट्र की पलकों को नम कर दिया, उन पलकों से चिंगारी भी उड़ेगी, यह गुंडाराज को पोषित करने वालों को याद रखना चाहिए!

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