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शिंदे सरकार का फरमान : फिटनेस लाओ, ऑटो चलाओ! वर्ना प्रतिदिन भरना होगा दंड

यूनियन ने जताया कड़ा विरोध, निर्णय वापस लेने की मांग
सामना संवाददाता / मुंबई
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे कभी खुद आटो चलाते थे। उसी शिंदे की सरकार ने ऑटो के लिए फरमान जारी किया है जब तक ऑटो का फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं लाओगे, तब तक ऑटो नहीं चलाने दिया जाएगा। अगर बिना फिटनेस के ऑटो चलाया गया तो प्रतिदिन पचास रुपए दंड भरना होगा। शिंदे सरकार को परिवहन विभाग ने सोमवार का उक्त फरमान जारी किया है। ऑटो के अलावा निजी टूरिस्ट बसों को भी बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के चलाते हुए पाए जाने पर प्रतिदिन पचास रुपए दंड भरना होगा। परिवहन विभाग के सूत्रों के मुताबिक, मुंबई और महानगरीय क्षेत्र (एमएमआर) में ८-१० प्रतिशत रिक्शा मालिकों के पास फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं हैं। कुछ मालिकों ने २०१६ से उनका नवीनीकरण नहीं कराया है।
यूनियन ने की दंड वापस लेने की मांग
गहन निरीक्षण के बाद फिटनेस प्रमाणपत्र प्रमाणित करते हैं कि वाहन तकनीकी रूप से सुरक्षित है और सड़क पर उपयोग करने के योग्य है। नए निर्देश से मुंबई ऑटो रिक्शा-टैक्सी यूनियन में असंतोष पैâल गया है, जिन ऑटो में २०१६ से फिटनेस संबंधी कमियां है। उन ऑटो मालिकों को क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (आरटीओ) द्वारा लागू किए जा रहे दंड को भरना होगा, जिसका यूनियन ने विरोध किया है। रिपोर्ट के अनुसार, यूनियन ने एक पत्र में कहा कि मुंबई सहित महाराष्ट्र में लगभग १५ लाख ऑटो-रिक्शा हैं। हमने फिटनेस प्रमाणपत्रों का नवीनीकरण नहीं करने पर ५० रुपए प्रति दिन के दंड को वापस लेने की मांग की हैं।
बता दें कि एमएमआर में लगभग ४-५ लाख ऑटो रिक्शा चलते हैं। यूनियन नेता शशांक राव ने कहा कि राज्य भर में लगभग १५ प्रतिशत आटो बिना फिटनेस के चलते हैं। उन्होंने कहा कि यह समस्या विशेष रूप से ठाणे और नवी मुंबई में गंभीर है, जबकि मुंबई में यह कम गंभीर है। राव ने सरकार से आग्रह करते हुए कहा कि ‘कोविड-१९ के बाद, कई ऑटो चालक आर्थिक रूप से संघर्ष कर रहे हैं, वाहन ऋण का भुगतान करने में असमर्थ हैं और कुछ ने तो गाड़ी चलाना भी बंद कर दिया है। ५० रुपए का दैनिक जुर्माना लगाना उनमें से कई के लिए बहुत कष्टकारक है।
क्या कहता है कानून?
मोटर वाहन अधिनियम की धारा ८१ के तहत, अनिवार्य अवधि फिटनेस जांच से गुजरने में विफल रहने वाले वाहनों पर प्रति दिन ५० रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता है। इस प्रावधान को अक्टूबर २०१७ में उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी लेकिन अप्रैल २०२३ में इसे बरकरार रखा गया था। एक आरटीओ अधिकारी ने कहा कि ‘बिना वैध फिटनेस प्रमाणपत्र वाले वाहन एक बड़ा खतरा पैदा करते हैं। इसलिए सभी ऑटो को फिटनेस सर्टिफिकेट अनिवार्य किया जा रहा है। इस संदर्भ में १७ मई को सभी आरटीओ कार्यालय को परिपत्र जारी किया गया है।

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