मुख्यपृष्ठनए समाचारशिवसेना की राष्ट्रपति से मांग, आरक्षण की सीमा बढ़ाएं! संसद का विशेष...

शिवसेना की राष्ट्रपति से मांग, आरक्षण की सीमा बढ़ाएं! संसद का विशेष सत्र बुलाकर मराठा और धनगर आरक्षण के लिए कानून बनाएं

सामना संवाददाता / मुंबई
शिवसेना ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मांग की है कि मराठा और धनगर आरक्षण के मुद्दे को हल करने के लिए आरक्षण की सीमा बढ़ाई जानी चाहिए। इसके साथ ही संविधान में संशोधन करना आवश्यक है। ऐसे में संसद का विशेष सत्र बुलाकर इस कानून को पारित किया जाना चाहिए।
शिवसेना नेता व सांसद संजय राऊत के नेतृत्व में शिवसेना के प्रतिनिधिमंडल ने कल राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति मुर्मू से मुलाकात की। इस प्रतिनिधिमंडल में शिवसेना नेता-सांसद अरविंद सावंत और विनायक राऊत समेत सांसद राजन विचारे, संजय जाधव, ओमराजे निंबालकर, प्रियंका चतुर्वेदी, विधान परिषद के विरोधी पक्षनेता अंबादास दानवे, शिवसेना नेता एड. अनिल परब, सुनील प्रभु, विधायक अजय चौधरी का समावेश था।
महाराष्ट्र में मराठा और धनगर आरक्षण आंदोलन तेज होने पर कुछ दिनों पहले शिवसेना की ओर से राष्ट्रपति मुर्मू को एक पत्र दिया गया था। इसमें मांग की गई थी कि आरक्षण के मुद्दे पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया जाए। इसके साथ ही यह भी अनुरोध किया गया था कि राष्ट्रपति चर्चा के लिए मुलाकात करें। इसी के तहत राष्ट्रपति ने कल सुबह शिवसेना प्रतिनिधिमंडल को राष्ट्रपति भवन बुलाया था।
जटिल हुई रोजी-रोटी की समस्या
राष्ट्रपति मुर्मू से चर्चा करते हुए शिवसेना प्रतिनिधिमंडल ने आरक्षण के मुद्दे पर महाराष्ट्र में पैदा हुई परिस्थिति के साथ ही मराठा और धनगर समाज की भावनाओं को राष्ट्रपति के सामने रखा। महाराष्ट्र में एक तरफ किसान आत्महत्या कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ युवा पीढ़ी बेरोजगारी की मार झेल रही है। महाराष्ट्र से कई उद्योगों के दूसरे राज्यों में चले जाने से बेरोजगारी और बढ़ गई है।

किसान हो या बेरोजगार हर कोई रोजी-रोटी के लिए संघर्ष कर रहा है। इसलिए जाति आधारित आरक्षण की समस्या विकराल रूप धारण कर चुकी है। इस वस्तुस्थिति को इस दौरान राष्ट्रपति को बताया गया।
सड़कों पर उतरा मराठा और धनगर समाज
महाराष्ट्र में मराठा और धनगर समुदाय आरक्षण के लिए सड़कों पर उतर गया है। पिछड़े वर्ग और वंचित समाजों के आरक्षण को कम किए बिना मराठा, धनगर समाज को आरक्षण दिया जाय, तभी सभी संतुष्ट हो सकते हैं। इसके लिए संविधान पर शोध करना जरूरी है। संविधान के अनुसार, किसी भी राज्य को ५० प्रतिशत से अधिक आरक्षण देने की अनुमति नहीं है और राज्य सरकारों को भी यह अधिकार नहीं है। यह अधिकार केवल संसद के पास है। इसलिए शिवसेना के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति से अनुरोध किया कि वे संविधान पर शोध कर संतोषजनक समाधान निकालने के लिए वेंâद्र सरकार को संसद का विशेष सत्र बुलाने का निर्देश दें। इस तरह का ज्ञापन भी राष्ट्रपति को दिया गया।

अन्य समाचार