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शिवसेना सांसद अरविंद सावंत का दूरसंचार मंत्री को खत: कभी नवरत्न थी एमटीएनएल अब भविष्य हुआ अंधकारमय

सामना संवाददाता / मुंबई
शिवसेना सांसद अरविंद सावंत ने केंद्रीय दूरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव को खत लिखकर एमटीएनएल की दुव्र्यवस्थाओं से अवगत कराते हुए इन्हें दूर करने की मांग की है। उन्होंने पत्र के जरिए कहा है कि कभी यह नवरत्न कंपनियों की सूची में शामिल थी, लेकिन आज यह अनदेखी की शिकार है। दूरसंचार मंत्री ने भारत संचार निगम लिमिटेड कंपनी के उद्धार के लिए एक लाख ६४ करोड़ का वित्तीय सहायता घोषित किया। यह सराहनीय है, लेकिन एमटीएनएल के पुनरुद्धार को लेकर एक भी आशाजनक घोषणा नहीं की गई, जो बहुत ही खेदजनक है।
सरकारी कंपनी होने के बावजूद साल २०१४ में यूपीए सरकार के कार्यकाल में एमटीएनएल कंपनी को २जी और ३जी लाइसेंस के लिए बाजार से १० हजार करोड़ रुपयों का कर्ज लेने के लिए बाध्य किया गया। उसका असर यह रहा कि तभी से यह कंपनी घाटे में जानी शुरू हो गई। वहीं इस बीच केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आई नई सरकार ने इसे फिर से पुनर्जीवित करनेवाली आशा की किरण दिखने लगी, लेकिन यह सरकार महज पिछली सरकार की खामियों को ही दिखाने में मस्त दिखी। हालांकि साल २०२० में एमटीएनएल कंपनी को पुनर्जीवित करने की कोशिश शुरू हुई। उस वक्त कर्मचारियों को वीआरएस और एमटीएनएल की संपत्तियों का मुद्रीकरण करने का पैâसला हुआ। जिसमें वीआरएस में सफलता तो मिल गई, लेकिन मुद्रीकरण में असफलता के सिवाय हाथ कुछ नहीं लगा। यदि इसमें सफलता मिलती, तो कंपनी की सेवा में सुधार होने की संभावना थी। हालांकि इस मामले में सरकार से लेकर दूरसंचार विभाग तक किसी ने भी सही तरीके से अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई।
एमटीएनएल के कार्यालयों में है दुरावस्था
शिवसेना सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि यह कभी नवरत्न कंपनी थी। नवरत्न दर्जा दिलाने के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों ने बहुत कष्ट झेले हैं। मैं भी कभी इस कंपनी का कर्मचारी था। साथ ही कंपनी के वैभव को मैं खुद अनुभव किया हूं। उन्होंने कहा है कि एमटीएनएल के दिल्ली और मुंबई स्थित कार्यालय दुरावस्था की मार झेल रहे हैं। यहां की अवस्था को देख मन व्यथित हो रहा है। आगे उन्होंने कहा कि बीएसएनएल की तरह इस पर भी ध्यान दिया जाता तो इतनी ताकतवर कंपनी कभी भी घाटे में नहीं जाती।
एमटीएनएल और बीएसएनएल के पास तकनीकी सामग्री नहीं है। इन की सामग्रियों पर सरकारी रोक है। इसमें भी तकनीकी सामग्री की खरीददारी के लिए करोड़ों रुपए की निधि केंद्र अथवा दूरसंचार विभाग मुहैया नहीं करा रहा है। इस पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार और केंद्रीय दूरसंचार विभाग द्वारा बीएसएनएल की तरह एमटीएनएल को भी भारी वित्तीय सहायता कर उसे अपने पैर पर खड़ा करें, ऐसी मांग शिवसेना सांसद अरविंद सावंत ने दूरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव से की।

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