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शिवसैनिकों की आस्था से जुड़ा है शिवतीर्थ! शिंदे गुट के खिलाफ फैला आक्रोश

सामना संवाददाता / मुंबई
शिवसेना पार्टी की स्थापना के बाद से ही हर साल शिवतीर्थ पर दशहरा सम्मेलन आयोजित होता आया है। लेकिन इस साल शिंदे गुट ने शिवसेना के दशहरा सम्मेलन को भी हाईजैक करने की साजिश रची है। इसे लेकर लोगों में तीव्र असंतोष देखा जा रहा है। जगजाहिर है कि हिंदूहृदयसम्राट शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे ने दशहरा सम्मेलन में उसी शिवतीर्थ पर पार्टी की अगली दशा और दिशा तय करने की कमान शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे को सौंपी थी। हर साल दशहरा रैली आनेवाले लाखों शिवसैनिकों की आस्था शिवतीर्थ से जुड़ी हुई है।
शिवसेना से बगावत कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भाजपा के साथ मिलकर राज्य में सरकार बनाई। सत्ता संघर्ष और बागी विधायकों की अयोग्यता का मसला सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ के पास विचाराधीन है। अब शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे के विचारों को आगे बढ़ाने का हवाला देते हुए शिवसेना के दशहरा सम्मेलन को काबिज करने की साजिश ‘महाशक्ति’ की सरपरस्ती में शिंदे गुट की ओर से रची जा रही है। दावा है कि शिंदे गुट की ओर से शिवतीर्थ पर शिवसेना का दशहरा सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। शिवसेना की ओर से मनपा प्रशासन और पुलिस से दशहरा सम्मेलन की नियमानुसार अनुमति मांगी गई है।
शिवतीर्थ पर ही होगा शिवसेना का दशहरा सम्मेलन
विधान परिषद में विपक्ष के नेता अंबादास दानवे ने कहा कि शिवसेना ने कभी अपना झंडा या अपना नेता नहीं बदला है। इस बीच कई आए और गए शिवसेना को फर्क नहीं पड़ा। शिवतीर्थ पर शिवसेना का दशहरा सम्मेलन आयोजित करने का यह ५६वां वर्ष होगा। जबसे शिवसेना पार्टी की स्थापना हुई है, शिवतीर्थ पर दशहरा सम्मेलन का आयोजन किया जाता रहा है। इस वर्ष भी शिवसेना का दशहरा सम्मेलन शिवतीर्थ पर ही होगा। ‘एक झंडा, एक नेता और एक मैदान’ हमेशा से शिवसेना का नारा रहा है।
‘वर्षों से होता रहा है शिवसेना का सम्मेलन’
शिंदे गुट द्वारा दिखाए जा रहे अड़ियल रवैए को लेकर नेता प्रतिपक्ष अजीत पवार ने भी कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि वर्षों तक महाराष्ट्र के सभी लोगों ने देखा है कि जबसे शिवसेना की स्थापना हुई है, तबसे शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे की सभाएं शिवतीर्थ पर होती रही हैं। बालासाहेब ठाकरे ने उसी शिवाजी पार्क मैदान पर कहा था कि अब से शिवसेना को उद्धव ठाकरे संभालेंगे और उनके नेतृत्व में पार्टी चलेगी। अजीत पवार ने कहा कि इन दिनों राजनीति में क्या होगा कुछ कहा नहीं जा सकता। शिंदे गुट पर तंज कसते हुए अजीत पवार ने कहा कि हम सब २० जून तक साथ थे। एक दिन उनके दिमाग में क्या आया और वे १५ विधायकों को लेकर भाजपा के साथ चले गए। अब वे क्या चाहते हैं? यह तो एकदम ‘ओके’ हो गया है।
‘सामंजस्य की भावना अपनाएं शिंदे’
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार ने शिंदे गुट की इस कोशिश पर आपत्ति जताई है। उन्होंने मुख्यमंत्री शिंदे को सलाह दी है कि दशहरा सम्मेलन आयोजित करने का सभी को अधिकार है। सभी अनुमति मांग सकते हैं लेकिन मुख्यमंत्री शिंदे को संघर्ष की भूमिका को दरकिनार कर सामंजस्य की भावना अपनानी चाहिए।

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