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लाठी चलाएं, गोली चलाएं हम नहीं हटेंगे पीछे

धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई  

तीन जनवरी से आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन धरना  

१० हजार से अधिक आंगनवाड़ी सेविकाएं होंगी इकट्ठा

महाराष्ट्र में आंगनवाड़ी सेविकाएं और सहायिकाएं अपनी विभिन्न मांगों को लेकर पिछले एक महीने से हड़ताल पर हैं। इसके बावजूद उनकी मांगों पर ध्यान देने की बजाय घाती सरकार नजरअंदाज कर रही है। इससे आहत होकर अब आंगनवाड़ी सेविकाएं और सहायिकाएं आर-पार के मूड में हैं। उन्होंने पैâसला किया है कि जब तक मुख्यमंत्री आकर उनसे बात नहीं करते हैं और हमारी मांगों पर संज्ञान नहीं लेते हैं, तब तक हम हड़ताल वापस नहीं लेंगे। इस बीच हम पर सरकार चाहे गोलियां चलाए अथवा लाठियां भांजे, फिर भी पीछे नहीं हटेंगे। इस हड़ताल को और विकराल करने के लिए १० हजार से अधिक आंगनवाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं ने तीन जनवरी से आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन धरना देने जा रही हैं। यह जानकारी महाराष्ट्र राज्य आंगनवाड़ी कर्मचारी कृति समिति के महासचिव बृजपाल सिंह ने दी है।
उल्लेखनीय है कि आंगनवाड़ी सेविकाएं और सहायिकाएं चार दिसंबर से हड़ताल पर हैं। इसके चलते तीन से छह साल तक के बच्चों को भोजन और शिक्षा मिलने में दिक्कत आ रही है। इससे कुछ हद तक राहत पाने के लिए बीच में जिप के शिक्षकों और पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों से आंगनवाड़ी केंद्रों पर ध्यान देने की अपील की गई थी। दूसरी तरफ एकीकृत बाल विकास योजना आयुक्त रूबल अग्रवाल ने सभी आंगनवाड़ी केंद्रों को अपने अधिकार में लेने का सर्वुâलर जारी कर दिया है। इसके तहत आशा सेविका, पुलिस पाटील, मध्याह्न भोजन कर्मचारियों को शिक्षा और भोजन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। हालांकि, आंगनवाड़ी कर्मचारियों ने केंद्रों को सौंपने पर विरोध जताया है। वहीं इस हड़ताल से ग्रामीण, आदिवासी और शहरी क्षेत्रों में लाभार्थियों को योजना का लाभ मिलना बंद हो गया। २८ दिन बाद भी घाती सरकार ने आंगनवाड़ी सेविकाओं की समस्याओं का समाधान करने के बजाय दमन शुरू कर दिया है। संगठन के महासचिव बृजपाल सिंह ने बताया कि ज्ञानज्योती सावित्रीबाई पुâले की जयंती पर हजारों आंगनवाड़ी सेविकाएं आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन करेंगी।

प्रदेश में हैं दो लाख आंगनवाड़ी सेविकाएं

महिला एवं बाल विकास विभाग की एकीकृत बाल विकास सेवा योजना के तहत लगभग १ लाख आंगनवाड़ी केंद्रों में दो लाख आंगनवाड़ी सेविकाएं काम कर रही हैं। इनमें से लगभग ९७ परियोजनाएं आदिवासी क्षेत्रों में कार्यरत हैं। आंगनवाड़ी सेविकाओं की स्थिति वैधानिक है और उन्हें संविधान के अनुच्छेद ४७ में निहित कर्तव्यों को पूरा करने के लिए नियुक्त किया जाता है।

घाती सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का नहीं किया पालन

वर्तमान में आंगनवाड़ी सेविकाओं को १०,००० रुपए और सहायिकाओं को ५,५०० रुपए मिलते हैं। २५ अप्रैल २०२२ को सुप्रीम कोर्ट ने आंगनवाड़ी सेविकाओं को ग्रेच्युटी के लिए पात्र ठहराया, लेकिन राज्य सरकार ने इसे लागू नहीं किया। इसके चलते राज्य की आंगनवाड़ी सेविकाएं अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चली गई हैं।

ये हैं मांगें

आंगनवाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं की मांग है कि उन्हें ग्रेच्युटी दी जाए। सरकारी कर्मचारी का दर्जा मिले। पारिश्रमिक में पर्याप्त बढ़ोतरी की जाए। पेंशन योजना लागू की जाए और तुरंत मोबाइल फोन दिया जाए।

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