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दवाइयों की किल्लत, सर्जरी के लिए वेटिंग, व्हीलचेयर की भी कमी … ‘बीमार केईएम’ को शिवसेना का ‘डोज’

प्रचंड मोर्चे से काम पर लगा प्रशासन दो महीने में करेगा कायाकल्प
सामना संवाददाता / मुंबई
मनपा के परेल स्थित ‘केईएम’ अस्पताल में भारी असुविधाओं के चलते मरीजों का हाल बेहाल हो रहा है। गरीब मरीजों को दवाइयां मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ रही हैं। इस कारण उन्हें वित्तीय संकट से जूझना पड़ रहा है। स्ट्रेचर और व्हीलचेयर की बहुत ज्यादा कमी है। इसके अलावा सर्जरी कराने के लिए मरीजों को करीब दो महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं, ‘सीटी स्वैâन’, ‘एमआरआई’, सोनोग्राफी जैसी मशीनों की कमी से मरीज परेशान और हताश दिख रहे हैं। इन सभी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए शिवसेना ने (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) अस्पताल पर कल जोरदार मोर्चा निकलते हुए यहां व्याप्त समस्याओं को लेकर जवाब मांगा। इसके बाद अतिरिक्त आयुक्त के साथ बैठक हुई। इस दौरान मनपा प्रशासन ने आश्वासन दिया कि दो महीने में सभी असुविधाओं को दूर करके अस्पताल का कायापलट किया जाएगा।
ज्ञात हो कि मनपा द्वारा संचालित अस्पताल में असुविधाओं को लेकर शिवसेना विधायक अजय चौधरी के साथ एक प्रतिनिधिमंडल की ४ जुलाई को ‘केईएम’ की डीन के साथ बैठक हुई थी। इसके बाद फिर से ७ अगस्त को भी अतिरिक्त आयुक्त डॉ. सुधाकर शिंदे के साथ बैठक हुई थी। इस दौरान आठ दिनों में सभी असुविधाओं को दूर किए जाने का आश्वासन दिया गया था। हालांकि, इस बार भी प्रतिनिधिमंडल को केवल आश्वासनों का पिटारा दिया गया, जबकि प्रत्यक्ष तौर पर अभी तक इस पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं हुई है। इसके चलते अस्पताल में आनेवाले गरीब मरीजों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन की इस मनमानी का विरोध करते हुए कल ‘केईएम’ अस्पताल पर जोरदार मोर्चा निकाला गया। शिवसेना नेता व सांसद अरविंद सावंत समेत सैकड़ों की संख्या में शिवसैनिक और पदाधिकारी अस्पताल पर पहुंच गए। इस दौरान विधायक अजय चौधरी, पूर्व विधायक दगडू (दादा) सकपाल, पूर्व नगरसेवक आशीष चेंबूरकर, पूर्व नगरसेविका श्रद्धा जाधव, पूर्व नगरसेवक अनिल कोकिल, सचिन पड़वल, दत्ता पोंगडे, पूर्व नगरसेविका सिंधू मसुरकर, उर्मिला पांचाल, उपविभागप्रमुख गजानन चव्हाण, पराग चव्हाण आदि गणमान्य उपस्थित थे।
रात में होगी प्लानिंग सर्जरी
अस्पताल में इमरजेंसी और प्लानिंग सर्जरी होते हैं। इसके तहत सालाना करीब ३,००० सर्जरी की जाती है। यह संख्या अब दोगुना की जाएगी। प्लानिंग सर्जरियां अब रात में भी की जाएंगी। इसके लिए आवश्यक एनेस्थीसिया विशेषज्ञ की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
‘केईएम’ की कमी
गरीब मरीजों को जरूरी दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ती हैं। एमआरआई, सीटी, स्वैâन सोनोग्राफी मशीन का टेंडर न निकलने से दिक्कत हो रही है। सुरक्षा कर्मचारी की कमी के चलते कार्यरत कर्मचारियों पर काम का तनाव रहता है। स्ट्रेचर और व्हीलचेयर की संख्या जरूर से बहुत कम है। एनेस्थीसिया विशेषज्ञों की भी कमी है। ब्लड टेस्ट, सोनोग्राफी के लिए मरीज को ८ घंटे तक रखना पड़ता है।

दवाइयों की दोगुनी खरीदी, मशीनों को करेंगे एयरलिफ्ट
मनपा प्रशासन की तरफ से आश्वासन दिया गया कि मरीजों की समस्याओं को दूर करने के लिए सीटीस्वैâन, एमआरआई और सोनोग्राफी जैसी मशीनें जहाजों से नहीं, बल्कि सीधे एयरलिफ्ट करके लाई जाएंगी। इसके साथ ही डीन अपने अधिकार का इस्तेमाल करके २० लाख तक दवाइयों खरीद सकती हैं। दवाइयां की खरीदी के लिए निधि ४०० करोड़ से बढ़ाकर दोगुना की जाएगी। शेड्यूल्ड की ३०० दवाइयां की संख्या को भी बढ़ाकर जितनी की जरूरत होगी, उतनी की जाएगी। इसके लिए नजदीकी मेडिकल बंद किए जाएंगे।

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