" /> शो मस्ट गो ऑन!…कोविड ने छीन लिया पद्मश्री डॉ. के.के. अग्रवाल को

शो मस्ट गो ऑन!…कोविड ने छीन लिया पद्मश्री डॉ. के.के. अग्रवाल को

वे पिछले काफी समय से अपने वीडियो के जरिए लोगों को कोविड के बारे में जागरूक करते थे। उन्हें कई तरह की सलाह दिया करते थे। कोविड से संक्रमित होने के बाद भी ऑक्सीजन की नली लगी होने के बावजूद भी उन्होंने खुद के संक्रमित होने की सूचना दी थी। साथ ही ये भी कहा था कि मैं रहूं या न रहूं, ‘द शो मस्ट गो ऑन!’ मशहूर डॉक्‍टर के.के. अग्रवाल का कोविड से निधन हो गया। लोगों को जो बात हैरान कर रही है, वह यह कि उन्‍हें वैक्‍सीन की दोनों डोज लग चुकी थीं।

मेदांता अस्‍पताल के डॉक्‍टर अरविंद कुमार ने कहा कि कई वजहें हो सकती है, जिनसे पूरी तरह टीकाकरण के बाद भी ऐसा हो सकता है। उन्‍होंने एक न्‍यूज चैनल से बातचीत में कहा कि इस पर और रिसर्च की जरूरत है। हालांकि, उन्‍होंने तीन ऐसी संभावनाएं जरूर गिनार्इं जो दोनों डोज लगवा चुके लोगों में संक्रमण / मौत की वजह हो सकती हैं। डॉ. कुमार ने कहा कि हाल-फिलहाल में वैक्‍सीन लगवा चुके लोगों की जो मौतें हुई हैं, उनकी पिछले साल से तुलना करें तो एक बात तो साफ है कि इस बार मृतकों की संख्‍या कम है। हमने फेज-३ ट्रायल्‍स में डेथ रेट जीरो फीसदी माना था, मगर जमीन पर हालात अलग नजर आ रहे हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं। डॉ. कुमार ने इशारा क‍िया कि ऐसा हो सकता है कि दोनों डोज लगने के बाद जिनकी मौत हुई, उनमें पर्याप्‍त ऐंटीबॉडीज न बनीं हो या फिर इन स्‍ट्रेन्‍स के खिलाफ वैक्‍सीन असरदार न हो। मेदांता के एक्‍सपर्ट ने जनता से अपील करते हुए कहा कि इसका मतलब यह नहीं कि वैक्‍सीन बेकार है। १०० फीसदी प्रोटेक्‍शन नहीं है, लेकिन फिर भी मौत, गंभीर बीमारी से बचाने में काफी कारगर है। आज की तारीख में यह हमारा सबसे मजबूत हथियार है।
आंध्र प्रदेश में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्‍यक्ष डॉ. नरेला सुब्रमण्‍यम ने कहा कि ‘डब्ल्यूएचओ’ ने बार-बार कहा है कि वैक्‍सीन आपको कोविड पॉजिटिव नहीं बना सकती। उन्‍होंने यह भी कहा कि अगर कोई व्‍यक्ति कोविड बीमारी के इनक्‍यूबेशन पीरियड में वैक्‍सीन लेता है तो टेस्‍ट पॉजिटिव आ सकता है। यह भी हो सकता है कि वैक्‍सीनेशन सेंटर से आपको इन्‍फेक्‍शन हो या टीका लगने के ठीक बाद, उस स्थिति में भी पॉजिटिव रिजल्‍ट आ सकता है। इससे पहले डॉक्टर कुमार ने कहा कि जब पिछले साल कोरोना वैक्सीन के फेज तीन के ट्रायल हुए थे, तो उसमें यह देखा गया था कि वैक्सीन लगाने के बाद भी २५-३० पर्सेंट लोग संक्रमित हो गए थे। हालांकि, उस दौरान इस ट्रायल में सभी वॉलंटियर्स में इन्फेक्शन माइल्ड वेरायटी का था। किसी को भी अस्पताल में भर्ती होने या फिर वेंटिलेटर की जरूरत नहीं पड़ी थी। उस ग्रुप में किसी की मौत नहीं हुई थी।

उन्‍होंने कहा कि आज से करीब एक-डेढ़ महीने पहले तक, जब देश में कोरोना की दूसरी लहर नहीं आई थी, तब तक भी यही माना जा रहा था कि वैक्सीन के दोनों डोज लगवाने के बाद वेंटिलेटर पर जाने, आईसीयू में भर्ती होने या फिर जान जाने की नौबत नहीं आती है। लेकिन यह धारणा अब बदल गई है। पिछले कुछ हफ्तों में देखा जा रहा है कि कई डॉक्टर, पत्रकार या फिर प्रâंट लाइन वर्कर्स जो वैक्सिनेटेड थे, उनकी स्थिति गंभीर हुई या फिर जान चली गई। कोविड संक्रमण की दूसरी लहर में २५० से ज्‍यादा डॉक्‍टर्स की मौत हो चुकी है।