मुख्यपृष्ठखबरेंमुख्यमंत्री का हाथ दिखाना अपशकुन! ... अंक ज्योतिष का नहीं लगा आंकड़ा

मुख्यमंत्री का हाथ दिखाना अपशकुन! … अंक ज्योतिष का नहीं लगा आंकड़ा

•  विरोधियों की टिप्पणी
सामना संवाददाता / मुंबई
मंत्रालय में निर्धारित बैठकें रद्द कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे बुधवार को शिरडी दर्शन के लिए गए। वहां से अचानक अपना नियोजित कार्यक्रम उन्होंने बदल दिया और अपना भविष्य जानने के लिए सिन्नर के ईशान्येश्वर मंदिर गए और अपना भविष्य जाना। इससे एकनाथ शिंदे की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं और मुख्यमंत्री ने हाथ दिखाकर अपशकुन ले लिया है। अंधविश्वास को बढ़ावा देने के रूप में मुख्यमंत्री के इस कदम की सभी ओर आलोचना हो रही है।

निंदनीय और अत्यंत पीड़ादायक -अंनिस
मुख्यमंत्री का यह कृत्य निंदनीय और अत्यंत पीड़ादायक है। प्रगतिशील महाराष्ट्र में संवैधानिक पद पर आसीन एकनाथ शिंदे का यह व्यवहार गैरजिम्मेदाराना है। अंधविश्वास निर्मूलन समिति इसका तीव्र निषेध करती है, ऐसा अंनिस के राज्य कार्यवाहक कृष्णा चांदगुडे ने कहा।

`यह आत्मविश्वास डगमगाने का लक्षण’-शरद पवार
रोज का काम छोड़कर भगवान के दर्शन करना और ज्योतिषी को हाथ दिखाना यह आत्मविश्वास डगमगाने के लक्षण हैं। जिसका आत्मविश्वास डगमगाता है, वही लोग ऐसी चीजों पर ध्यान देते हैं। एकनाथ शिंदे की इस संदर्भ में ऐसी परिस्थिति है क्या? ऐसी शंका मुझे होती है। ऐसा राकांपा अध्यक्ष शरद पवार ने कहा। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे यह भगवान के दर्शन या किसी को हाथ दिखाने के लिए जाते हैं, इस बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता। मेरा इस पर विश्वास नहीं। मैं किसी को हाथ दिखाने नहीं जाता लेकिन हाल के दिनों में हम नई चीजें देख रहे हैं। ऐसी चीजें आज तक महाराष्ट्र में नहीं दिखी थीं, ऐसा तंज शरद पवार ने मुख्यमंत्री शिंदे पर कसा।

तंत्र-मंत्र में फंसी सरकार- संजय राऊत
सरकार के प्रमुख देव, धर्मों, तंत्र-मंत्रों और ज्योतिष में फंसे हैं इसलिए राज्य संकट का सामना कर रहा है। यह कमजोर सरकार और दुर्बल होने के कारण कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने महाराष्ट्र के ढांचे पर चोट पहुंचाई है। ऐसा तंज शिवसेना नेता व सांसद संजय राऊत ने मुख्यमंत्री पर कसा।

हमारा श्रद्धा पर विश्वास -अजीत पवार
तकनीकी के युग में कई बदलाव हो रहे हैं। ऐसे में महाराष्ट्र के प्रगतिशील मुख्यमंत्री विज्ञान की बातों पर ध्यान दिए बिना ज्योतिष की ओर देखते हैं। इसके बारे में क्या कहना है, यह सुनकर हम निराश हो गए। हमारा आस्था पर विश्वास है, अंधश्रद्धा पर नहीं। ऐसा कहते हुए प्रतिपक्ष के नेता अजीत पवार ने एकनाथ शिंदे की कान खिंचाई की।

आस्था होनी चाहिए, अंधश्रद्धा नहीं-सुप्रिया सुले
महत्वपूर्ण पदों पर बैठे लोगों को श्रद्धा रखनी चाहिए। आस्था होनी चाहिए, परंतु अंधश्रद्धा नहीं। नरेंद्र दाभोलकर ने अंधश्रद्धा के विरोध में बड़े काम किए हैं। महाराष्ट्र में अंधश्रद्धा के संदर्भ में अलग मत है। यह हमें ध्यान रखना चाहिए, ऐसा राकांपा सांसद सुप्रिया सुले ने कहा।

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