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श्री-वास्तव उ-वाच : पत्थर के आंसू

अमिताभ श्रीवास्तव

पत्थर के आंसू एक कथन है कि जो निर्मम हो, उसके ऐसे आंसू निकलते हैं, पर यहां तो सचमुच पत्थर के आंसू की बात है। दरअसल, एक १५ वर्षीया बालिका के स्वजनों का दावा है कि बच्ची के आंख से आंसू के साथ अलग-अलग रंग के पत्थर जैसे कंकर निकल रहे हैं। हालांकि, नेत्र विशेषज्ञ इस पर यकीन नहीं कर रहे हैं। जिला अस्पताल अनूपपुर में ऐसा ही हैरत करनेवाला मामला सामने आया है। जिले के कोतमा तहसील अंतर्गत ग्राम निमहा निवासी उत्तम सिंह की बेटी सरस्वती १५ वर्ष के साथ इस तरह का यह मामला होना बताया गया है। जानकारी के अनुसार, इस बालिका को पिछले दो सप्ताह से आंख आने की समस्या बनी हुई है। बालिका के पिता के अनुसार, ५ दिनों से आंख के कीचर के साथ अंगूठी में पहनने वाले पत्थर के समान पत्थर जैसे कंकर निकलते हैं। जिला अस्पताल के नेत्र विशेषज्ञ डॉक्टर जनक सारीवान द्वारा बच्ची का उपचार किया जा रहा है, इनका कहना है कि ४५ मिनट तक जांच के दौरान पत्थर निकालने जैसी कोई अनोखी बात नजर नहीं आई है। जांच के बाद ऐसे दावे से और स्पष्ट हो पाएगा, जो वीडियो सामने आ रहा है, उसे पर तात्कालिक रूप से यकीन नहीं किया जा सकता।

२४ घंटों में बना मंदिर
हिंदुस्थान अद्भुत देश है। एक से बढ़कर एक रहस्य हैं यहां। अब देखिए न, एक विशाल शिव मंदिर जो केवल २४ घंटों में निर्मित हुआ है। जी हां, अचरज है किंतु सत्य है। बाबा क्षितेश्वर नाथ का मंदिर। जो बलिया के छितौनी गांव में है। सैकड़ों वर्ष पुराना है। इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग पृथ्वी के अंदर से खुद प्रकट हुआ है। सबसे खास बात यह है कि इस मंदिर का निर्माण २४ घंटे के अंदर हुआ है। सैकड़ों साल पहले जिले के छितौनी से कुछ दूरी पर स्थित बहुवारा गांव के एक तपस्वी थे, जो हमेशा ब्रह्मपुर (बिहार) में ब्रह्मेश्वर नाथ महादेव के दर्शन हेतु गंगा पार जाते थे। तपस्वी को एक दिन सपने में भोलेनाथ ने छितौनी में होने का संकेत दिया। कहा कि इतनी दूर मत जाओ मैं यही हूं। खुदाई के उपरांत छितौनी में ही इस शिवलिंग का विग्रह प्राप्त हुआ। क्षितेश्वर नाम वैâसे पड़ा? क्षिति यानी पृथ्वी और ईश्वर। यानी भगवान। यह शिवलिंग जमीन के अंदर से निकला, इसलिए इनका नाम क्षितेश्वर नाथ महादेव पड़ा। जब मंदिर का निर्माण होने लगा तो मंदिर के निर्माण के लिए जो दीवाल जोड़ी जाती थी। वह जोड़ने के बाद गिर जाती थी। अंतत: लोग परेशान होकर के काशी के विद्वानों के पास गए तो उन्होंने बताया कि अगर २४ घंटे के अंदर इस मंदिर का निर्माण हो जाता है तो नहीं गिरेगा। उन विद्वानों के मतानुसार, इस मंदिर का निर्माण २४ घंटे के अंदर हुआ और काम सफल हो गया।
ज्वालामुखी वाला शुक्र
ब्रह्मांड में या ज्योतिष के अनुसार, शुक्र ग्रह को विशेष दर्जा प्राप्त है। अब इस ग्रह का शोध किया जा रहा है। यह एक ज्वालामुखी वाला ग्रह है। जी हां, काशी हिंदू विश्वविद्यालय में ब्रह्मांड नापने की कोशिशें पहले से ही आरंभ हो गई हैं। विज्ञानियों की टीम शुक्र अभियान की नींव तैयार कर रही है। विज्ञानी सौरमंडल के इस सबसे चमकीले ग्रह की सतह का अध्ययन कर उसकी मैपिंग करने में जुटे हैं। यह टीम मिशन वीनस की तैयारी में लगे अंतरराष्ट्रीय शुक्र शोध समूह के हिस्से के रूप में कार्य कर रही है। इसमें अमेरिका, कनाडा, मोरक्को, रूस और हिंदुस्थान शामिल है। इसका नेतृत्व रूस के टाम्स्क स्टेट यूनिवर्सिटी के डॉ. रिचर्ड अर्न्स्ट और सह-नेतृत्व कार्लटन यूनिवर्सिटी, कनाडा के डॉ. हाफिदा एल बिलाली तथा ब्राउन यूनिवर्सिटी, अमेरिका के डॉ. जेम्स हेड कर रहे हैं। भारत में यह जिम्मेदारी केवल बीएचयू को मिली है। बताया गया कि ये लोग शुक्र के धरातल के जिस हिस्से का अध्ययन कर रहे हैं, वहां लगभग ज्वालामुखी के १५ हॉटस्पाट चिह्नित किए गए हैं, जहां काफी संख्या में ज्वालामुखी केंद्र हैं। सभी केंद्रों का तुलनात्मक अध्ययन किया जा रहा है। फिलहाल, वहां कोई सक्रिय ज्वालामुखी नहीं मिला है लेकिन पूर्व में सक्रियता के कारण लावा बहने से धरातल काफी ऊबड़-खाबड़ है।

भगवान का ब्यूटी पार्लर
ब्यूटी पार्लर तो महिलाओं के लिए होता है, मगर क्या भगवान भी जाते हैं ब्यूटी पार्लर? अजीब लगेगा यह मगर सच है। भगवान का भी ब्यूटी पार्लर है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जनपद मुजफ्फरनगर में एकमात्र पार्लर ऐसा है, जिसमें किसी महिला या पुरुष का नहीं बल्कि भगवान जी का शृंगार किया जाता है। यह अनोखा पार्लर मुजफ्फरनगर की गांधी कॉलोनी में श्रीश्री गोलोक धाम के पास कई वर्षों से चलाया जा रहा है, जिसमें उनके द्वारा सिर्फ सभी भगवानों का शृंगार किया जाता है। पार्लर की मालकिन शेफाली वर्मा ने बताया कि करीब ७ सालों से मेरे द्वारा यह है पार्लर चलाया जा रहा है, जिसमें सिर्फ में सभी देवी-देवताओं की मूर्तियों को सजाती हूं। शेफाली वर्मा का कहना है कि मेरे इस पार्लर में उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड हरियाणा पंजाब दिल्ली राजस्थान आदि जगहों से भी लड्डू गोपाल वह अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां सजने के लिए आती हैं, जिन्हें मेरे द्वारा सजाया जाता है। शेफाली वर्मा का कहना है कि एक मूर्ति को सजाने के लिए शिफ्ट में काम करना होता है, जिसमें सुबह, दोपहर व शाम की अलग-अलग शिफ्ट होती है। एक मूर्ति को सजाने में करीब दो दिन का समय लगता है।

लेखक ३ दशकों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं व सम सामयिक विषयों के टिप्पणीकर्ता हैं। धारावाहिक तथा डॉक्यूमेंट्री लेखन के साथ इनकी तमाम ऑडियो बुक्स भी रिलीज हो चुकी हैं।

 

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