मुख्यपृष्ठस्तंभश्री-वास्तव उ-वाच : ताले तोड़ते थे, अब ताले बनाएंगे

श्री-वास्तव उ-वाच : ताले तोड़ते थे, अब ताले बनाएंगे

अमिताभ श्रीवास्तव

जो कभी ताले तोड़कर डकैती, चोरी किया करते थे, वे अब ताले बनाएंगे। इतने मजबूत कि टूटे ही नहीं। ये ताले देशभर में बेचे भी जाएंगे। है न दिलचस्प मामला। दरअसल, बात अलीगढ़ की है। अलीगढ़ के ताले वैसे भी मशहूर हैं। अब इसकी शुरुआत अलीगढ़ जिला कारागार से की गई है, यानी जेल में ताला बनाने की फैक्ट्री लगा दी गई है। जेल में बंद ५० बंदी ताला बना रहे हैं। इसकी शुरुआत जिलाधिकारी और जिला जज ने की है। अब जेल में बंद कैदी ताला बनाकर पैसे कमाने के बाद घर भेजेंगे, जेल के बने हुए ताले अब पूरे देश में बेचे जाएंगे, कैदियों में बेहद खुशी का माहौल है। ट्रेनिंग के बाद ५० कैदियों को ताला बनाने के कार्य में लगाया गया है। इनमें १८ कैदी ऐसे हैं, जो पूर्व से ताले बनाने के अच्छे जानकार हैं। कैदियों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है और पैसा कमाने का आधार मिला है। कैदियों को ऐसा कार्य करने को मिला, जो वे पहले से सीखे हुए हैं। अब वे लोग कुछ पैसे कमाकर अपने परिवार को भेजेंगे। है न एक सही फैसला और दिलचस्प भी।

पैसा बोलता है पर धरा भी जाते हैं
पैसों का लालच हर वो काम करा देता है, जो अनैतिक है। इस एक विशेष लोभ से बचने की हिदायतें सभी धर्म में दी जाती हैं, मगर क्या कोई इसे मानता या अपनाता है? शायद नहीं। तभी तो ऐसी हरकतें भी सामने आ जाती हैं, जो ताज्जुब की जाती है। अब देखिए, यहां मामला ऐसा है कि परीक्षार्थी की जगह टीचर ही परीक्षा देने बैठ गया। वो भी पैसों के लालच में। जी हां, राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित की जाने वाली स्कूल व्याख्याता भर्ती में एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। यहां दो अभ्यार्थियों ने अपनी जगह सरकारी टीचर को बैठाकर आरपीएससी की परीक्षा दी है। पूरा मामला जोधपुर के दो केंद्रों का है, जिसका खुलासा १ साल बाद जांच में हुआ है। १ साल पहले ली गई स्कूल लेक्चरर की राजनीति विज्ञान और कृषि विभाग की परीक्षा देने के लिए दोनों अभ्यार्थियों ने शिक्षक को १२ लाख ५० हजार रुपए दिए थे। लेकिन काउंसलिंग के दौरान दस्तावेज जांच में अलग-अलग फोटो मिलने के कारण वे फंस गए, जिसके बाद फर्जी अभ्यर्थी बैठाने का मामला दर्ज कराया गया। अजमेर के सिविल लाइन थाना पुलिस ने आरोपी लाखा राम और दिनेश को गिरफ्तार कर लिया है। है न अजीब बात।

दौलत दो, शिक्षा लो
हर एक को शिक्षा। यह सरकार का संकल्प है इसीलिए गांव-गांव, बस्ती-बस्ती में स्कूलों के निर्माण और शिक्षकों की भर्तियों पर जोर दिया जाता है। एक भी बच्चा शिक्षा से वंचित न हो रहे, इसके लिए जतन किए जाते हैं। यह तो हुई एक बात, मगर दूसरी बड़ी सच्चाई है कि हिंदुस्थान में शिक्षा महंगी भी है। इसे एक उद्योग की तरह भी देखा जाने लगा है। यह विडंबना है कि मध्यम और गरीब वर्ग के बच्चों के लिए बड़े स्कूलों में एंट्री दुर्लभ है। एक से बढ़कर एक महंगे स्कूल हमारे देश में हैं और इन सबमें एक ऐसा स्कूल भी है, जिसकी फीस सुनकर ही होश उड़ जाएंगे। जानकारियों में जिस स्कूल की चर्चा है, वह है सुंदर प्रकृति के बीच बसे शहर देहरादून में। इस स्कूल का नाम द दून स्कूल है। द दून स्कूल देहरादून की गिनती देश के सबसे महंगे और बेहतरीन संस्थानों में होती है। द दून स्कूल की वार्षिक फीस की बात करें तो भारतीय रुपए में ये १० लाख रुपए से लेकर ११ लाख रुपए है, जबकि एक आम आदमी की सालाना कमाई इतनी नहीं होती है। इस स्कूल में अधिकतर बड़े-बड़े बिजनेसमैन और सेलिब्रिटीज के बच्चे ही पढ़ते हैं। ये स्कूल देहरादून के माल रोड में स्थित है। अब आप अंदाजा लगा सकते हैं कि हमारे देश में किन बच्चों की हैसियत है कि वो यहां से शिक्षा ग्रहण कर सकते हैं। आम लोगोें के लिए तो यह सपना ही होगा।

मारा गया राक्षस
ये किस राक्षस की बात है? एक ऐसे राक्षस की जो जानवरों का खून चूसता था। जी हां, जानवरों का खून चूसकर मारने वाले एक ‘राक्षस’, जिसे ‘चुपकाबरा’ के नाम से जाना जाता है, शिकारियों ने मार गिराया है। जब इस खूंखार प्राणी के मृत शरीर को करीब से देखा गया तो उसके हाथ ‘इंसानों जैसे’ थे, जिन्हें देखकर वे हैरान रह गए। कथित तौर पर इस ‘चुपकाबरा’ ने कई मवेशियों का खून चूसकर उनको मार डाला था। किसानों के बीच इसको लेकर भय का माहौल बना हुआ था। मिली रिपोर्ट के अनुसार, राक्षस जैसा प्राणी, जिसे ‘बकरी चूसने वाला’ के नाम से भी जाना जाता है, लेकिन वास्तव में इसके होने के ठोस सबूत नहीं मिलते हैं। लोगों ने अब दावा किया है कि उन्होंने ब्राजील के साओ पाउलो के पश्चिम में गुआ लोपेज दा लागुना के जंगल में एक ‘चुपकाबरा’ को गोली मारकर मार गिराया है। शिकारियों ने इस घटना का एक चौंकाने वाला वीडियो भी ऑनलाइन शेयर किया है, जिसमें ‘चुपकाबरा’ को मरा हुआ देखा जा सकता है। देखने में ‘चुपकाबरा’ बहुत ही भयावह लगता है। उसके हाथ ‘इंसानों जैसे’ थे और साथ ही उसके दांत भी बहुत तेज थे। उसका शरीर लगभग एक बड़े बंदर के आकार का था।

लेखक ३ दशकों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं व सम सामयिक विषयों के टिप्पणीकर्ता हैं। धारावाहिक तथा डॉक्यूमेंट्री लेखन के साथ इनकी तमाम ऑडियो बुक्स भी रिलीज हो चुकी हैं।

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