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सियासतनामा: उल्टा पड़ा प्लान!, गठबंधन की उठापटक, राजनीति के जादूगर

सैयद सलमान मुंबई

उल्टा पड़ा प्लान!

पहले से यह तय था कि टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा का निष्कासन होकर रहेगा। आखिर मधुमक्खी के छत्ते में हाथ डालने का अंजाम भुगतना ही था। पैसे लेकर संसद में सवाल पूछने के मामले में महुआ मोइत्रा को लोकसभा की सदस्यता से निष्कासित कर दिया गया है, लेकिन महुआ मोइत्रा के तेवर अभी भी नर्म नहीं पड़े हैं। वे आगे भी चुनाव लड़कर वर्तमान केंद्र सरकार के खिलाफ अपना संघर्ष जारी रखना चाहती हैं। महुआ मोइत्रा अपने खिलाफ लगे आरोपों से लगातार इनकार करती आई हैं। उनकी नेता और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी उनके साथ खड़ी हैं। उनका मानना है कि महुआ मोइत्रा को संसद में अपना रुख स्पष्ट करने की अनुमति नहीं दी गई, जो सरासर उनके साथ अन्याय है। ममता के अलावा कांग्रेस भी महुआ के साथ है। माना जा रहा है कि महुआ के बहाने कांग्रेस और टीएमसी की खटास भी कम होगी। इस बहाने महुआ को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिल रही है। महुआ मोइत्रा को घेरने का भाजपा का प्लान उल्टा पड़ता दिखाई दे रहा है।

गठबंधन की उठापटक

हालिया विधानसभा चुनाव नतीजों में भाजपा ने पांच में से तीन राज्यों में जीत हासिल की है। नतीजे कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के अन्य दलों के लिए उत्साहजनक नहीं कहे जा सकते हैं। २०२४ के चुनावी समर में जाने से कुछ ही समय पहले भाजपा को सत्ता से बेदखल करने की उम्मीद रखने वाला ‘इंडिया’ गठबंधन अब नए सिरे से तैयारी कर रहा है। भाजपा गठबंधन में स्वाभाविक उत्साह है। यह तो निश्चित हो गया है कि अगले लोकसभा चुनाव में क्षेत्रीय दलों की अहम भूमिका होगी। इंडिया गठबंधन और एनडीए का जोर अब उन दलों को अपने साथ लाने का है, जो किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं। क्षेत्रीय दलों के महत्व को देखते हुए अखिलेश यादव और ममता बनर्जी जैसे नेताओं ने अभी से यह मांग रख दी है कि जो दल जिस राज्य में मजबूत है, उस राज्य की कमान उसी दल को मिले। जबकि, एनडीए अपने पुराने साथी दलों को अपने साथ लाने की फिराक में है। दरअसल, पांच राज्यों के चुनावी नतीजों ने स्थितियों में काफी उलटफेर कर दिया है और स्थितियों को स्पष्ट होने में समय लगेगा।

राजनीति के जादूगर

राजस्थान में कांग्रेस की हार के बाद पार्टी के अंदर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। अशोक गहलोत के ओएसडी लोकेश शर्मा ने खुद अपने मुख्यमंत्री पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। लोग यह अंदाजा लगा रहे हैं के लोकेश शर्मा शायद भाजपा का दामन थाम सकते हैं। `जहां पुराने पत्ते नहीं झड़ते, वहां वसंत नहीं आता’ जैसे उनके जुमले गहलोत को निशाना बनाने के लिए हैं। लोकेश शर्मा को लगता है कि मुख्यमंत्री के चारों ओर तीन-चार लोगों ने घेरा बनाए रखा था। लोकेश शर्मा कहते हैं कि ओएसडी होते हुए वे खुद मुख्यमंत्री से मिल ही नहीं पाते थे। लोकेश शर्मा का आरोप है कि उनके समक्ष सरकार की ओर से विधायकों की ट्रैकिंग और मॉनिटरिंग की कई बार बात कही गई। उनकी लोकेशन ट्रैक की जाती थी और यह भी ध्यान रखा जाता था कि कौन किससे मिल रहा है और क्या चर्चा हो रही है। एक हार ने गहलोत को कठघरे में खड़ा कर दिया है। ऐसी स्थिति क्यों बनी इस पर सिर्फ राजनीति के जादूगर अशोक गहलोत ही बोल सकते हैं।

निलंबन और मायावती

इमरान मसूद के बाद बसपा प्रमुख मायावती की गाज अमरोहा के सांसद कुंवर दानिश अली पर गिरी है। उन्हें बसपा से निलंबित कर दिया गया है। दानिश अली पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है। दानिश अली ने सफाई दी है कि उन्होंने कभी भी किसी प्रकार का पार्टी विरोधी काम नहीं किया है। बल्कि, दानिश अली ने मायावती को इस बात के लिए धन्यवाद दिया है कि उन्होंने बसपा का टिकट देकर लोकसभा में पहुंचने में मदद की। हां, उन्हें निलंबन का अफसोस जरूर है। मायावती काफी अरसे से भाजपा और कांग्रेस से समान दूरी बनाकर रख रही हैं, लेकिन दानिश अली विपक्षी दलों के नेताओं से नजदीकियां बढ़ाते दिखाई दे रहे थे। खासकर राहुल गांधी से बढ़ाई गई नजदीकी से मायावती को समस्या है। भले ही मायावती भाजपा से दूरी बनाए रखने का आभास देती हों, लेकिन उनकी रणनीति कुछ ऐसी रहती है कि भाजपा को लाभ पहुंचे। इसलिए उन्हें विपक्षी एकता से भी कुछ राजनीतिक दल दूर रखना चाहते हैं। एक दानिश अली को निलंबित करके मायावती को क्या मिलेगा यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

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