मुख्यपृष्ठस्तंभसियासतनामा : सियासी दौरा!

सियासतनामा : सियासी दौरा!

सैयद सलमान मुंबई

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भारत दौरे पर आए। देश के ७५वें गणतंत्र दिवस के मौके पर वे कर्तव्य पथ पर आयोजित परेड में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ रोड शो किया, जयपुर में हवा महल और अमर किले का दौरा किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा दिए गए राजकीय भोज में भी वे शामिल हुए। लेकिन मुस्लिम समाज को लेकर अक्सर कठोर रुख रखने वाले देश फ्रांस के सर्वोच्च पद पर बैठे इमैनुएल मैक्रों का विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ प्रसिद्ध सूफी संत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह पर जाना कुछ लोगों को रास नहीं आया। फिलहाल, देश में जिस तरह का वातावरण है उसमें मैक्रों का दरगाह पर जाना नफरत भरकर तैयार किए गए जोंबियों को नागवार गुजरा। उन्होंने अपने ही नेताओं को भला-बुरा कहा कि आखिर ऐसा क्यों होने दिया गया। गली-मोहल्लों में उत्पात मचाने वालों को समझना चाहिए कि अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में यह सब आम बात है। आखिर कपड़ों से खास समुदाय को पहचानने की बात करने वाले पीएम मोदी भी तो खाड़ी देशों की मस्जिदों का सियासी दौरा करते ही रहते हैं।
हानिकारक नशा
कई राज्यों की सरकारों को गिराने का भाजपा का ट्रेक रिकॉर्ड रहा है। दिल्ली में भी यही खेल खेलने की तमाम योजनाएं बनाई गईं। एक बार फिर भाजपा पर `आप’ के विधायकों को तोड़ने की नाकाम कोशिश करने का आरोप लगाया गया है। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और मंत्री आतिशी की ओर से यह आरोप लगाए गए। केजरीवाल के अनुसार, उनके विधायकों को २५-२५ करोड़ रुपए ऑफर किए गए। हालांकि, विधायकों को खरीदने वाले केजरीवाल और आतिशी के बयान को उनके पुराने साथी और अब भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने नकारते हुए पलटवार किया है कि अरविंद केजरीवाल झूठ बोल रहे हैं, जबकि केजरीवाल का दावा है कि विधायकों को तोड़ने के सबूत जल्‍द ही सार्वजनिक किए जाएंगे। एक बात समझ से परे है कि भाजपा जब चाल, चरित्र और चेहरा का दम भरती है तो चुनी हुई सरकारों को गिराना क्यों चाहती है? सत्ता पाने का ऐसा क्या नशा कि लोकतांत्रिक तरीके से बनी सरकारों को भ्रष्टाचारी तरीके से पलट दिया जाए। भाजपा शायद भूल गई कि हर तरह का नशा हानिकारक होता है।
कौन अपना, कौन पराया?
राहुल की `भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ को लेकर असम और पश्चिम बंगाल का अनुभव मिला-जुला रहा। असम और पश्चिम बंगाल में उन्हें प्रशासनिक अड़चनों का सामना करना पड़ा। जब तक कांग्रेस की `भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ असम में थी, तब तक असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बीच हर दिन तीखी बहस होती रही। इस बीच असम पुलिस ने कथित तौर पर भीड़ को उकसाने के आरोप में राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल और कन्हैया कुमार के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की। अब कांग्रेस आरोप लगा रही है कि पश्चिम बंगाल में भी `भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ की कुछ सार्वजनिक बैठकों को आयोजित करने की अनुमति मिलने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, पूर्वोत्तर राज्यों और पश्चिम बंगाल में राहुल की यात्रा को अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। अड़चन कांग्रेस के पुराने साथी हेमंत बिस्वा सरमा और इंडिया गठबंधन में शामिल रही ममता बनर्जी की तरफ से आना यह संकेत दे रहा है कि राहुल की यह यात्रा अपने और परायों दोनों को नहीं सुहा रही है।
शर्म दोनों को नहीं
जिस व्यक्ति ने भाजपा का साथ छोड़कर इंडिया गठबंधन बनाने की पहल की, वही व्यक्ति भाजपा के दरवाजे पर शरणागत हो गया। बिहार के `सुशासन बाबू’ कहे जाने वाले नीतिश कुमार एक बार फिर `पलटूराम’ का खिताब पाने में कामयाब रहे। मरते दम तक भाजपा के साथ न जाने की कसम खाने वाले नीतिश उन्हीं लोगों के चरणों में बैठ गए, जिन लोगों ने कहा था नीतिश के लिए भाजपा के दरवाजे हमेशा के लिए बंद हो चुके हैं। शर्म दोनों को नहीं आई। जेपी आंदोलन से लेकर लालू प्रसाद यादव तक के साथ दुश्मनी-दोस्ती का हर खेल खेलने वाले नीतिश के मुकाबले में अब कोई मौसम विज्ञानी नहीं आ सकता। नीतिश ने पलटने के मामले में हर दलबदलू को मात दे दी है। नीतिश दुनिया के ऐसे पहले मुख्यमंत्री हैं, जो मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए, मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर, पुन: मुख्यमंत्री पद के लिए पत्र सौंपते हैं, ताकि फिर से मुख्यमंत्री बन सकें। यह उस महिला की तरह हैं, जो न मायके में खुश रहती है न ससुराल में। अपने दम पर अपना घर बनाने से रहे, सो बारी-बारी दोनों जगह ठिकाना बनाने की मजबूरी है।
(लेखक मुंबई विश्वविद्यालय, गरवारे संस्थान के हिंदी पत्रकारिता विभाग में समन्वयक हैं। देश के प्रमुख प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं।)

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