मुख्यपृष्ठनए समाचारधारा ३७० निरस्तीकरण की चौथी वर्षगांठ पर शिवसैनिकों का मूक धरना-प्रदर्शन

धारा ३७० निरस्तीकरण की चौथी वर्षगांठ पर शिवसैनिकों का मूक धरना-प्रदर्शन

सरकार की वादा खिलाफी से खुशियां हुईं काफूर : साहनी
एक विधान, एक निशान के समर्थन का खामियाजा भुगत रही जम्मू की जनता
जम्मू। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पार्टी की जम्मू-कश्मीर इकाई ने आज अनुच्छेद ३७० के निरस्तीकरण की चौथी वर्षगांठ पर हाथों में तिरंगे लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर विश्वासघात और वादाखिलाफी के गंभीर आरोप लगाया।

पार्टी प्रदेश प्रमुख मनीष साहनी के‌ नेतृत्व में एकत्रित शिवसैनिकों एवं सैनिक समाज पार्टी के नेताओं ने जम्मू शहर के महाराजा हरि सिंह पार्क के बाहर `कश्मीरी पंडितों का पुनर्वास कब?’, `हमारी सांस्कृतिक पहचान की सुरक्षा अब?’, `आंतकवाद एवं लक्षित हत्याओं पर पूर्णविराम कब?’, `राज्य दर्जा, लोकतांत्रिक प्रक्रिया बहाली कब?’ आदि दर्जनों सवाल लिखे प्लेकार्ड पकड़ कर मूक धरना प्रदर्शन किया।

प्रदेश प्रमुख मनीष साहनी ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि पांच अगस्त, २०१९ को केंद्र की मोदी सरकार ने यह कहते हुए अनुच्छेद ३७० का निरस्तीकरण किया कि जम्मू-कश्मीर में अमन बहाली, आर्थिक प्रगति, विकास और रोजगार के रास्ते खुलेंगे। साहनी ने कहा कि जम्मू संभाग की जनता को यह अंदाजा नहीं था कि एक विधान और निशान का समर्थन करना उन्हें इस कदर महंगा साबित होगा कि जम्मू-कश्मीर को भागों में बांट देने के साथ, राज्य का दर्जा छीन लिया जाएगा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बहाली नहीं होगी।

साहनी ने कहा कि आज प्रदेश के हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि युवा रोजगार के लिए तरस रहे हैं, बेरोजगारी में हम देश के मुकाबले शीर्ष पर हैं। प्रदेश के लाखों युवा मानसिक अवसादों के घेरे में हैं। लाखों युवा नशाखोरी का शिकार होकर मौत के मुंह में समाते जा रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के १३ लाख युवा नशाखोरी में लिप्त हैं। पाकिस्तान प्रयोजित नार्को टेरर ने प्रदेश के युवाओं को पंगु बनाकर मौत की कगार पर ला खड़ा किया है।

कोरोना महामारी जिस दौरान देशव्यापी लॉक डाउन भी था की अवधि के दौरान वर्ष २०१९-२१ के तीन वर्षों में दस हजार से अधिक बेटियों व बच्चों के लापता होने की बात सामने आई। सरकारी आंकड़ा डराने वाला है। प्रदेश में अपराध का ग्राफ दिन-प्रतिदिन ऊपर चढ़ता जा रहा है।

कश्मीर पंडितों की सुरक्षित घाटी वापसी संभव नहीं हो पाई है। आंतकवाद आज कश्मीर के साथ जम्मू में भी अपने पांव पसार चुका है । बिजली पानी बिलों की आड़ में जनता की जेबों पर डाका डाला जा रहा है। निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के नहीं होने से प्रशासन एवं नौकरशाही जन मुद्दों के प्रति लापरवाह, मनमाना व तानाशाह वाला रुख अख्तियार किए हुए है। ९० विधानसभा सीटों वाले नए जम्मू-कश्मीर को उपराज्यपाल एवं उनके एकमात्र सलाहकार चला रहे हैं।‌ केंद्र सरकार द्वारा संसद के पटल पर किये वादे के अनुरूप जम्मू-कश्मीर को उसका छीना गया राज्य का दर्जा लौटाया नहीं जा रहा। साहनी ने कहा कि केंद्र सरकार एवं जम्मू-कश्मीर प्रशासन की जन विरोधी नीतियों एवं फैसलों से जम्मू संभाग की जनता आज अपने आप को ठगा हुआ एवं असहाय महसूस कर रही है। इस मौके पर चेयरमैन राकेश गुप्ता, उपाध्यक्ष संजीव कोहली, अध्यक्ष कामगर विंग राज सिंह, शशिपाल,मंगू राम , मुनीश राजपूत, आयुष्मान सिंह, सुनील दत , मुनीश कुमार, नीरज मेहरा , राकेश कुमार,शिवम् कुमार , बीरचंद आदि उपस्थित रहे।

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