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एनआईए के रडार पर सिमी और आईएम …सजा काटकर निकले आतंकियों की बनाई गई सूची

नागमणि पांडेय / मुंबई
महाराष्ट्र मॉड्यूल मामले में पुणे से गिरफ्तार आइसिस आतंकी मामले में जांच कर रही एनआईए ने प्रतिबंधित स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) और इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) के साथ काम कर चुके आतंकी अब आइसिस के साथ हाथ मिलाए जाने का खुलासा किया था। इस खुलासे के बाद सिमी के सदस्य रह चुके भिवंडी से गिरफ्तार नाचन के घर पर छापेमारी कर कई कागजात बरामद किए थे। अब एनआईए ने सिमी या इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी जो अलग-अलग मामलों में गिरफ्तार थे और सजा काटकर निकले हैं, ऐसे लोगों की सूची बनानी शुरू कर दी है। इन आतंकियों पर विशेष रूप से नजर रखी जा रही है, क्योंकि एक बार फिर सिमी की ओर से इंडियन मुजाहिदीन को आइसिस की तरफ से जिंदा करने की कोशिश की जा रही है। इसके लिए विदेशों से फंड भेजे जाने का खुलासा गिरफ्तार आतंकियों के बैंक अकाउंट से हुआ है।
बता दें कि पुणे के कोथरूड में पेट्रोलिंग के दौरान दो लोगों को संदेह के आधार पर पुलिस ने गिरफ्तार किया था। जांच में खुलासा हुआ था कि ये दोनों मोटरसाइकिल चोरी कर रहे हैं। आगे जांच में यह सामने आया है कि दोनों इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत (आईएसकेपी) की शाखा सुफा के लिए काम कर रहे थे और एनआईए के एक केस में वांटेड थे। पुणे से गिरफ्तार आरोपी शाहनवाज आलम अब तक की आतंकी योजना में मास्टरमाइंड रहा है। इसका खुलासा होते ही एटीएस के हवाले दोनों को कर दिया गया। एटीएस द्वारा जांच किए जाने पर शहनवाज सभी पुराने आतंकी संगठन जो गतिविधियों के मामले में लगभग खत्म हो चुके थे, उन्हें फिर से सक्रिय कर दिया गया है। खुद को एजेंसियों से बचाते हुए पुराने संगठनों को एक्टिव किया था, लेकिन एक बड़ी घटना को अंजाम देने से पहले पकड़ा गया। शहनवाज ने ही सिमी का पूर्व सचिव और २००२-०३ मुंबई बम ब्लास्ट मामले मे सजा काट चुका साकिब नाचन को जोड़ा था। शहनवाज को मदद करनेवालों सहित अब तक छह लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
इराक और सीरिया के हैंडलर भेज रहे थे फंड
एनआईए ने गिरफ्तार किए आरोपियों के खातों की जांच में उनके खाते में इराक और सीरिया से एक विदेशी हैंडलर से मदद पहुंचने का खुलासा हुआ है। पुणे मामले में सभी को अलग-अलग समय पर फंडिंग मिली। साजिश को अंजाम देने में लगे लोगों को नियमित विदेशी फंडिंग मिल रही है। कुछ पैसे हवाला के माध्यम से भी भेजे गए थे। इन पैसों का इस्तेमाल सिमी और इंडियन मुजाहिदीन को जिंदा करने के लिए किया जा रहा था। ऐसे में अब एनआईए और एटीएस ने अलग-अलग मामलों में सजा काटकर बाहर आए आतंकियों की सूची बनाई है। इन आतंकियों पर नजर रखी जा रही है। जांच एजंसियों को संदेह है कि इसके माध्यम से ही नए युवाओं को जोड़ने या ट्रेंड करने की कोशिश की जा रही है।

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