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एक साथ चुनाव जरूरी या एक जैसी शिक्षा? … ‘वन नेशन-वन एजुकेशन’ की हिमायत में उतरे दिग्गज

केंद्र सरकार द्वारा देश में ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ लाए जाने की कवायद पर पूरे विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया है। इसका कारण है कि इस मामले को सरकार ने ऐसे समय पर उठाया है, जब इसकी जरूरत नहीं थी। देश अभी महंगाई और बेरोजगारी जैसे गंभीर मुद्दे से जूझ रहा है, ऐसे में लोगों का ध्यान भटकाने के लिए केंद्र ने ये चाल चली है। असल में केंद्र के खिलाफ विपक्ष एकजुट हो गया है और ‘इंडिया’ गठबंधन के आक्रामक तेवर को देखकर मोदी सरकार हिल गई है। ऐसे में जरूरी है कि जनता का ध्यान दूसरी तरफ मोड़ा जाए। कांग्रेस नेता राहुल गांधी से लेकर, दिल्ली की आप सरकार के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और असदुद्दीन ओवैसी जैसे दिग्गज नेताओं ने मोदी सरकार को लताड़ लगाई है।
बता दें कि कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने कमिटी का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया, फिर जयराम रमेश ने इसे कर्मकांडीय बताया और अब राहुल गांधी ने कहा कि ये देश के संघीय ढांचे पर हमला है। राहुल ने कहा, ‘इंडिया का मतलब भारत, राज्यों का एक संघ है, ‘ऐसे में एक राष्ट्र एक चुनाव’ का विचार संघ और उसके सभी राज्यों पर हमला है।’ एक राष्ट्र एक चुनाव’ की संभावना तलाशने के लिए जो गठित समिति से अधीर रंजन चौधरी ने यह कहते हुए शामिल होने से इनकार कर दिया कि ये कमेटी संवैधानिक रूप से सही नहीं है। साथ ही ये व्यवहारिक और तार्किक रूप से भी उचित नहीं है। ये कमेटी भी तब बनाई गई है जब आम चुनाव नजदीक आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्यसभा में विपक्ष के नेता को इस कमेटी में न रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था का अपमान है। इस हालत में मेरे पास इसके अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है कि कमेटी का सदस्य बनने का निमंत्रण अस्वीकार करूं।

आम आदमी को कुछ नहीं मिलेगा
इस मुद्दे पर आप नेता व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी भाजपा सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने इसकी जगह ‘वन नेशन-वन इलाज’ की मांग की। केजरीवाल ने कहा कि भाजपा ने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का नया शिगूफा छोड़ा है, इससे आम आदमी को कुछ नहीं मिलेगा।’ उन्होंने एक जैसी शिक्षा की मांग करते हुए कहा, ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ की जगह ‘वन नेशन, वन एजुकेशन’ चाहिए।

लोकतंत्र-संघवाद के लिए विनाशकारी
इस मामले पर असदुद्दीन ओवैसी ने भी तीखे तेवर अपनाते हुए केंद्र सरकार को घेरते हुए इसे बहुदलीय संसदीय लोकतंत्र और संघवाद के लिए विनाशकारी करार दिया है। ओवैसी ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘यह उस समिति की नियुक्ति की अधिसूचना है, जो ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ के मामले को देखेगी। साफ है कि यह बस एक औपचारिकता है और सरकार पहले ही इस पर आगे बढ़ने का पैâसला कर चुकी है। आने वाले विधानसभा चुनावों के कारण मोदी को गैस के दाम कम करने पड़े। वह एक ऐसा परिदृश्य चाहते हैं, जहां अगर वह चुनाव जीत जाते हैं, तो अगले पांच साल बिना किसी जवाबदेही के जनविरोधी नीतियों को आगे बढ़ाने में बिताएं।’ ओवैसी ने पोस्ट किया, ‘मोदी सरकार ने एक पूर्व राष्ट्रपति को एक सरकारी समिति का अध्यक्ष नियुक्त करके भारत के राष्ट्रपति के उच्च पद का दर्जा कम कर दिया है।’ इसके अलावा गुलाम नबी आजाद का नाम लिए बगैर ओवैसी ने लिखा, ‘एक पूर्व राज्यसभा एलओपी (विपक्ष के नेता) को (समिति में) क्यों शामिल किया गया है?’

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