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सियासतनामा : चोट खाकर होश आया

  • सैयद सलमान

चोट खाकर होश आया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लगता है कि भ्रष्ट लोगों के खिलाफ कार्रवाई ने राष्ट्रीय राजनीति में एक नया ध्रुवीकरण तैयार किया है। प्रधानमंत्री मानते हैं कि कुछ लोग खुले तौर पर आरोपों का सामना करने वालों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। उनके इस बयान को मित्र से विरोधी बने नीतिश कुमार ने लपकते हुए प्रधानमंत्री की नीतियों पर ही सवाल उठा दिया है। नीतिश का कहना है कि भ्रष्टों को कोई नहीं बचा रहा है, बल्कि भाजपा को सोचना चाहिए कि दूसरे राज्यों में क्या हो रहा है? जनता भी जानना चाहती है कि कैसे जिन दागियों पर भाजपा नेता ही उंगली उठाया करते थे, भाजपा में शामिल होते ही उन सभी नेताओं की तमाम जांच बंद कर दी जाती है। कैसे सरकारें पलटने के लिए धनबल का उपयोग होता है? कैसे हर गैर भाजपा शासित राज्य सरकारों को अस्थिर किया जाता है? क्या यह भ्रष्ट आचरण नहीं है? वैसे नीतिश को चोट खाकर होश आया है कि मोदी-अटल में जमीन-आसमान का अंतर है, तभी तो मोदी पर हमलावर होते हुए वह अटल बिहारी वाजपेयी का बखान करते घूम रहे हैं।
डाटा बैंक के सहारे भाजपा
मध्यप्रदेश में होने वाले अगले वर्ष के चुनाव की तैयारी भाजपा ने अभी से शुरू कर दी है। २०१८ के विधानसभा चुनावों में भाजपा को कम सीटें मिली थीं, जिससे वह बहुमत से दूर रह गई थी। वह तो कांग्रेस में सेंध लगाकर और गद्दारों को साथ मिलाकर कमलनाथ की सरकार गिराई गई, तब जाकर शिवराज सिंह चौहान की ताजपोशी हो सकी। पार्टी इसीलिए इस बार फूंक -फूंककर कदम रखते हुए अपने चिरपरिचित ध्रुवीकरण फॉर्मूले पर अमल कर रही है। उसने अपने सांसदों और विधायकों को यह जिम्मेदारी दी है कि वह बूथ स्तर पर मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा-चर्च की जानकारी के अलावा धार्मिक आयोजनों के आयोजकों की राजनीतिक दिलचस्पी की सूचना भाजपा के डाटा बैंक में इकट्ठा करें। इसके जरिए लाभदायक धार्मिक स्थल, जातियों और सामाजिक नेताओं के प्रभाव को भाजपा के पक्ष में भुनाया जाएगा। विपक्ष का आरोप है कि भाजपा सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने, धर्म और जाति पर लोगों को बांटने और डरा-धमकाकर लोगों को खरीदने का काम कर रही है। मध्यप्रदेश का आगामी चुनाव पहले से ज्यादा तल्ख होने की पूरी संभावना है।
आम, खास और पीड़ित विधायक
घरेलू हिंसा के कई मामले पुलिस थानों में पहुंचते हैं, कुछ अखबारों की सुर्खियों में जगह पाते हैं और कुछ घर की चारदीवारी में सिसक-सिसक कर दम तोड़ देते हैं। ऐसे मामलों की शिकार साधारण और `आम’ परिवार की महिलाएं ही नहीं, बल्कि वीआईपी यानी `खास’ महिलाएं भी होती हैं। भले ही वह `विधायक’ ही क्यों न हों। दरअसल पंजाब में आम आदमी पार्टी की महिला विधायक के घरेलू हिंसा की शिकार होने का मामला एक सीसीटीवी फुटेज में सामने आया है, जिसमें विधायक प्रोफेसर बलजिंदर कौर को उनके पति सुखराज बल थप्पड़ मारते हुए दिख रहे हैं। एक प्रोफेसर जो जनप्रतिनिधि भी है, अगर वह भी घरेलू हिंसा का शिकार होती है तो सभ्य समाज के लिए शर्म की बात है। आश्चर्यजनक यह भी है कि विधायक ने इसकी शिकायत भी नहीं दर्ज कराई है। अब वह अपने पति से अलग अपने मायके में रहने चली गई हैं। जुल्म सहकर भी वह न जाने क्यों खामोश हैं? उनके विधानसभा क्षेत्र में ही न जाने कितने ऐसे मामले होंगे? यह चुप्पी कई घरेलू महिलाओं के मनोबल को तोड़ेगी।
जनता से छलावा
बेरोजगारी और महंगाई के मुद्दे पर केंद्र सरकार घिरती जा रही है लेकिन सरकार की कर्ताधर्ता भाजपा धार्मिक और भावनात्मक मुद्दों को हर बार उछाल देती है। इसका लाभ यह होता है कि विपक्ष की धार कमजोर हो जाती है, साथ ही भावनात्मक मुद्दों की वजह से जनता फिर छलावे में आ जाती है। महंगाई और अर्थव्यवस्था की लचर स्थिति पर आंकड़े बताते हैं कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर ७९.७० पर आ गया है। अगस्त में बेरोजगारी दर ८.२८ प्रतिशत थी, जो पिछले एक साल में सबसे अधिक रही। शहरी बेरोजगारी दर बढ़कर ९.६ प्रतिशत हो गई है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान घरेलू एलपीजी की कीमतों में हुई बढ़ोतरी ने भी आम आदमी की जेब पर बोझ डाला है। पेट्रोलियम मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल २०१७ से जुलाई २०२२ के बीच एलपीजी की कीमतों में ५८ संशोधन हो चुके हैं, जिसके बाद गैस की कीमतों में ४५ प्रतिशत की वृद्धि हुई है। `महंगाई पर हल्ला बोल’ जैसे आंदोलन भी हो रहे हैं लेकिन क्या जनता छलावे से बाहर निकलने को तैयार है?

(लेखक मुंबई विश्वविद्यालय, गरवारे संस्थान के हिंदी पत्रकारिता विभाग में समन्वयक हैं। देश के प्रमुख प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं।

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