मुख्यपृष्ठनए समाचारउल्हासनगर में एक और आफत... स्लैब ने समेट ली चार जिंदगियां!

उल्हासनगर में एक और आफत… स्लैब ने समेट ली चार जिंदगियां!

• २५ साल पुरानी थी इमारत
•  एक महीने में तीसरी घटना

अनिल मिश्रा / उल्हासनगर
उल्हासनगर में इमारतों के गिरने का सिलसिला जारी है। कल एक और इमारत का स्लैब एक के ऊपर एक कर गिरता चला गया। इस स्लैब ने चार जिंदगियों को समेट लिया। पिछले एक महीने में यह तीसरा हादसा है और इन हादसों में इसे मिलाकर अब तक ६ लोगों की मौत हो चुकी है। इस घटना से उल्हासनगर की इमारतों में रहनेवाले लोगों में दहशत का माहौल है।
बता दें कि गुरुवार की सुबह उल्हासनगर वैंâप नंबर-५ स्थित कपलेश्वर महादेव मंदिर के पास, ओटी सेक्शन में मानस टॉवर सोसायटी की इमारत का स्लैब गिर गया। हादसे की सूचना मिलते ही मनपा आयुक्त अजीज शेख अपने अधिकारियों के साथ घटना स्थल पर पहुंचे। पुलिस व अग्निशमन दल ने घटना स्थल पर पहुंचकर ४ शवों को बाहर निकाला। बाद में उन्हें पोस्टमॉर्टम के लिए मध्यवर्ती अस्पताल भेजा गया। बताया गया कि सिर्फ २५ साल पहले बनी यह ५ मंजिली इमारत जर्जर हो गई थी। इस धोखादायक इमारत में २० फ्लैट हैं, जिनमें से ११ फ्लैट खाली थे। बाकी के ९ फ्लैट में लोग रह रहे थे। नीचे दुकानें भी खुली थीं।

१२ वर्षों में गिरीं ३८ इमारतें
उल्हासनगर में पिछले १२ सालों में ३८ इमारतें गिरी हैं, जिनमें ४२ लोगों की मौतें हुई हैं। २५ साल पहले सोना मार्वेâट के पीछे एक निर्माणाधीन इमारत गिर गई थी। उस घटना में ९ लोग मारे गए थे। उसके बाद जो हादसों का सिलसिला शुरू हुआ तो उसमें हजारों लोग बेघर हुए हैं। शीशमहल अपार्टमेंट, मां भगवती, नीलकंठ, शिवसागर, रानी मां, महालक्ष्मी, शांति पैलेस, सन्मुख सदन, स्वामी शांतिप्रकाश अपार्टमेंट, सोना मार्वेâट, गुडमैन कॉटेज, नेहरू पार्क, हमलोग अपार्टमेंट, पारसमणि, सिंधरी सागर, लक्ष्मीनारायण, आशीर्वाद मार्वेâट, माधुरी कॉम्प्लेक्स, मलिका महल, मुरलीवाला, सत्यम कॉम्प्लेक्स, साई आशाराम अपार्टमेंट, मेमसाब, मंदार अपार्टमेंट, साई एंपायर, शिवलीला, नवचंद्रिका, अंबिका सागर अपार्टमेंट, महक, ओम शिवगंगा सोसायटी, मोहिनी पैलेस, साईशक्ति अपार्टमेंट, पारस पैलेस, देवऋषि बिल्डिंग, स्वामी नारायण पैलेस, कोमल पार्क आदि में हादसे हो चुके हैं। ४ दिन पहले ही एक ३ मंजिली इमारत का हिस्सा बगल के घर पर गिरने से एक बुज़ुर्ग की मौत हो गई थी।

मनपा आयुक्त अजीज शेख ने बताया कि लगातार हो रही बरसात के कारण महीने में यह तीसरा हादसा हुआ। मानस टॉवर को नोटिस दी गई थी। इसके बावजूद लोग रह रहे थे। सूचना मिलते ही प्रशासन घटनास्थल पर डॉक्टर और एंबुलेंस के साथ पहुंच गया था। रास्ता संकरा होने के कारण एंबुलेंस को पहुंचने में देरी हुई। नोटिस देने के बावजूद जर्जर इमारतों में रहनेवाले लोग घर नहीं छोड़ते, जिससे ऐसे हादसों में जान-माल की हानि होती है।

अन्य समाचार