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धूम्रपान से बढ़ा विकार!‘पैसिव स्मोकिंग’ है घातक… स्मोकिंग से होता ९० % लंग कैंसर

सामना संवाददाता / मुंबई
हिंदुस्थान में तेजी से बढ़ रहा धूम्रपान का चलन कैंसर जैसे घातक विकारों को न्यौता दे रहा है। एक सर्वे के अनुसार देश में हर १०० कैंसर रोगियों में १० से १२ लंग कैंसर के शिकार हैं। सर्वे के दौरान निरीक्षण में पाया गया कि इनमें से ९० प्रतिशत लोगों में धूम्रपान फेफड़ों के कैंसर का कारण बना है। बताया गया है कि हर साल करीब ७० हजार नए लंग्स कैंसर के मरीज सामने आ रहे हैं। इसमें महिलाओं की तुलना में पुरुषों की संख्या अधिक है। लंग कैंसर का सबसे बड़ा कारण पैसिव स्मोकिंग है।
लंग कैंसर के ये भी हैं कारण
अन्य कारणों में आनुवंशिकता, प्रदूषण अथवा प्रदूषित हवा के लगातार संपर्क में बने रहना है, वह चाहे कंपनियों या पर्यावरण में ही क्यों न हो। इसके अलावा फेफड़ों के पुराने विकार आदि भी लंग कैंसर का कारण बनते हैं।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
श्वसन रोग विशेषज्ञों के अनुसार फेफड़ों के कैंसर के लक्षणों में पुरानी खांसी और कफ, खांसने और कभी-कभी थूक से खून आना, सांस लेने में कठिनाई, आवाज में बदलाव, लगातार फेफड़ों में संक्रमण और निमोनिया शामिल हैं। इसके साथ ही लंबे समय तक बुखार, कमजोरी, वजन कम होने के लक्षण भी देखने को मिलते हैं।
साल २०३० तक लंग कैंसर के मामलों की बढ़ने की है संभावना
फिलहाल हिंदुस्थान में इस समय होने वाले सभी कैंसर में फेफड़ों का कैंसर १० से १२ प्रतिशत है। लेकिन साल २०३० तक इसके दोगुने होने की संभावना है। यदि कैंसर एक फेफड़े को संक्रमित करता है तो इसे उपचार से ठीक किया जा सकता है। लेकिन अगर कैंसर दोनों फेफड़ों में फैल जाए तो खतरा बढ़ जाता है।

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