मुख्यपृष्ठस्तंभधूम्रपान से घटती जिंदगी!

धूम्रपान से घटती जिंदगी!

राजेश महेश्वरी ,लखनऊ

प्रसिद्ध पत्रिका लैंसेट में प्रकाशित अध्ययन का निष्कर्ष है कि धूम्रपान करनेवालों के करीबवालों को कैंसर होने का ज्यादा खतरा होता है। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जो लोग धूम्रपान करते हैं उनकी सेहत कैसी होगी? डॉक्टरों के अनुसार सिगरेट या बीड़ी पीनेवाले को नुकसान होता ही है। उसके आसपास रहनेवाले लोगों को उसका धुआं नुकसान पहुंचाता है। वह भी उसके शरीर में जाकर फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है। तंबाकू का सबसे पहला असर हृदय पर पड़ता है, फिर फेफड़ों पर पड़ता है।
आज की युवा पीढ़ी स्टेटस सिंबल मानकर धूम्रपान की गलत आदत के दलदल में फंसती जा रही है। उसे नहीं पता कि धूम्रपान करना एक मीठा जहर है, जो जिंदगी के लिए हर तरह से खतरनाक है। साइलेंट किलर की तरह धूम्रपान शरीर को अंदर ही अंदर नुकसान पहुंचाता है। इससे ओरल कैंसर और लंग्स कैंसर के सबसे ज्यादा मामले सामने आते हैं।
धूम्रपान की वजह से दांतों से संबंधित बीमारियां भी होती हैं। इससे हार्ट की बीमारी, क्रोनिक लंग्स डिजीज और डायबिटीज का खतरा रहता है। इससे अस्थमा अटैक भी आ सकता है। महिलाओं के स्वास्थ्य पर भी धूम्रपान का गंभीर असर पड़ रहा है। इससे पर्यावरण को भी खतरा हो रहा है।
भारत वैश्विक स्तर पर तंबाकू उत्पादों का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है और तंबाकू से संबंधित बीमारी के कारण प्रतिवर्ष दस लाख से अधिक लोगों की मौत हो जाती है। भारी-भरकम कर लगाए जाने, कड़ी चेतावनीवाले लेबल लगाए जाने के बावजूद तंबाकू के उपयोग में गिरावट नहीं देखी जा रही है। भारत में १६ साल से कम उम्र के २४ फीसदी बच्चों ने पिछले कुछ समय में तंबाकू का इस्तेमाल किया है और १४ फीसदी लोग अभी भी तंबाकू उत्पादों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
डॉक्टरों के अनुसार धूम्रपान से डोपामाइन हार्माेन एक्टिवेट होते हैं, जिसके कारण दिमाग को अच्छा महसूस होता है। क्योंकि सिगरेट और बीड़ी में निकोटीन होता है। ये सुखद अनुभूति से जुड़े डोपामाइन के काम करने की नकल करता है, तो दिमाग (निकोटीन) को सुखद अनुभूति के साथ जोड़ना शुरू कर देता है। धूम्रपान करने से दिमाग के वॉल्यूम में भी कमी हो सकती है। अगर कोई व्यक्ति ज्यादा लंबे समय तक धूम्रपान करता है तो उसके शरीर के महत्वपूर्ण टीशू सिकुड़ने लगते हैं, जिससे दिमाग का वॉल्यूम कम होने लगता है। इसके अलावा डिमेंशिया हो सकता है और याददाश्त कमजोर होने का खतरा रहता है। देश में बीड़ी, सिगरेट के साथ-साथ गुटखा भी खूब खाया जाता है। गुटखा भी सेहत के लिए बेहद हानिकारक होता है। पीजीआई चंडीगढ़ के एक अध्ययन के अनुसार गुटखा खाने से हमारे शरीर के विभिन्न अंगों पर बेहद घातक असर होता है।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार तंबाकू अपने आधे उपयोगकर्ताओं को मार डालता है। तंबाकू से हर साल ८० लाख से ज्यादा लोगों की मौत होती है। उन मौतों में से ७० लाख से अधिक प्रत्यक्ष तंबाकू के उपयोग से मारे जाते हैं। एक ब्रिटिश शोधकर्ता डॉ. जॉन मूरेगिलान के अनुसार दुनिया भर में वर्ष २०५० तक धूम्रपान के कारण होनेवाली बीमारियों से मरने वालों की संख्या ४ करोड़ तक पहुंच जाएगी।
गैर सरकारी संस्था फाउंडेशन फॉर ए स्मोक फ्री वर्ल्ड द्वारा जारी आंकड़ों में खुलासा हुआ है कि देश में धूम्रपान करनेवाले प्रत्येक १० में से सात लोग धूम्रपान को सेहत के लिए खतरा मानते हैं और ५३ फीसदी लोग धूम्रपान छोड़ने की कोशिशों में नाकाम साबित हुए हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि धूम्रपान करनेवालों को ऐसे विकल्प और तरीके उपलब्ध कराने होंगे, ताकि वे लंबा और सेहतमंद जीवन जी सकें। धूम्रपान के कारण हर साल लाखों लोगों की मौत भी हो रही है। हालांकि, धूम्रपान को छोड़ा जा सकता है, लेकिन इसके लिए काउंसलिंग और समय पर डॉक्टरों की सलाह की जरूरत होती है।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कहते थे कि ‘अब तक मैं यह न समझ पाया कि तंबाकू पीने का इतना जबरदस्त शौक लोगों को क्यों है? नशा हमारे धन को ही नष्ट नहीं करता, वरन स्वास्थ्य और परलोक को भी बिगाड़ता है।’ धूम्रपान की रोकथाम के लिए विज्ञापनों की नीतियों में भी बदलाव करना चाहिए। क्योंकि तंबाकू उत्पादों के विज्ञापनों को देखकर युवा इसकी ओर आकर्षित होते हैं और इसका सेवन करते हैं। कई ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी तंबाकू उत्पादों को भी काफी बढ़ावा मिल रहा है। लोगों को धूम्रपान के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करने की जरूरत है। इसके लिए एक विशेष अभियान चलाना चाहिए।
(लेखक उत्तर प्रदेश राज्य मुख्यालय पर मान्यता प्राप्त स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

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