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घर-घर तस्कर! बड़ी तबाही ला सकती है बोनसाई ड्रग्स की खेती, गुप्त प्रयोगशालाओं में तैयार किया जा रहा है जहर

हिंदुस्थान एक कृषि-प्रधान देश है। देश की लगभग समूची अर्थव्यवस्था खेती और उससे संबंधित उद्यमों पर टिकी है। लेकिन कुछ खुराफाती तत्व देश में ऐसी खेती करने लगे हैं, जिसे समय रहते नहीं रोका गया, तो यह न केवल देश की अर्थव्यवस्था का भट्ठा बैठा देगी बल्कि लाखों हिंदुस्थानियों की जीवनलीला को खत्म कर देगी। दरअसल, ड्रग्स तस्करी को रोकने के लिए बंदरगाहों और हवाई अड्डों पर मंडरा रही एनसीबी की टीम को चकमा देने के लिए ड्रग तस्करों ने जहर की खेती करने का खतरनाक तरीका खोज लिया है। इजरायल मूल की ‘हाइड्रोफोनिक’ यानी जलीय खेती और जापान मूल की बागवानी पद्धति ‘बोनसाई’ के तरीके को अपनाकर विदेशी ड्रग तस्कर अब देश के विभिन्न हिस्सों में ड्रग्स की खेती करने लगे हैं।
घर-घर तस्कर तैयार करने की रणनीति
विशालकाय पेड़ों को आपके गमले में सजा देने की क्षमता रखनेवाली जापानी बोनसाई कलम पद्धति का ड्रग्स तस्कर खतरनाक इस्तेमाल करने लगे हैं। ये तस्कर अब बोनसाई तरीके से छोटे-छोटे कमरों में भांग और अफीम की खेती करने लगे हैं। छोटे-छोटे कमरों में लैब बनाकर सिंथेटिक ड्रग्स तैयार करने लगे हैं। ड्रग्स तस्कर गोवा, मिजोरम, नोएडा, सतना जैसे इलाकों में घर-घर नशीले पौधे लहलहाने और घर-घर तस्कर तैयार करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। नशीले पौधों की छोटी-छोटी बोनसाई खेती आनेवाले समय में बड़ी तबाही ला सकती है।
इंटरनेशनल ड्रग्स रैकेट का भंड़ाफोड़
मई की शुरुआत में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने गोवा में एक इंटरनेशनल ड्रग रैकेट का भंड़ाफोड़ किया था। इस दौरान एक ओलंपिक पदक विजेता रूसी महिला तैराक वर्गानोवा को गिरफ्तार किया गया। १९८० में मॉस्को ओलंपिक में अपने देश सोवियत रूस के लिए तैराकी का पदक जीत चुकी वर्गानोवा कोविड की लहर पर सवार होकर २०२१ में रूस से गोवा पहुंची और वहां टिककर नशे का धंधा करने लगी। वर्गानोवा से पूछताछ में पता चला कि इस रैकेट का सरगना रूस का एक पूर्व पुलिसकर्मी आंद्रे है।
घर में हो रही थी ड्रग की खेती
एनसीबी की गोवा टीम ने अश्वेम बीच पर छापा मारकर वहां समुद्र में तैर रहे सरगना आंद्रे को दबोच लिया। आंद्रे पुलिस के साथ हाथापाई पर उतर आया। वह वहां से किसी भी तरह भाग जाना चाहता था, लेकिन ऐसा हो न सका। तब आंद्रे पुलिस थाने चलने की जिद करने लगा, लेकिन एनसीबी की टीम उसके घर जाने पर अड़ गई। आंद्रे अपने घर का पता नहीं बता रहा था। आसपास के लोगों से किसी तरह एनसीबी की टीम ने उसके घर का पता हासिल किया। एनसीबी टीम जब आंद्रे के घर पहुंची तो दंग रह गई। आंद्रे अपने घर पर हाइड्रोफोनिक यानी जलीय तरीके से गांजे की खेती कर रहा था। आंद्रे के इस ड्रग कार्टल में एक स्थानीय व्यक्ति भी सहयोग दे रहा था।
पार्टियों में पहुंचता था नशा
पूछताछ में पता चला कि मैक्सिको के ड्रग्स माफिया की तर्ज पर आंद्रे ने अपने घर पर एक लैब भी बना रखा था। वह घर पर गांजा तो उगा ही रहा था, गोवा की पार्टियों में अपनी सहयोगी वर्गानोवा, व अन्य के सहारे एलएसडी, कोकिन, एमडीएम, चरस और गांजा की सप्लाई कर रहा था। आंद्रे के घर से एनसीबी ने एलएसडी के ८८ ब्लॉट, ८.८ ग्राम कोकीन, २४२.५ ग्राम चरस, डेढ़ किलोग्राम हाइड्रोफोनिक गांजा, १६.४९ ग्राम हैश तेल, ४१० ग्राम हैश केक बरामद किया।
नशेड़ियों को भा रहा है मेथ
नशे की दुनिया में मेथ या मेथम्फेटामाइन को ‘ग्लास’ और ‘आइस’ भी कहा जाता है। इसने हिंदुस्थानी ड्रग्स बाजार पर कब्जा कर लिया है और हेरोइन-कोकीन इस दौड़ में काफी पीछे छूट चुके हैं। एनसीबी सूत्रों का कहना है कि मेथ सस्ता होने के कारण कोकीन और हेरोइन पर भारी पड़ रहा है। १ किलो शुद्ध मेथ की कीमत लगभग ५ करोड़ रुपए होती है, वहीं १ किलो उच्च गुणवत्ता वाली कोकीन की कीमत करीब १० करोड़ रुपए पड़ती है। इसलिए नशेड़ियों में अब सिंथेटिक ड्रग्स और ऑर्गेनिक ड्रग्स यानी बोनसाई ड्रग्स का चलन बढ़ रहा है।
सारा खेल पैसे का!
हिंदुस्थान में ड्रग्स का सालाना धंधा लगभग १० लाख करोड़ रुपए का है। महानगरों में युवा पीढ़ी के बीच ड्रग्स की जबरदस्त मांग है। मोटी कमाई के चक्कर में विदेशी यहां आकर ड्रग्स की खेती करने लगे हैं। गुप्त प्रयोगशालाओं में मौत का सामान तैयार करने लगे हैं। ऐसे में आम नागरिकों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। कुछ भी संदिग्ध महसूस होने पर पुलिस को सूचना देना उनकी जिम्मेदारी बनती है।

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