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सोशल मीडिया से होगा मानसिक बीमारियों का इलाज! … स्वास्थ्य विभाग ने बनाया व्हाट्सऐप ग्रुप

कोरोना और बदलती जीवन शैली से बढ़ ही हैं मानसिक बीमारियां

धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
बदलती जीवनशैली और कोरोना वायरस के बाद उत्पन्न स्थिति के कारण बड़ी संख्या में लोग मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के शिकार हो रहे हैं। हालांकि प्रदेश में अब स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान के लिए सोशल मीडिया आधार बनने जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने मानसिक समस्याओं के प्रति जनता में जागरूकता पैâलाने के साथ ही मनोचिकित्सकों का मार्गदर्शन करने के लिए सोशल मीडिया का उपयोग करने का पैâसला किया है। इसके तहत स्वास्थ्य विभाग ने राज्य में मानसिक बीमारियों के उपचार के तरीकों को प्राथमिक स्तर के डॉक्टरों तक पहुंचाने के लिए एक व्हाट्सऐप ग्रुप बनाया है। प्रदेश में टेलीमानस हेल्पलाइन इसलिए शुरू की गई है ताकि नागरिक अपनी समस्याएं बता सकें और अपनी मानसिक बीमारी का समय पर इलाज करा सकें। अब तक इस हेल्पलाइन से प्रदेश के २०,००० से अधिक नागरिकों को लाभ मिला है।

दो प्रकार की होती हैं मानसिक बीमारियां
मानसिक बीमारी दो प्रकार कि यानी हल्की और गंभीर होती हैं। हल्की मानसिक बीमारी में चिंता, अवसाद, तनाव, अनिद्रा, बार-बार आत्महत्या के विचार आना जैसी समस्याएं शामिल हैं। ऐसे अवस्था में अगर संबंधित मरीज को समय पर उचित इलाज मिल जाए, तो गंभीर बीमारी से बचा जा सकता है।

इसलिए लिया गया है फैसला
स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टरों को विभिन्न प्रकार के मानसिक रोगियों का इलाज कैसे करें, उनके इलाज के लिए सरकार द्वारा क्या योजनाएं शुरू की गई हैं, मरीजों को कौन सी दवाएं देनी हैं, योग, ध्यान, काउंसलिंग आदि वैâसे करना है, इसकी जानकारी देने के लिए सोशल मीडिया का उपयोग करने का निर्णय लिया है।

डॉक्टरों को इलाज करते समय कौन-सी सावधानियां बरतनी हैं, इसे लेकर भी मार्गदर्शन किया जाएगा। इसके साथ ही मानसिक मरीजों का इलाज करनेवाले डॉक्टर, परामर्शदाता, सोशल वर्कर्स, प्रशिक्षित नर्स का स्वतंत्र व्हाट्सऐप ग्रुप बनाया गया है।
-डॉ. स्वप्निल लाले, निदेशक, स्वास्थ्य विभाग

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