मुख्यपृष्ठस्तंभसमाज के सिपाही: महिलाओं पर अत्याचार बर्दाश्त नहीं 

समाज के सिपाही: महिलाओं पर अत्याचार बर्दाश्त नहीं 

रवींद्र मिश्रा
पति-पत्नी के बीच विश्वास की डोर अगर मजबूत होती है तो उनका रिश्ता आजीवन बरकरार रहता है। लेकिन उनके रिश्ते में अगर थोड़ी सी भी गलतफहमी पैदा हो जाए तो रिश्ता कमजोर होने लगता है। यहां तक कि कई बार उनकी राहें जुदा हो जाती हैं। लेकिन अलग होने के कगार पर खड़े दो लोगों को अपनी सूझबूझ से जोड़ने का नेक काम धारावी की माया जाधव कर रही हैं। वे कहती हैं कि जहां भी महिलाओं पर अत्याचार होता है, मुझसे बर्दाश्त नहीं होता। अगर कोई परेशान महिला हमारे पास आती है तो उसकी मदद करना हमारी जिम्मेदारी बन जाती है। १६ वर्ष की उम्र से ही माया जाधव परिवारों को जोड़ने का कार्य कर रही हैं। पढ़ाई पूरी करने के बाद माया को मुंबई पुलिस में महिला कांस्टेबल के पद पर सेवा करने का मौका मिला। उन्होंने मरोल पुलिस कैंप में ट्रेनिंग भी ली। लेकिन नियति को शायद वो मंजूर नहीं था और उनके भाग्य में पीड़ित महिलाओं की सेवा करना लिखा था। कई भाषाओं का ज्ञान रखनेवाली माया जाधव ने कई परिवारों का मिलन करवाया है। उत्तर प्रदेश के एक मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के आंबेडकर नगर की एक महिला के घर के पास बन रही दीवार को लेकर काम में बाधा उसका पड़ोसी डाल रहा था। अंतत: उस महिला ने जब हमें अपनी व्यथा सुनाई। हम उसकी मदद के लिए मुंबई से उत्तर प्रदेश पहुंच गए। वहां के ग्राम प्रधान तथा स्थानीय पुलिस को सारी कहानी बताई। उसी दौरान पता चला कि मायावती दौरे पर आ रही हैं। जब मायावती वहां आईं, तो मैं जाकर उनसे मिली। मायावती के हस्तक्षेप से महिला के घर की दीवार बन गई। इसी तरह धारावी कुंभारवाड़ा में रहनेवाले एक कुंभार के बेटी की शादी अमदाबाद में हुई। जिस लड़के से शादी हुई वह मर्चेंट नेवी में काम करता था। शादी के एक साल बाद जब लड़की ७ महीने के गर्भ से थी तो पति ड्यूटी पर चला गया। एक दिन उसके फोन पर किसी रॉन्ग नंबर से फोन आया। सास ने फोन उठाया। सामने वाले ने कोई जवाब नहीं दिया तो गलतफहमी की शिकार सास बहू को भला-बुरा कहने लगी और उसे उसके मां-बाप के पास धारावी भेज दिया। कुछ महीने बाद उस लड़की ने एक बेटी को जन्म दिया। लड़की के मां-बाप ने उसके सास-ससुर से बेटी को ले जाने का आग्रह किया, लेकिन वे टस से मस नहीं हुए। थक-हार कर लड़की के पिता समाज सेवक कमलेश वारिया को लेकर मेरे पास आए। धारावी पुलिस स्टेशन जाकर वहां के वरिष्ठ अधिकारियों से मैं मिली और उन्हें सारी घटना बताई। उन्होंने लड़की के सास-ससुर को अमदाबाद से बुलाया। इसी बीच लड़की का पति भी मुंबई आ गया। लड़की के पति ने गलती स्वीकार की और पत्नी को अमदाबाद ले गया। आज वह परिवार खुशहाल है। इस तरह के अनेक ऐसे मामले हैं जिसे आपसी सूझ-बूझ से सुलझाया गया है।

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