मुख्यपृष्ठस्तंभसमाज के सिपाही : समाज के लिए कुछ भी करूंगा

समाज के सिपाही : समाज के लिए कुछ भी करूंगा

रवींद्र मिश्रा

क्या हिंदुस्थान में पैदा होना गुनाह है? अगर नहीं तो हमारे समाज को ही सजा क्यों? हमें अपने आपको वडार समाज का सदस्य साबित करने के लिए क्यों दर-बदर की ठोकर खानी पड़ती है। यह सवाल किया है वडार समाज के सिपाही यलप्पा कुशालकर ने। कुशालकर कहते हैं कि हर जाति को पेट होता है और पेट की कोई जाति नहीं होती। हमारे पूर्वज मेहनतकश थे। वे पढ़े-लिखे नहीं थे, इसलिए मेहनत-मजदूरी कर अपना पेट भरते थे। पहाड़ों से पत्थर तोड़ना, मिट्टी खोदना आदि उनका काम था। उनको जहां काम मिलता वहां उन्हें जाना पड़ता था। पुरुष बाहर काम करते थे, लेकिन परिवार की औरतें भी घर-गृहस्थी चलाने के लिए खाली नहीं बैठती थीं। अपने खाली समय में परिवार को सहयोग करने के लिए वे कुछ-न-कुछ करती रहती थीं। मसलन आटा पीसने वाली चक्की के लिए जांत बनाना, धान कूटने के लिए ओखल, रोटी बनाने के लिए चौका तथा मसाला पीसने के लिए सिल-बट्टा बनाकर अपनी आजीविका चलाती थीं। इस काम के लिए जहां काम मिलता, वहां जाना पड़ता था। पेट पालने के लिए इधर-उधर भटकने से हम भटक्या जाति कहलाए। आज जमाना बदल गया है। पत्थर तोड़ने के लिए मशीनें आ गर्इं। सिल-लोढ़ा की जगह मिक्सर आ गए। मिट्टी ढोने के लिए गधे और खच्चर की जगह ट्रक, ट्रैक्टर का उपयोग होने लगा। हम बेकार हो गए। हमारे बच्चे जब स्कूल में दाखिला लेने जाते तो उनसे घर का स्थाई पता मांगा जाता। खानाबदोश जिंदगी जीने वाले लोग घर का स्थाई पता कहां से लाएं? समाज की इस समस्या को देख मुझसे रहा नहीं गया और मैंने समाज के लोगों की मदद के लिए हरसंभव मदद करने की ठानी। भारत सरकार के बने विविध नियमों के माध्यम से जो बच्चे स्कूल जाने से वंचित रह जाते थे उन्हें केजी से लेकर पीजी तक दाखिला दिलाने में मैंने मदद की और जिनके पास नौकरियां नहीं थीं, उन्हें नौकरियां दिलवाई। जरूरतमंद विद्यार्थियों को पाठ्य सामग्री उपलब्ध करवाने में उनकी मदद की। यह हमारा सेवा कार्य निरंतर जारी है। हमारे समाज के लोगों की संख्या महाराष्ट्र में लाखों में है। वे पुणे, कोल्हापुर कराड, इचलकरंजी, संभाजीनगर सहित महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों में भारी संख्या में रहते हैं। समाज की ओर से समय-समय पर वर-वधु परिचय सम्मेलन का आयोजन कर उन्हें अपना जीवन साथी चुनने का अवसर दिया जाता है। वडार समाज का सिपाही होने के नाते मैंने संकल्प लिया है कि समाज के लिए जो भी संभव होगा, वो हरसंभव मदद उन्हें करूंगा।

अन्य समाचार