मुख्यपृष्ठस्तंभसमाज के सिपाही : जीवनदाता, लोगों को डूबने से बचाया

समाज के सिपाही : जीवनदाता, लोगों को डूबने से बचाया

आनंद श्रीवास्तव

सालों पहले प्रयागराज से काम की तलाश में मुंबई आए रामहित यादव को जब मुंबई में रोजी-रोटी नहीं मिली तो सायन तालाब के पास मकान लेकर वो इस तालाब की देखभाल का काम करने लगे। लोग जो भी दे देते, उससे उनका घर चल जाता। इसके बाद उनके बेटे मेवालाल यादव ने पिता की इस सेवा को स्वेच्छा से आगे बढ़ाया। वे भी मुंबई के इस ऐतिहासिक सायन तालाब की देख-रेख व साफ-सफाई का काम करने लगे। अब इसी काम को आगे बढ़ाया है यादव परिवार की तीसरी पीढ़ी के विजय यादव ने। दसवीं पास विजय यादव कहते हैं, ‘इस पढ़ाई पर तो नौकरी मिलने से रही। सो अपने बाप-दादा की तालाब सेवा को आगे बढ़ाने का काम करने की मैंने भी ठान ली और दिन-रात इसी में लगा रहता हूं।’
विजय यादव दिनभर इस तालाब के पास बने छोटे से झोपड़ेनुमा शेड के नीचे बैठे रहते हैं। उन्हें सायन के इस शिवकालीन तालाब से विशेष लगाव है। अपने दादाजी और पिताजी को उन्होंने इस तालाब की सेवा करते हुए बचपन से देखा था, सो उनका मन भी उसी में रम गया। विजय यादव के अनुसार, तालाब में पड़े कचरे को वे नियमित अंतराल में साफ करते रहते हैं। इस साफ-सफाई के दौरान कई बार उन्हें तालाब की तह से थैली में भरकर फेंकी गर्इं छोटे बच्चों की लाशें भी मिली हैं। इस तरह कई बार महिला और पुरुष की तैरती लाश को निकालने का काम भी उन्होंने किया है। हत्या कर फेंकी गई बॉडी हो या किसी ने आत्महत्या कर ली हो, सभी प्रकार के शव को निकालकर वे पुलिस की मदद करते रहते हैं। सिर्फ शव ही नहीं, बल्कि आत्महत्या करने के उद्देश्य से इस तालाब में छलांग लगानेवालों को विजय यादव ने बचाया है, इसके अलावा पैर फिसलकर तालाब में गिरनेवालों को भी बचाया है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, पिछले २५ सालों में अब तक १३२ लोगों की जान बचाने के साथ ही लगभग ११८ मृतकों को उन्होंने तालाब से बाहर निकाला है। विजय यादव के इस कार्य की ख्याति चारों ओर पैâलती चली गई। आज इनकी मदद पुलिस, मनपा, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और कई स्वयंसेवी संस्थाओं के लोग कर रहे हैं। किसी नेता ने तालाब का सौंदर्यीकरण करवा दिया तो किसी ने सुरक्षा के लिए ग्रिल लगवा दी है। विजय यादव के कहने पर ही ये सुविधाएं इस शिवकालीन ऐतिहासिक तालाब को मिली हैं। विजय यादव अब अपनी इस सेवा को खुद की संस्था ‘ब्रह्मदेव स्वयंसेवक सेवाभावी संस्था’ के माध्यम से करते हैं। इस कार्य के लिए उन्हें अब कई नवयुवकों का साथ मिल गया है। ये नवयुवक विजय यादव के साथ रहकर उनकी मदद करते हैं। गणपति विसर्जन हो या छठ पूजा, जब कभी तालाब किनारे भीड़ होती है, विजय यादव के सहयोगी खुद वहां मौजूद रहकर किसी अनहोनी के दौरान ‘लाइफ गार्ड’ के तौर पर लोगों की मदद करने को तैयार रहते हैं।
विजय यादव के इस जज्बे की जहां सभी खूब सराहना करते हैं, वहीं इस बात का उन्हें दुख है कि चाहे नेता हो, शासक हो या प्रशासन किसी ने भी उनकी इस सेवा को अभी तक वैसा मान-सम्मान नहीं दिया और न ही उनकी मदद की जैसी करनी चाहिए। लेकिन उन्होंने सेवा करने की कसम खाई है और वो इसे ताउम्र जारी रखेंगे।

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