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समाज के सिपाही: मानव सेवा को सबसे बड़ी सेवा मानते हैं पुरुषोत्तम पाटील

रवींद्र मिश्रा

कहा जाता है कि बच्चे देश का भविष्य होते हैं। देश का भविष्य और उन्नति बच्चों पर ही निर्भर करती है। देश को सही रास्ते पर चलाने में युवा पीढ़ी का अहम योगदान होता है। युवा जितना समृद्ध होगा, देश उतनी ही गति से आगे बढ़ेगा। लेकिन आज युवा पीढ़ी रास्ता भटक कर संस्कार विहीन होती जा रही है। आधुनिकता की आड़ में हम अपने संस्कारों को भूलते जा रहे हैं। इसलिए जरूरी है कि हम अपने बच्चों को संस्कारित कर उन्हें उचित मार्ग पर लाने की कोशिश करें।
वसई तालुका के नायगांव स्थित जूचंद्र गांव के पूर्व सरपंच पुरुषोत्तम पाटील कहते हैं कि बच्चा कुंभार की कच्ची मिट्टी के घड़े समान होता है। छोटी उम्र में उसे जिस तरफ मोड़ना चाहो वह मुड़ जाएगा। इसलिए बच्चों में अगर अच्छे संस्कार डाले जाएं तो वह सुसंस्कृत, सभ्य समाज की स्थापना कर सकता है। तुंगारेश्वर पर्वत के परशुराम कुंड पर तपस्या कर रहे बालयोगी सदानंद महाराज आश्रम में भी समय-समय पर बाल संस्कार शिविर का आयोजन कर वहां बच्चों को सिखाया जाता है कि आपका पास-पड़ोस, अपने माता-पिता, परिवार, परिजनों तथा साथियों के साथ कैसा व्यवहार होना चाहिए, जिससे समाज सहित देश में आपका नाम हो।

१९७८ से १९८३ तक गांव के सरपंच रहे पुरुषोत्तम पाटील ने १९८३ में शिवछत्रपति समाज सेवा मंडल की स्थापना की और समाज सेवा में जुट गए। अपनी संस्था के माध्यम से समय-समय पर सामूहिक विवाह का आयोजन कर अब तक २,००० से अधिक लोगों का घर बसाने का काम उन्होंने किया है। पालघर जिले के जव्हार, वाड़ा, विक्रमगढ़, तलासरी, मोखाड़ा, शहापुर के विभिन्न आदिवासी गांवों में जाकर समय-समय पर उन्हें मदद पहुंचाते रहते हैं। ठंड के समय आदिवासी लोगों में कंबल, चादर का वितरण करना उनकी समाज सेवा का अंग बन गया है। दूर-दराज के गांवों से विद्यालय पहुंचने वाले विद्यार्थियों को साइकिल वितरित करते हैं। विद्यार्थियों को नोटबुक, यूनिफॉर्म तथा समय-समय पर सेवा वैंâप का आयोजन कर उनके मनोरंजन के साथ उन्हें आत्मरक्षा के गुण भी सिखाते हैं। नायर अस्पताल के सहयोग से प्रति वर्ष रक्तदान शिविर का आयोजन करते हैं। ‘राम राम’ से अपनी दिनचर्या शुरू करनेवाले पुरुषोत्तम पाटील ने यह साबित कर दिया है कि यथा नाम तथा गुण। वे कहते हैं कि मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं और मानव सेवा से बड़ी कोई सेवा नहीं। इसलिए प्रत्येक इंसान को चाहिए कि वह अपना मानव धर्म निभाकर समाज सहित देश की उन्नति में अपना योगदान दे।

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