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समाज के सिपाही : ज्यादा से ज्यादा लोगों तक सरकारी योजना पहुंचाने का लक्ष्य

आनंद श्रीवास्तव

पिछले दिनों कुर्ला में एक शिविर लगा था। लोगों से पूछने पर पता चला कि यह शिविर आधार कार्ड, पैन कार्ड, डोमेसाइल सर्टिफिकेट जैसे कई सरकारी कागजात बनाने का वैंâप है। लेकिन यह वैंâप मुफ्त में था। इसमें कोई सरकारी शुल्क भी नहीं लिया जा रहा था। इसके आयोजक थे सतीश बेलमकर, जिन्होंने झुग्गी बस्तियों में जाकर लोगों को बेसिक कागजात बनाकर देने का प्रण लिया है। सतीश बेलमकर का कहना है कि ‘यही वो बेसिक डॉक्यूमेंट होते हैं जो सरकारी योजनाओं के लिए लागू होते हैं। इन डॉक्यूमेंट्स के अभाव में कई जरूरतमंद लोग सरकारी योजना या सब्सिडी पाने से वंचित हो जाते हैं। विधवा या दिव्यांग, वरिष्ठ नागरिक सरकारी योजनाओं की पेंशन पाने से वंचित रह जाते हैं। मैंने देखा मुंबई जैसे देश के अग्रणी शहर की झोपड़पट्टी बहुल बस्तियों में आज भी कई गरीब, अनपढ़ और मजदूर हैं, जो जानकारी के अभाव या समय के अभाव में ‘आपले सरकार’ केंद्र तक जाकर अपने बेसिक सरकारी डॉक्यूमेंट नहीं बनवा पाते हैं। इसीलिए मैंने सोचा कि क्यों न ऐसी बस्तियों के भीतर जाकर लोगों के घर के करीब पहुंचकर उनके कागजात बनाए जाएं।’ इस तरह सतीश बेलमकर और उनकी पत्नी शिल्पा बेलमकर ने अब तक ३,७०० लोगों को मुफ्त में डॉक्यूमेंट बनाकर दिया है। डॉक्यूमेंट्स को बनाने में लगनेवाला बेसिक शुल्क भी उन्होंने खुद भरा है।
मूलत: महाराष्ट्र के सोलापुर के रहनेवाले सतीश के चाचा वर्ष १९५८ में मुंबई आए और १९६० में उनके पिता। दोनों एलफिंस्टन मिल में नौकरी करने लगे। सतीश कहते हैं कि ‘मेरे पिता एलफिंस्टन मिल में यूनियन नेता थे। अपने बड़े-बुजुर्गों के सामाजिक कार्यों को बचपन से ही देखते रहने की वजह से मेरे मन में भी समाजसेवा की भावना बनी रही। यही वजह है कि व्यवसायी होने के बावजूद मैं प्रति सप्ताह सामाजिक उपक्रमों का आयोजन करता रहता हूं। सतीश बेलमकर अक्सर प्रâी मेडिकल वैंâप, रोजगार मार्गदर्शन शिविर और खेल को बढ़ावा देने के लिए क्रिकेट व अन्य खेल प्रतियोगिता का आयोजन करते रहते हैं। इसके अलावा साईबाबा की पालकी या फिर किसी महापुरुष की जयंती पर सतीश बेलमकर की ओर से जनता के लिए खाना वितरण का आयोजन किया जाता है। उनकी यह सेवा लगातार जारी है और चलती ही रहेगी, ऐसा विश्वास दिलाते हुए सतीश बेलमकर कहते हैं कि एक समय मैं खुद सुविधाओं के अभाव में पीछे रह गया था। लेकिन मैं चाहता हूं कि दूसरा कोई व्यक्ति परेशानी न उठाए।

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