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सोमैया सदमे में…अग्रिम जमानत याचिका हुई रद्द, बाप-बेटे पर लटकी गिरफ्तारी की तलवार

सामना संवाददाता / मुंबई। विक्रांत ‘चंदा जालसाजी’ मामले में भाजपा के पूर्व सांसद किरीट सोमैया व उनके बेटे नील की मुश्किलें कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। इस मामले में कल अदालत ने दो घंटे तक चली सुनवाई के बाद किरीट सोमैया की अग्रिम जमानत की याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद से सोमैया सदमे में हैं। बचाव में सोमैया की तरफ से चंदे की रकम को करोड़ों के बजाय कुछ हजार रुपए होने का दावा करके अपने अपराध की गंभीरता को कम साबित करने का प्रयास किया गया। वहीं सोमैया की ओर से ये दावा भी किया गया कि राज्यपाल कार्यालय का बैंक खाता नहीं होने के कारण चंदे की रकम भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पार्टी फंड में जमा करा दी गई थी। उसके बाद पैसों का क्या हुआ, हमें नहीं पता। इस पर अदालत ने ये कहकर सोमैया को राहत देने से इंकार कर दिया कि यदि आप चंदा जुटाते हो तो चंदे की रकम सही जगह तक पहुंचे यह तय करना आपकी जिम्मेदारी है। फिलहाल सोमैया ने भाजपा को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है।
हिंदुस्थानी शौर्य का प्रतीक कहे जाने वाला विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत को नौसेना में लंबे समय तक सेवा देने के बाद १९९७ में सेवानिवृत्त किया गया था, लेकिन तब कुछ सामाजिक संगठनों ने विक्रांत को बचाने की मुहिम शुरू की थी। इन संगठनों का मानना था कि हिंदुस्थान की ओर से कई महत्वपूर्ण युद्धों में हिस्सा ले चुके आईएनएस विक्रांत को स्व्रैâप करने के बजाय इसे देश के पहले नौसेना संग्रहालय में बदला जाना चाहिए। विक्रांत को बचाने के नाम पर किरीट सोमैया और उनके पुत्र नील ने चंदा जमा किया था। सोमैया ने उक्त रकम राज्यपाल के पास जमा कराने की बात कही थी लेकिन चंदे के रूप में जुटाई गई रकम राज्यपाल कार्यालय में जमा ही नहीं कराई गई। हाल ही में आरटीआई के जरिए इसका खुलासा होने के बाद सोमैया पिता-पुत्र पर ऐसा आरोप लगाया जा रहा है कि उन्होंने चंदे के रूप में जुटाए गए करोड़ों रुपए राज्यपाल के सचिवालय में जमा कराने के बजाय इसका दुरुपयोग किया है। इस मामले में बुधवार को एक ५३ वर्षीय सैन्यकर्मी ने मुंबई के मानखुर्द थाने में गुरुवार को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। जिसके बाद पुलिस ने सोमैया पिता-पुत्र को पूछताछ के लिए तलब किया था। इससे बचने के लिए किरीट सोमैया ने ११ अप्रैल को मुंबई सेशन कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। तो वहीं कथित घोटाले मामले में कल अदालत ने किरीट सोमैया को अग्रिम जमानत देने से इंकार कर दिया जबकि अदालत उनके बेटे की अग्रिम पर आज सुनवाई करेगी। ऐसा विशेष अदालत के न्यायाधीश राहुल रोकडे ने स्पष्ट किया।
भाजपा पर भी उठे सवाल
‘विक्रांत चंदा विवाद’ बढ़ने के बाद आत्मरक्षा के लिए किरीट सोमैया ने कहा था कि साल २०१३ में ३५ मिनट के आंदोलन में इतनी बड़ी रकम वैâसे जमा हो सकती है? यह आंदोलन प्रतीकात्मक तौर पर किया गया था। उन्होंने कहा कि विक्रांत बचाव मुहिम के लिए जुटाई गई रकम भाजपा के पार्टी फंड में जमा कराया था। लेकिन बाद में उस रकम का क्या हुआ, उन्हें नहीं पता। सोमैया के इस खुलासे के बाद चंदे की रकम सोमैया ने किसे सौंपी उसका नाम सार्वजनिक करने की मांग जोर पकड़ने लगी है। तो वहीं सोमैया के वकील अग्रिम जमानत के लिए उच्च न्यायालय में जाने की तैयारी कर रहे हैं।

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