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कभी-कभी : ‘हो गई गलती, जाने दो यार…!’

  • यू.एस.मिश्रा

बात जब नए और पुराने दौर के गीतों की होती है तो आज भी लोग पुराने गीतों को ही तरजीह देना ज्यादा पसंद करते हैं क्योंकि संगीतकारों ने उन गीतों को अपनी मधुर धुनों और गायकों ने उन्हें अपने सुरों से ऐसा सजाया है कि उनकी मिठास आज भी जस-की-तस बरकरार है। रिकॉर्डिंग के दौरान गीतों में अपनी आत्मा उड़ेलनेवाले गायक कलाकारों के बीच कभी-कभार गीत की बेहतरी को लेकर कहासुनी तक हो जाती थी। एक गीत की रिकॉर्डिंग के दौरान कुछ ऐसा ही घटित हुआ जब गाने की रिकॉर्डिंग के बाद गायिका ने गायक से गाने को दोबारा रिकॉर्ड करने के लिए कहा। गायक ने गाने को दोबारा रिकॉर्ड तो कर दिया लेकिन गायिका के साथ गीत न गाने का फरमान भी सुना दिया।
१९७३ में रिलीज हुई फिल्म ‘यादों की बारात’ के एक गीत ‘आपके कमरे में कोई रहता है, हम नहीं कहते जमाना कहता है…’, जिसे मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखा था, की धुन जब आर.डी. बर्मन ने तैयार कर ली तो इस गीत को उन्होंने आशा भोसले, किशोर कुमार और अपनी आवाज में रिकॉर्ड कर लिया। रिकॉर्डिंग के बाद आशा भोसले ने जब इस गीत को सुना तो उन्हें लगा कि गीत कुछ और अच्छा हो सकता था। गाने में कुछ कमी रह गई है, जिसे बेहतर किया जा सकता है। अत: उन्होंने रिकॉर्डिंग स्टूडियो में मौजूद किशोर कुमार से कहा, ‘दादा, गाने को दोबारा रिकॉर्ड करते हैं?’ उनकी बातों को सुनकर किशोर कुमार ने कहा, ‘क्यों, अब दोबारा क्यों रिकॉर्ड करना है?’ इस पर आशा भोसले ने कहा, ‘दादा, यहां सौ लोग सुन रहे हैं। बाद में इसे हजारों लोग सुनेंगे। उन्हें हमारी गलतियां पता चल ही जाएंगी। लोग क्या कहेंगे?’ आशा की बात सुनकर किशोर कुमार बोले, ‘ठीक है, गाना दोबारा रिकॉर्ड करते हैं।’ इस बार गीत बेहतरीन ढंग से रिकॉर्ड हुआ। उसमें अब कोई भी कमी नहीं थी। गीत के दोबारा रिकॉर्ड होने के बाद किशोर कुमार आर.डी. बर्मन के पास पहुंच गए और पहुंचते ही उन्हें अपना फरमान सुना दिया कि अब वे आशा के साथ गाना नहीं गाएंगे। किशोर कुमार की बातों को सुनकर आर.डी. बर्मन के हाथ-पांव फूल  गए। घबराए हुए आर.डी. बर्मन भागते हुए आशा भोसले के पास पहुंचे और सवाल दागते हुए उनसे पूछा, ‘कहीं उन दोनों के बीच कोई बातचीत तो नहीं हो गई।’ आशा ने कहा, ‘मैंने सिर्फ  गाना दोबारा रिकॉर्ड करने के लिए कहा तो उनको गुस्सा आ गया।’ इस पर आर.डी. बर्मन ने उन्हें बताया कि किशोर कुमार कह रहे थे कि अब वे उनके साथ गाना रिकॉर्ड नहीं करेंगे। आर.डी. बर्मन की बातों को सुनकर आशा भोसले ने भी कह दिया, ‘मैं भी उनके साथ नहीं गाऊंगी।’ खैर, इस गाने की रिकॉर्डिंग के बाद अब बारी थी फिल्म के दूसरे गाने ‘ओ मेरी सोनी, मेरी तमन्ना, झूठ नहीं मेरा प्यार…’ को रिकॉर्ड करने की। मुसीबत ये थी कि इस गाने को भी आशा भोसले और किशोर कुमार की आवाज में रिकॉर्ड करना था। किशोर कुमार आशा भोसले के साथ गीत गाने के लिए भले ही मना कर चुके थे लेकिन पंद्रह-बीस दिनों तक आर.डी. बर्मन के मनाने के बाद वे आशा भोसले के साथ गाने के लिए तैयार हो गए और रिकॉर्डिंग रूम में पहुंचते ही आर.डी. बर्मन से बोले, ‘आशा लेफ्ट को देखकर गाएगी और मैं राइट को देखकर गाऊंगा।’ इस पर आशा भोसले ने कहा, ‘लेफ्ट में देखकर गाओ या राइट में देखकर मुझे क्या?’ खैर, गाने की रिकॉर्डिंग शुरू हुई आशा भोसले का अंतरा बाद में था इसलिए वो दीवार पर फूल – पत्तियां बनाने लगीं और किशोर कुमार ने गाना शुरू किया, ‘ओ मेरी सोनी, मेरी तमन्ना, झूठ नहीं मेरा प्यार, दीवाने से हो गई गलती, जाने दो यार…।’ इन पंक्तियों के पूरा होते ही जैसे ही किशोर कुमार ने इन पंक्तियों को दोहराया ‘ओ मेरी सोनी…’ शब्द के मुंह से निकलते ही गड़बड़ हो गई और उन्होंने ‘कट’ कह दिया। ‘कट’ कहते ही रिकॉर्डिंग रूम में स्तब्धता छा गई। सारे म्यूजिशियन खामोश हो गए। अब उन्होंने पलटकर आशा भोसले की ओर देखते हुए कहा, ‘कितनी देर से वहां देखते हुए तू दीवार पर फोटो क्या बना रही है। मुझे देखकर नहीं बता सकती थी कि मैं गलत गा रहा हूं।’ इस पर आशा भोसले ने कहा, ‘आप ही ने तो कहा था तुम लेफ्ट को देखो और मैं राइट को देखूंगा। इसमें मेरी क्या गलती है।’ अब किशोर कुमार ने कहा, ‘जाने भी दो न आशा, होता है ऐसा… याद है, महालक्ष्मी स्टेशन पर हम दोनों वड़ा-पाव खा रहे थे, तब तुमने मेरे ऊपर चाय गिरा दी थी। मेरे सफेद कपड़ों पर दाग लग गया था। तब मैंने तुमसे कुछ कहा था… नहीं न, अब तुम भी कुछ नहीं कहना।’ किशोर कुमार के इतना कहते ही आशा भोसले का चेहरा खिल गया और ये गाना खुशनुमा माहौल में रिकॉर्ड हो गया।

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