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कभी-कभी : ताउम्र निभाया रिश्ता

यू.एस. मिश्रा

वक्त के साथ त्योहारों का रंग और रूप चाहे जितना भी क्यों न बदल गया हो लेकिन नहीं बदला तो भाई-बहन के अटूट प्यार के बंधन का त्योहार रक्षाबंधन का स्वरूप। जिस किसी की कलाई पर बहन ने प्रेम डोर बांध दी, फिर चाहे वो अपना सगा भाई हो या पराया ताउम्र उस रिश्ते को निभाता है। फिल्म इंडस्ट्री के भी कुछ ऐसे कलाकार जो सगे भाई-बहन नहीं थे, इसके बावजूद उन्होंने भाई-बहन के रिश्ते को ताउम्र निभाया।
हीरो नहीं बन सकता- अपने जमाने की मशहूर फिल्म ‘वचन’ में गीता बाली के छोटे भाई का रोल निभाया था मशहूर कलाकार राजेंद्र कुमार ने। फिल्म में बेहद इमोशनल सीन थे इसलिए दोनों ही कलाकारों ने बड़ी शिद्दत से काम किया। फिल्म के भाई-बहन के किरदार में दोनों कलाकार इतना घुल-मिल गए कि दोनों के बीच एक बॉन्ड हो गया। उन दोनों के बीच वही रिश्ता पनपने लगा जो फिल्म के किरदार में वो निभा रहे थे। फिल्म कम्प्लीट हो गई और फिल्म की रिलीज के बाद दोनों ही कलाकार अपनी-अपनी जिंदगी में मशगूल हो गए। वक्त बीता और कुछ समय बाद गीता बाली ने अपनी एक होम प्रोडक्शन फिल्म प्रोड्यूस करने का इरादा किया। अब उन्होंने अपनी उस फिल्म में बतौर हीरो राजेंद्र कुमार को लेने के इरादे से राजेंद्र कुमार को अप्रोच किया। खैर, जब राजेंद्र कुमार को फिल्म की कहानी सुनाई गई तो उन्होंने गीता बाली की इस फिल्म में काम करने से साफ इंकार कर दिया। राजेंद्र कुमार द्वारा फिल्म में काम करने से साफ इंकार करने की बात जब गीता बाली को पता चली तो उन्हें बहुत बुरा लगा। वे मन ही मन सोच में पड़ गर्इं कि जब फिल्म की कहानी और हीरो का रोल दमदार है और राजेंद्र कुमार को इस फिल्म में काम करने के लिए मैं ठीक-ठाक पैसे भी दे रही हूं तो भला राजेंद्र कुमार इस फिल्म में काम करने से क्यों इनकार कर रहे हैं। अब उन्होंने राजेंद्र कुमार को फोन लगाया और उनसे पूछा, ‘फिल्म में आपका रोल बहुत बढ़िया है और आपने जितने पैसे मांगे वो मैं देने को तैयार हूं। इसके बावजूद आप फिल्म में काम करने से क्यों इनकार कर रहे हैं?’ गीता बाली की बात सुनकर राजेंद्र कुमार बोले, ‘पिछली फिल्म ‘वचन’ में मैं तुम्हारा भाई बना था। वो फिल्म भले ही खत्म हो गई हो लेकिन उस फिल्म में काम करते हुए मैंने मन ही मन तुम्हें अपनी बहन मान लिया था। अब फिल्म में एक्टिंग कर चार पैसे और कमाने के लिए मैं इस फिल्म में तुम्हारा हीरो नहीं बन सकता। ये रोल करना मेरे लिए पॉसिबल नहीं, बल्कि इम्पॉसिबल है। मैं अपनी बहन का हीरो किसी भी कीमत पर नहीं बन सकता।’ फोन पर राजेंद्र कुमार की बात सुनकर गीता बाली सन्न रह गर्इं। उनकी आंखों से आंसुओं की धार बह निकली और भर्राए हुए गले से उनके मुंह से बस इतना ही निकला, ‘मुझे नाज है तुझ जैसे भाई पर!’
फाड़ दिया साड़ी का पल्लू- अपने जमाने के मशहूर संगीतकार मदन मोहन के एक गाने की रिहर्सल चल रही थी। रिहर्सल के बाद लता मंगेशकर गाने की रिकॉर्डिंग के लिए तैयार थीं। लेकिन एक म्यूजिशियन हल्का सा उतरा हुआ तार बजा रहा था। मदन मोहन ने उस म्यूजिशियन से तार ट्यून कर लेने के लिए कहा। लेकिन वो म्यूजिशियन मदन मोहन के तीन-चार बार कहने के बावजूद तार को उनके कहे अनुसार ट्यून नहीं कर रहा था। बार-बार कहने के बावजूद जब उस म्यूजिशियन ने मदन मोहन की बात अनसुनी कर दी तो मदन मोहन को इतना गुस्सा आया कि स्टूडियो में लगे कांच पर जोर से हाथ मारते हुए वो उस म्यूजिशियन पर चिल्ला उठे, ‘मैं कब से कह रहा हूं कि तार ट्यून कर लो। अपने काम में आलस करते हो। अपनी रोजी-रोटी के साथ खिलवाड़ करते हो।’ खैर, मदन मोहन के हाथों से खून निकलता देख स्टूडियो में भगदड़ मच गई। लोग उनके हाथों से बह रहे खून को रोकने के लिए जब तक मरहम-पट्टी ढूंढते उसके पहले ही लता मंगेशकर रिकॉर्डिंग बूथ से बाहर निकलीं और एक पल की भी देरी किए बिना अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर मदन मोहन के हाथ में बांध दिया। रक्षाबंधन के मौके पर मदन मोहन लता मंगेशकर से बोले, ‘उस दिन मेरे हाथ में लगे घाव से खून रोकने के लिए जिस पल्लू को तुमने मेरी कलाई पर बांधा था। अब वो मेरी मौत के साथ जाएगा।’ इसके बाद दोनों ने भाई-बहन के इस रिश्ते को ताउम्र निभाया।

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