मुख्यपृष्ठग्लैमरकभी-कभी : ‘हीमैन’ की दरियादिली

कभी-कभी : ‘हीमैन’ की दरियादिली

यू.एस. मिश्रा

इंसान तो सभी हैं, लेकिन अपनों को मुसीबत में फंसा देखकर कोई मदद का हाथ बढ़ाता है तो कोई नजरें चुराते हुए साफ कन्नी काट जाता है। सच्चा मददगार वो है जो सामने वाले को मुसीबत में देखकर उसका हाथ थामकर उसे उस मुसीबत से उबार ले। फिल्म इंडस्ट्री के एक ऐसे ही मशहूर कलाकार को जब पता चला कि उनके साथ काम कर चुकी हीरोइन के पति को जीवनरक्षक एक दवाई की सख्त जरूरत है, तो…
बेहतरीन इंसान- फिल्म ‘रखवाला’ में धर्मेंद्र के साथ काम कर चुकी लीना चंदावरकर ने अभिनय की दुनिया में कदम रखने से पहले अपनी पसंदीदा हीरोइन मीना कुमारी की फिल्म ‘फूल और पत्थर’ सहित अन्य दूसरी फिल्मों में धर्मेंद्र को फिल्मी पर्दे पर देखा था। धर्मेंद्र उन्हें बहुत अच्छे लगते थे और वे उनकी बहुत बड़ी पैâन थीं। सेट पर काम करते हुए अक्सर वे उन्हें निहारा करतीं। धर्मेंद्र के साथ जब वे पहली बार एक फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में सेट पर पहुंचीं तो वे बेहद नर्वस थीं। धर्मेंद्र इस बात को समझ गए थे कि लीना काफी नर्वस हैं। अत: शूटिंग के दौरान सेट पर उपस्थित लीना चंदावरकर को अब उन्होंने कुछ ऐसा फील करवाया कि वो खुद बेहद नर्वस हैं। बकौल लीना चंदावरकर, ‘वो खुद को ऐसा दिखा रहे थे जैसे कि वो बहुत नर्वस हैं। इसलिए मुझे बहुत हेल्प मिली। मैं तो बेवकूफ थी। उनके नर्वस होने से मुझे काफी कॉन्फिडेंस मिला। बाद में पता चला वो ऐसा ही करते हैं। न्यूकमर्स हो या कोई हीरोइन डरती हो तो वो दिखाते हैं कि मुझे डायलॉग याद नहीं हो रहा है। ये हो रहा है, वो हो रहा है, तो सामनेवाले का कॉन्फिडेंस बढ़ता है। अगर वो अच्छी तरह से डायलॉग बोलते और मैं रीटेक पर रीटेक करती तो मेरा पूरा कॉन्फिडेंस गड़बड़ा जाता। धर्मेंद्र को एक बहुत ही अच्छे इंसान के रूप में मैंने पाया।’
और उन्होंने फोन काट दिया- लीना चंदावरकर का पहला विवाह गोवा के रहनेवाले सिद्धार्थ बांदोडकर के साथ हुआ था। विवाह हुए अभी कुछ ही दिन बीते थे कि एक इंसिडेंट में सिद्धार्थ काफी सीरियस हो गए, क्योंकि उनके पैंक्रियाज में गोली लगी थी। ऑपरेशन के बाद डॉक्टर्स ने परिवारीजनों को बताया कि प्रोटीन डाइजेस्ट करने के लिए लाइफ सेविंग ड्रग्स की सख्त जरूरत है। इसके साथ ही डॉक्टर्स ने यह भी कहा कि इस दवाई का बंदोबस्त कुछ ही घंटों में नहीं तो किसी भी हालत में अगर ये शाम तक मिल जाती है तो सिद्धार्थ की जान बचाई जा सकती है। खैर, डॉक्टर द्वारा बताई गई वो दवाई भारत में कहीं भी उपलब्ध नहीं थी। अब लीना चंदावरकर सहित उनका पूरा परिवार उस दवाई को विदेश से लाने की जद्दोजहद में जुट गया। ऐसी हालत में लीना चंदावरकर को कुछ सूझ नहीं रहा था कि किसे फोन करें और किसे नहीं। तभी अचानक लीना चंदावरकर को याद आया कि धर्मेंद्र अक्सर दूसरों की मदद करते हैं। अब एक पल की भी देरी किए बिना उन्होंने धर्मेंद्र का नंबर घुमा दिया। दूसरी तरफ धर्मेंद्र की पत्नी प्रकाश कौर थीं। प्रकाश कौर की आवाज सुनकर लीना चंदावरकर फफक-फफककर रो पड़ीं और रोते हुए ही उन्होंने प्रकाश कौर से कहा कि मुझे फलां-फलां दवाई की सख्त जरूरत है। हम लोग बहुत कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कुछ नहीं हो पा रहा है। अब प्रकाश कौर ने लीना चंदावरकर से कहा, ‘लीना, अभी कुछ मत बोलना। टाइम वेस्ट मत करो मैं इनको फोन दे रही हूं।’ इतना कहने के बाद उन्होंने तुरंत धर्मेंद्र को फोन थमा दिया। अब फोन पर लीना चंदावरकर सारी बात उन्हें समझाने लगीं कि ऐसा-ऐसा है, तो धर्मेंद्र ने कहा, ‘मुझे कुछ नहीं सुनना बस दवाई और दवा की कंपनी का नाम बताओ।’ इसके बाद धर्मेंद्र ने तुरंत फोन काट दिया और रिकॉर्ड समय में वो दवाई विदेश से न केवल उन्होंने मंगवाई, बल्कि एयरपोर्ट से खुद ड्राइव करते हुए वो दवाई जसलोक हॉस्पिटल में एडमिट लीना चंदावरकर के पति सिद्धार्थ तक पहुंचाई। अस्पताल में दवाई पहुंचाने के बाद वे लीना चंदावरकर से बोले हम सब सिद्धार्थ के लिए भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं। जब सिद्धार्थ की तबीयत में कुछ सुधार हुआ तो लीना चंदावरकर का भाई दवाई के पैसे देने के लिए धर्मेंद्र के घर गया क्योंकि वो दवाई उन्होंने विदेश से कुछ ही घंटों में मंगवाई थी, जो काफी महंगी थी। जब लीना के भाई ने धर्मेंद्र को पैसे देने चाहे तो धर्मेंद्र बोले, ‘मेरा हाथ देखा है न, दो किलो का पड़ेगा तो… तुम मुझे पैसे देने आए हो…।’ धर्मेंद्र की बात सुनकर लीना चंदावरकर का भाई कुछ बोलता उससे पहले ही धर्मेंद्र बोल पड़े, ‘नहीं नहीं… बिल्कुल नहीं… अगर मुझे ऐसा हुआ होता तो क्या तुम मेरे लिए नहीं करते…!’ और उन्होंने दवाई का पैसा लेने से साफ इनकार कर दिया।

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