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लद्दाख पर कभी हां कभी ना!

राज्य बनाने की मांग पर मोदी सरकार ने मूंदी आंखें सिर्फ होती हैं बैठकें, नहीं निकलता कोई निष्कर्ष

बैठक में चार सूत्रीय एजेंडे के तहत लद्दाख के लिए राज्य का दर्जा, संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा उपाय, दो लोकसभा सीटें और रोजगार के अवसर आदि पर चर्चा हुई, पर मोदी सरकार के प्रतिनिधियों ने इन मांगों को पूरा करने पर कोई आश्वासन नहीं दिया।’

संसद में एक विधेयक लाकर ५ अगस्त २०१९ को जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा दिए जानेवाले अनुच्छेद ३७० को मोदी सरकार ने खत्म कर दिया था। सरकार ने कुछ समय के लिए प्रदेश को जम्मू-कश्मीर व लद्दाख में बांटकर उसे केंद्र शासित प्रदेश बना दिया था। सरकार का कहना था कि ये कुछ समय के लिए है और फिर राज्य विधानसभा का गठन करके चुनाव करा दिए जाएंगे। इस व्यवस्था को चार साल से ज्यादा हो चुके हैं और लद्दाख के लोग राज्य गठन के लिए मोदी सरकार से कई बार मांग कर चुके हैं, पर मोदी सरकार ने इस पर आंखें मूंद रखी हैं। इससे लद्दाख की जनता में असंतोष पनप रहा है। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जम्मू-कश्मीर में तो आतंकवाद का बहाना है पर लद्दाख में तो कोई बहाना नहीं है।

लद्दाख के मुद्दों पर चर्चा करने के लिए केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय की अध्यक्षता में उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने मंगलवार को नई दिल्ली में बैठक की। समिति में एपेक्स बॉडी लेह और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के नेता भी शामिल हैं। बैठक में लेह और कारगिल के नेताओं ने अपने चार सूत्रीय एजेंडे को दोहराया, जिनमें लद्दाख के लिए राज्य का दर्जा, हिंदुस्थान के संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा उपाय, केंद्र शासित प्रदेश के लिए दो लोकसभा सीटें और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर आदि पर चर्चा हुई। पर मोदी सरकार के प्रतिनिधियों ने इन मांगों को पूरा करने पर कोई आश्वासन नहीं दिया, लेकिन लद्दाख के नेतृत्व से कहा कि लोगों की चिंताओं को दूर करने के लिए बातचीत जारी रहेगी। समझा जाता है कि मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल से कहा कि सरकार उनकी मांगों का समाधान करने के विकल्पों पर विचार करेगी।

पूर्व मंत्री और एपेक्स बॉडी लेह के सदस्य चेरिंग दोरजे कहते हैं कि उन्होंने बैठक के दौरान चार सूत्रीय एजेंडा उठाया। ‘मंत्री ने हमारी मांगें सुनीं, लेकिन न तो उन्हें अस्वीकार किया और न ही उन्हें स्वीकार किया। उन्होंने हमसे कहा कि वे इन मुद्दों पर चर्चा के लिए एक और बैठक करेंगे। राज्य की मांग पर केंद्र की प्रतिक्रिया के बारे में पूछे जाने पर, दोरजे कहते हैं, ‘उन्होंने न तो हां कहा और न ही न।’ प्रमुख राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ता और ‘केडीए’ के सदस्य सज्जाद कारगिली ने कहा कि उन्होंने केंद्र से कहा कि लद्दाख के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए इन चार मांगों को पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘हमें बताया गया कि मौजूदा शीतकालीन सत्र खत्म होने के बाद समिति फिर से बैठक करेगी।’ राज्य की मांग के प्रति भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के ठंडे रवैये का संकेत क्या हो सकता है, वार्ता के बाद जारी एक आधिकारिक हैंडआउट में यह उल्लेख नहीं किया गया कि यह मुद्दा लद्दाखी प्रतिनिधिमंडल द्वारा उठाया गया था। आधिकारिक हैंडआउट में लिखा है, ‘एबीएल और केडीए सदस्यों ने लद्दाख निवासियों के अधिकारों की सुरक्षा, फास्ट ट्रैक भर्ती प्रक्रियाओं, एलएएचडीसी को मजबूत करने, निर्णय लेने में अधिक भागीदारी आदि से संबंधित विभिन्न मुद्दे प्रस्तुत किए।’ इसमें आगे कहा गया कि नई दिल्ली ‘एबीएल’ और ‘केडीए’ के साथ बातचीत जारी रखेगी। बयान में कहा गया है, ‘श्री राय ने कहा कि सरकार नियमित आधार पर केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के समग्र और सतत विकास के लिए ‘एबीएल’, ‘केडीए’ और लद्दाख के लोगों के साथ जुड़ना जारी रखेगी।’ यहां तक कि लद्दाख से भाजपा सांसद जामयांग सेरिंग नामगयाल ने भी क्षेत्र की पहचान और हितों की सुरक्षा के लिए छठी अनुसूची से परे संवैधानिक सुरक्षा उपायों पर जोर दिया है। सांसद के गृह राज्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा गया है, ‘मैं दृढ़ता से संविधान की ६ठी अनुसूची में निर्धारित प्रावधानों से अधिक संवैधानिक सुरक्षा उपायों की आवश्यकता की वकालत करता हूं, जो विशेष रूप से लद्दाख के आदिवासी लोगों के हितों और आकांक्षाओं की रक्षा के लिए तैयार किए गए हैं।’

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