मुख्यपृष्ठनए समाचारकहीं भूख की मार... कहीं हो रहा है अनाज बेकार!

कहीं भूख की मार… कहीं हो रहा है अनाज बेकार!

  • १०० से ज्यादा देशों के पास नहीं है दाना
  • हर साल बर्बाद हो रहा ३० फीसदी खाना

एजेंसी / मेलबर्न
दुनिया के कई देश ऐसे हैं, जहां की बड़ी आबादी को एक वक्त का खाना मुश्किल से ही नसीब होता है। वहां लोग दाने-दाने को मोहताज रहते हैं जबकि अकेले मुंबई महानगर में प्रतिदिन करीब ६९ लाख किलो खाद्य सामग्री कचरे में फेंकी जाती है। पूरे हिंदुस्थान की बात करें तो यहां जितना अनाज पैदा होता है, उसका ३० फीसदी अनाज व्यर्थ ही बर्बाद हो जाता है। ऐसा दावा यूएन की हाल ही में जारी रिपोर्ट में किया गया है। रिपोर्ट में इसी के साथ ये चेतावनी भी जारी की गई है कि यदि ऐसा ही चलता रहा तो वर्ष २०५० तक आज के दुनिया में भुखमरी की समस्या आज से तीन गुना ज्यादा विकराल हो जाएगी।
बता दें कि हिंदुस्थान दुनिया में सबसे ज्यादा भोजन बर्बाद करने में दूसरे नंबर पर है। ये बर्बादी विवाह, जन्मदिन, गृहप्रवेश, मृत्यु भोज के मौके पर आयोजित होनेवाली दावतों के साथ-साथ दैनिक रूप से घरों में भोजन के इस्तेमाल में लापरवाही के कारण सर्वाधिक होती है। दूसरी ओर हमारे ही देश के २० करोड़ से अधिक लोग हर रात भूखे सो जाते हैं। संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम २०२१ के अनुसार भारत में हर साल ४० फीसदी भोजन शादियों, घरों में लापरवाही, खराब आपूर्ति और अव्यवस्था के कारण बर्बाद हो जाता है। यूएन की रिपोर्ट के मुताबिक यूरोप और उत्तरी अमेरिका में प्रत्येक व्यक्ति साल में ९५ से ११५ किलोग्राम खाने के सामान को बर्बाद करता है जबकि उप-सहारा अफ्रीका  और दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया में यह प्रति वर्ष छह से ११ किलोग्राम है। संयुक्त राष्ट्र और कृषि संगठन के अनुमान के मुताबिक दुनिया में पैदा होनेवाला करीब ३० फीसदी खाद्यान्न कभी भी खाने की प्लेट तक नहीं पहुंच पाता है। वह भी तब, जब दुनिया खाद्य संकट के बीच में है। १०० से ज्यादा देशों में वर्ष २००० की तुलना में २०२१ में अधिक आबादी के पास खाने को भोजन नहीं है। जनवरी से गेहूं की कीमत दोगुनी हो गई है। केला, मक्का और सोयाबीन जैसी अन्य खाद्य ‍वस्तुओं के दाम सर्वाधिक उच्चतम स्तर पर हैं। मलेशिया ने मुर्गे (चिकन) का भंडारण शुरू कर दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि खाने की बर्बादी सिर्फ खाद्य की बर्बादी नहीं होती, बल्कि यह इसकी पैदावार करने में लगनेवाले पानी, भूमि, खनिज जैसे संसाधन सभी की बर्बादी है। रिपोर्ट की मानें तो यूरोप और उत्तरी अमेरिका में प्रत्येक व्यक्ति साल में ९५ से ११५ किलोग्राम खाने के सामान को बर्बाद करता है। गौरतलब हो कि हिंदुस्थान में हर साल करीब २,़य१०० करोड़ किलो गेहूं खराब हो जाता है, जबकि ऑस्ट्रेलिया हर साल इतना ही गेहूं पैदा करता है। यहां हर साल ९० हजार करोड़ का ६.८ करोड़ टन खाना बर्बाद होता है, जो औसतन प्रति व्यक्ति ५० किलो है। मुंबई में हर दिन करीब ६९ लाख किलो खाद्य सामग्री कचरे में फेंकी जाती है, जिससे आधी मुंबई का हर दिन पेट भरा जा सकता है।

अन्य समाचार