वायरस की आहट

कोरोना ने फिर कदम बढ़ाया
लाखों पर मुसीबत का साया
यह मुसीबत कब टलेगी
जिंदगी में मच गई है खलबली
क्या पीछे कम हुई बर्बादी
अब बची हुई आबादी को करनी है आधी
तैयार रहना ह़ोश-ओ-आवस में
रहना क्या पता किस पर पड़े ये भारी
सरकार कुछ ऐसी नीति चलाए
कोरोना का एक भी किटाणु अटैक न कर पाए
कमजोर व्यक्ति को बरतना होगा ऐतिहात
वायरस से न डरना ।
अपने अपनों को बचाने का करना प्रयास
धरती को कोई क्या मर्ज है
कुदरत का क्या कोई कर्ज है
जो दूषित हवा से सांसों को लगा है अटकाने
प्रभु तू बक्श दे धरती को रक्षक दे
जो इस भूमि के भक्षक हैं
उनको तू लग जा लटकाने।
अन्नपूर्णा कौल, नोएडा

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