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`मुझे कोई हाथ नहीं लगा सकता!’-सौंदर्या शर्मा

सुंदर और तेजस्वी अभिनेत्री का अभिनय क्षेत्र में होना स्वाभाविक है। लेकिन खूबसूरत और होनहार अभिनेत्री सौंदर्या शर्मा खुद एक डेंटिस्ट हैं और उनका अभिनय करने का मोह उन्हें डॉक्टरी पेशे से दूर करता गया। `एमएक्स प्लेयर’ पर `रक्तांचल पार्ट-१’ और पार्ट-२ में बेहद संजीदा अभिनय करनेवाली सौंदर्या पिछले दो वर्षों से सुर्खियों में हैं। उनकी फिल्म ‘रांची डायरीज’ के साथ ही शो `हमसे है हमसफर’ में भी सौंदर्या के अभिनय को सराहा गया। पेश है, सौंदर्या शर्मा से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

`रक्तांचल’ वेब सीरीज में आप कौन-सा किरदार निभा रही हैं?
मेरा किरदार गर्ल नेक्स्ट टू डोर वाला है। एक सीधी-साधी युवती की जिंदगी कैसे बदल जाती है, कैसे उस पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी आ जाती है और कैसी कठिनाइयों का सामना एक अकेली लड़की को करना पड़ता है। कहानी मेरे इर्द-गिर्द ही घूमती है और पहली बार मुझे एक सशक्त महिला प्रधान रोल मिला है।

इस रोल के लिए आपको किस तरह की तैयारी करनी पड़ी?
कहानी १९९० की है और अब चल रहा है २०२१। मेरे लिए ३० वर्ष पुराना बैकड्रॉप है। कहानी उत्तरांचल की है, तो उस दशक की कहानी को रियल लोकेशंस पर जो भी दिक्कतें शूटिंग करते समय आनी थीं वो आर्इं। किरदार की सच्चाई को दिखाने के लिए मुझे भाषा और गेटअप का खास खयाल रखना पड़ा।

`रक्तांचल’ पार्ट-१ और अब `रक्तांचल’ पार्ट-२ की कहानी में क्या बदलाव किया गया?
`रक्तांचल’ के पहले हिस्से में कहानी की शुरुआत है। लड़की पर अन्याय होते ही कैसे कहानी टर्न लेती है और उसमें संघर्ष-टकराव होता है, जबकि `रक्तांचल-२’ में मैं, माही गिल, आशीष विद्यार्थी, करण पटेल, निकेतन धीर, क्रांति प्रकाश झा जैसे कलाकारों को दिखाया गया है। सीजन-१ में मेरा सिर्फ इंट्रोडक्शन था। मेरी कहानी सीजन-२ से शुरू होती है।

डॉक्टर (डेंटिस्ट) होने के बावजूद आप अभिनय के क्षेत्र में कैसे आईं?
मैं डेंटिस्ट जरूर हूं लेकिन मुझे पहले से अभिनय में जाना था। मैं ब्राह्मण परिवार से हूं। माता-पिता की राय थी कि अच्छे और ब्राह्मण परिवार की लड़कियां अभिनय में नहीं जाती। मुझे उन्होंने पहले अलाउड ही नहीं किया। मैंने उन्हें वादा किया कि पढ़-लिखकर मैं काबिल बनूंगी। उनके दिमाग में यह बात भी थी कि फिल्म इंडस्ट्री का कोई भविष्य नहीं, यहां सिर्फ उन्हीं लोगों को मौका मिलता है, जो फिल्मी परिवार से होते हैं। हालांकि, उनकी यह बात सही भी है। लेकिन मनोज बाजपेई, इरफान खान, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, आयुष्मान खुराना जैसे कई एक्टर्स हैं, जिनका फिल्मी परिवार नहीं है फिर भी अपने टैलेंट की बदौलत वे बॉलीवुड में राज कर रहे हैं।

क्या मुंबई आने के लिए आपके पैरेंट्स ने हां कह दी थी?
मेरे पैरेंट्स के होते हुए शाम को ६ बजे के बाद मेरा घर से बाहर निकलना असंभव है। उनके इस उसूल के कारण उनकी रजामंदी लेना जरूरी था। डेन्टिस्ट्री को पूरा कर मैं दिल्ली हॉस्पिटल में इंटर्नशिप करने लगी। उसी दौरान स्टायपेंड के पैसों से मैंने ऑडिशन देना शुरू किया, जिसके बारे में मेरे माता-पिता को नहीं मालूम था। मेरे परिवार में सभी डॉक्टर्स, इंजिनियर और आईएएस ऑफिसर हैं। मेरे परिवार में अभिनय से दूर-दूर तक कोई संबंधित नहीं है।

क्या मुंबई में आने के बाद आपका सामना नेपोटिज्म से हुआ?
नेपोटिज्म यह एक अंडर स्टेटमेंट होगा। मेरी मुश्किलों की कोई गिनती ही नहीं थी। हॉस्पिटल्स से छुट्टियां लेकर स्टायपेंड के पैसों से यहां मुंबई आकर संघर्ष करना बेहद भयंकर था। कास्टिंग एजेंट्स किस चिड़िया का नाम है, मैं नहीं जानती थी। मुंबई के किस एरिया को जुहू कहते हैं ये तक मुझे पता नहीं था। गूगल मैप के जरिए मैं कास्टिंग एजेंट्स का पता करती रही। प्रोडक्शन हाउस के चक्कर काटती रही। नेपोटिज्म से भी बड़ी संघर्ष भरी राहें थीं मेरी। अगर आप किसी निर्माता-एक्टर के बच्चे हो तब भी आपको एक बार ही मौका मिलेगा, बार-बार नहीं। खैर, बड़ी जद्दोजहद के बाद मुझे थोड़ा-थोड़ा रेकनिजेशन मिलता गया।

किसी एजेंट द्वारा शोषण करने या कोई गलत अनुभव तो नहीं हुआ न?
लड़की अगर मेंटली स्ट्रॉन्ग हो, जरूरतमंद न हो तो कोई उसका बाल भी बांका नहीं कर सकता। मैं अभिनय को अपना करियर बनाना चाहती हूं लेकिन बाय हुक या क्रुक नहीं। मैं एक डॉक्टर हूं और मेरे पास मेरी डिग्री है। अगर ऑडिशन में पास होती हूं तो काम करूंगी वरना जय राम जी की। मुझे मेरी मर्जी के बगैर कोई हाथ नहीं लगा सकता। अभिनय मेरी रोजी-रोटी का जरिया नहीं है। अब तो माता-पिता का योगदान और आशीर्वाद दोनों मेरे साथ है।