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मोदी राज में बोलना मना है! …केंद्र की भाजपा सरकार को अपनी आलोचना नहीं है मंजूर

दे चुकी है ६,९५४ वेबसाइट ब्लॉक करने का आदेश
यूं तो भाजपा के नेता कहते हैं कि देश में लोकतंत्र मजबूत है और सबको बोलने की आजादी है, पर आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि यह सब कहने की बातें हैं। हकीकत में मोदी सरकार के खिलाफ बोलना काफी भारी पड़ता है। आज सोशल मीडिया का जमाना है। तमाम तरह की वेबसाइट्स और यूट्यूब चैनल्स पर लोग अपनी बातें रखते हैं। इसमें सरकार समर्थक और विरोधी दोनों तरह के लोग होते हैं। अब समर्थकों की तो बल्ले-बल्ले है, पर सरकार की नीतियों का जिसने विरोध किया, उसकी तो खैर नहीं। कोई न कोई मामला निकालकर कानूनी कार्रवाई कर दी जाती है। सरकार विरोध को देश विरोध से जोड़कर कानूनी कार्रवाई कर दी जाती है।
हाल ही में बिहार के एक एक्टिविस्ट कन्हैया कुमार को सूचना के अधिकार (आरटीआई) से प्राप्त जानकारी बताती है कि २०१३ से २०२३ के बीच वेबसाइट ब्लॉक करने के आदेश सौ गुना से अधिक बढ़ गए हैं यानी मोदी सरकार के आने के बाद से वेबसाइट ब्लॉक करने की संख्या १०० गुना बढ़ी है। अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ के मुताबिक, कुमार ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, २००० की धारा ६९ए के तहत जारी वेबसाइट और ऑनलाइन पोस्ट ब्लॉक करने के आदेशों पर आंकड़े प्राप्त किए हैं। केंद्र सरकार ने २०१३ में ऐसे ६२ आदेश जारी किए थे, जबकि पिछले साल अक्टूबर तक ६,९५४ ऐसे आदेश जारी किए गए। यह तब हुआ है जब दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (आईएसपी) को हिंदुस्थान में सर्वरों के इंटरनेट प्रोटोकॉल (आईपी) एड्रेस संकलित करने का निर्देश दिया है, ताकि उन्हें जल्द ब्लॉक करने की सुविधा मिल सके। डीओटी ने २० दिसंबर २०२३ के आदेश में कहा था, ‘वेब/एप्लिकेशन सर्वर के स्थान का जब भी आवश्यकता हो या यदि वे देश के कानूनों का अनुपालन नहीं कर रहे हैं या उन्हें अदालत के आदेशों आदि के अनुसार अवरुद्ध करने की आवश्यकता है, तत्काल आधार पर पता लगाया जाना चाहिए।’ हालांकि, आईटी मंत्रालय ने ब्लॉकिंग नियमों में गोपनीयता का हवाला देते हुए इन आंकड़ों का विश्लेषणात्मक विवरण देने से इनकार कर दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, ब्लॉक किए गए अधिकांश वेबपेज के व्यक्तिगत पोस्ट, वीडियो या प्रोफाइल होने की संभावना है – २०२२ में। केंद्र सरकार ने एक सवाल के जवाब में संसद में बताया था कि २२८ वेबसाइटें ब्लॉक की गर्इं हैं।

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